सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
गाज़ियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में साइबर ठगों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामले में ठगों ने लोनी निवासी एक सेवानिवृत्त कर्मचारी (प्रेमप्रकाश) और उनकी पत्नी को अपना शिकार बनाया है। अपराधियों ने दंपत्ति को डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर उनके बैंक खाते से 17.50 लाख रुपये पार कर दिए।
पूरी घटना: 12 फरवरी से शुरू हुआ खेल
पीड़ित प्रेमप्रकाश के अनुसार, यह सिलसिला 12 फरवरी 2026 को शुरू हुआ जब उनके पास एक अज्ञात कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को महाराष्ट्र पुलिस हेडक्वार्टर का अधिकारी बताया।
- आरोप: ठगों ने पीड़ित को डराया कि उनके नाम पर जारी एक सिम कार्ड से लोगों को धमकियाँ दी जा रही हैं।
- फर्जी वारंट: इसके बाद, अपराधियों ने वीडियो कॉल के ज़रिए एक फर्जी गिरफ्तारी नोटिस दिखाया और दावा किया कि उनकी आईडी पर खुले एक अवैध बैंक खाते में मनी लॉन्ड्रिंग का पैसा आ रहा है।
- डिजिटल अरेस्ट: दंपत्ति को करीब 20 मिनट तक वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा गया और जेल जाने का डर दिखाया गया।
बैंक जाकर ट्रांसफर कराए पैसे
ठगों ने मामले को रफा-दफा करने और ‘जांच’ के नाम पर दंपत्ति पर दबाव बनाया। डर के मारे पीड़ित ने बैंक पहुंचकर ठगों द्वारा बताए गए खातों में 17.50 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। पैसे कटने के बाद जब संपर्क टूट गया, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ।
पुलिस की कार्रवाई
पीड़ित ने इस मामले की शिकायत गाज़ियाबाद साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई है। पुलिस ने आईटी एक्ट और धोखाधड़ी की धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
सावधान रहें!
विशेषज्ञों और पुलिस का स्पष्ट कहना है कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई प्रावधान नहीं है।
“याद रखिए, डर ही साइबर ठगों का सबसे बड़ा हथियार है। कानून की किसी भी किताब में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसा कोई शब्द नहीं है, इसलिए न डरें और न ही बिना सोचे-समझे किसी अनजान खाते में पैसे ट्रांसफर करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और देखते रहिए—सावधान नेशन न्यूज़।”