सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
पैकेटबंद जंक फूड पर स्टार रेटिंग नहीं, अब सीधे मिलेगी ‘चेतावनी’; सुप्रीम कोर्ट और विशेषज्ञों ने जताई स्टार रेटिंग पर आपत्ति।
भारत में बढ़ते मोटापे और डायबिटीज के खतरों को देखते हुए अब जंक फूड की पैकेजिंग में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा प्रस्तावित ‘हेल्थ स्टार रेटिंग’ सिस्टम पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह रेटिंग सेहत के लिए फायदेमंद नहीं, बल्कि भ्रमित करने वाली है।
[मुख्य विवरण]
- स्टार रेटिंग क्यों नहीं?: ICMR और AIIMS जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार रेटिंग जंक फूड के हानिकारक प्रभावों को कम करके दिखा सकती है। उदाहरण के लिए, किसी अस्वास्थ्यकर उत्पाद को 2 या 3 स्टार मिलने पर उपभोक्ता उसे ‘सुरक्षित’ मान सकता है, जबकि उसमें चीनी या नमक की मात्रा खतरनाक स्तर पर हो सकती है।
- सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI को निर्देश दिया है कि केवल पीछे की तरफ बारीक अक्षरों में पोषण तालिका (Nutrition Table) देने से काम नहीं चलेगा। पैकेट के बिल्कुल सामने (Front-of-Package Labelling) स्पष्ट चेतावनी होनी चाहिए कि इसमें चीनी, नमक या वसा कितनी अधिक है।
- कंपनियों का दबाव: विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी खाद्य कंपनियाँ स्टार रेटिंग का समर्थन कर रही हैं क्योंकि यह उनके उत्पादों की खराब सामग्री को छिपाने में मदद करता है। जबकि, जनहित में चिली और मेक्सिको जैसे देशों की तरह ‘ब्लैक वार्निंग लेबल’ की मांग की जा रही है।
जंक फूड का युवाओं की सेहत पर असर बेहद गहरा और दूरगामी होता है। चूँकि युवाओं का शरीर अभी भी विकास की अवस्था में होता है, इसलिए अत्यधिक कैलोरी और कम पोषण वाला यह खाना उनके लिए एक ‘धीमे जहर’ की तरह काम करता है।
यहाँ इसके मुख्य प्रभावों का पूरा विवरण दिया गया है:
1. शारीरिक स्वास्थ्य पर असर (Physical Health)
- मोटापा (Obesity): जंक फूड में बहुत अधिक फैट और चीनी होती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है। यह युवाओं में टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
- हृदय रोग: इसमें मौजूद ‘सैचुरेटेड फैट’ और ‘सोडियम’ कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल बढ़ा देते हैं, जिससे भविष्य में दिल के दौरे की संभावना बढ़ जाती है।
- पाचन संबंधी समस्याएँ: जंक फूड में फाइबर नहीं होता, जिससे कब्ज, एसिडिटी और पेट में सूजन की समस्या बनी रहती है।
2. मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार (Mental Health)
- एकाग्रता में कमी: अत्यधिक चीनी और कृत्रिम मिठास से मस्तिष्क में ‘केमिकल इम्बैलेंस’ हो सकता है, जिससे पढ़ाई या काम में ध्यान लगाने में मुश्किल होती है।
- चिड़चिड़ापन और अवसाद: शोध बताते हैं कि जो युवा ज्यादा जंक फूड खाते हैं, उनमें तनाव, एंग्जायटी (घबराहट) और डिप्रेशन के लक्षण अधिक पाए जाते हैं।
- नींद में खलल: कैफीन और हाई शुगर वाले ड्रिंक्स सोने के पैटर्न को बिगाड़ देते हैं, जिससे दिनभर थकान बनी रहती है।
3. ऊर्जा और विकास (Energy & Growth)
- पोषक तत्वों की कमी: इसे ‘एम्प्टी कैलोरी’ (खाली कैलोरी) कहा जाता है क्योंकि इसमें ऊर्जा तो होती है लेकिन विटामिन, खनिज और प्रोटीन शून्य होते हैं। इससे शरीर अंदर से कमजोर हो जाता है।
- हड्डियों की कमजोरी: कोल्ड ड्रिंक्स और जंक फूड शरीर से कैल्शियम सोख लेते हैं, जिससे युवाओं की हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं और फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।
4. त्वचा और हार्मोनल बदलाव (Skin & Hormones)
- मुंहासे (Acne): जंक फूड से शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ता है, जो चेहरे पर कील-मुंहासों का मुख्य कारण बनता है।
- हार्मोनल असंतुलन: विशेष रूप से युवतियों में, जंक फूड के कारण PCOD और अनियमित पीरियड्स जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ रही हैं।
“तो अगली बार जब आप बाज़ार से कोई पैकेटबंद चीज़ उठाएं, तो सिर्फ स्वाद न देखें, उसके पीछे छिपे खतरे को भी पहचानें। आपकी सेहत, आपकी ज़िम्मेदारी है। देखते रहिए सावधान नेशन न्यूज़,