वाशिंगटन/इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह प्रस्तावित शांति समझौते (डील) को स्वीकार नहीं करता है, तो अमेरिकी सेना ईरान के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस कर देगी। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान का हर पावर प्लांट और हर महत्वपूर्ण पुल अमेरिका के निशाने पर है।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोमवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच ‘इस्लामाबाद टॉक्स’ का दूसरा दौर शुरू होने जा रहा है। ट्रंप की इस धमकी ने कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
ट्रुथ सोशल पर ट्रंप का कड़ा प्रहार
राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक लंबी पोस्ट साझा की। उन्होंने ईरान पर मौजूदा संघर्ष विराम (सीजफायर) के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया। ट्रंप ने कहा, “ईरान ने शनिवार को गोलीबारी करके सीजफायर एग्रीमेंट को पूरी तरह से नकार दिया है। उन्होंने न केवल नियमों को तोड़ा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों को भी निशाना बनाया है।”
ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ओर से चलाई गई गोलियों ने एक फ्रांसीसी जहाज (French Ship) और यूनाइटेड किंगडम के एक मालवाहक जहाज को निशाना बनाया। ट्रंप ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शांति की कोशिशों पर सीधा हमला करार दिया।
47 साल का हिसाब चुकता होगा
अपने संबोधन में ट्रंप ने ईरान को एक “उचित और वाजिब” डील का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने कहा, “हम ईरान को एक बहुत ही सही डील दे रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि वे इसे मानेंगे। लेकिन अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो यूनाइटेड स्टेट्स ईरान के हर एक पावर प्लांट और हर एक ब्रिज को उड़ा देगा।”
ट्रंप ने आगे बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर ईरान डील स्वीकार नहीं करता है, तो यह उनके लिए एक “सम्मान की बात” होगी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपतियों पर निशाना साधते हुए कहा, “मैं वह काम करूँगा जो पिछले 47 सालों में अमेरिका के कोई भी राष्ट्रपति ईरान के खिलाफ नहीं कर पाए।”
इस्लामाबाद टॉक्स-2 की पुष्टि
ट्रंप ने इसी पोस्ट के जरिए उन अटकलों पर भी विराम लगा दिया जो पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तान की राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही थीं। ट्रंप ने पुष्टि की कि उनके प्रतिनिधि सोमवार शाम को इस्लामाबाद पहुंचेंगे।
इससे पहले, पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया ‘डॉन’ ने पुलिस के हवाले से बताया था कि विदेशी डेलिगेशन के आने के चलते इस्लामाबाद के ‘रेड जोन’ में ट्रैफिक पूरी तरह बंद कर दिया गया है। अब ट्रंप के बयान से साफ हो गया है कि दुनिया की नजरें अब इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच पर्दे के पीछे की बातचीत निर्णायक मोड़ ले सकती है।
होर्मुज की घेराबंदी और आर्थिक चोट
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने हाल ही में ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की धमकी दी थी। ट्रंप ने इस दावे की खिल्ली उड़ाते हुए कहा कि ईरान की यह बात “अजीब” है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नाकेबंदी (Blockade) की वजह से स्ट्रेट पहले से ही लगभग बंद है।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान अपनी हरकतों से अमेरिका की ही मदद कर रहा है क्योंकि इस नाकेबंदी के कारण ईरान को रोजाना 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4100 करोड़ रुपये) का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। ट्रंप का तर्क है कि ईरान की अर्थव्यवस्था इस दबाव को ज्यादा दिनों तक झेल नहीं पाएगी।
युद्ध से सीजफायर तक का सफर
बता दें कि इस ताजा तनाव की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी, जब इजरायल और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त हवाई अभियान (Air Strike) शुरू किया था। हफ्तों की बमबारी के बाद, 8 अप्रैल को दो हफ्ते के लिए अस्थायी संघर्ष विराम की घोषणा की गई थी। इस दौरान शांति के रास्ते खोजने के लिए इस्लामाबाद में पहले दौर की वार्ता हुई थी, जो बेनतीजा रही। अब दूसरे दौर की बातचीत से पहले ट्रंप की यह धमकी ईरान पर ‘सरेंडर’ करने का मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश मानी जा रही है।
क्या होगा अगर वार्ता विफल रही?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोमवार को इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत विफल रहती है, तो खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) में एक पूर्ण विकसित युद्ध की संभावना बढ़ जाएगी। ट्रंप का “पावर प्लांट और ब्रिज” वाला बयान संकेत देता है कि अमेरिका अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईरान की नागरिक अर्थव्यवस्था को भी निशाना बनाएगा ताकि देश पूरी तरह घुटनों पर आ जाए।
पूरी दुनिया अब सोमवार शाम का इंतजार कर रही है, जब इस्लामाबाद में मेज पर बैठे कूटनीतिज्ञ तय करेंगे कि भविष्य में शांति होगी या महाविनाश।
——————————
Savdhaan Nation News
