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NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर सरकार की सख्ती: पेपर लीक और फर्जी दावों पर बड़ा एक्शन

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नई दिल्ली, 19 जून 2026

क्या है पूरा मामला?
NEET UG री-एग्जाम से पहले केंद्र सरकार ने मैसेजिंग ऐप Telegram पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला किया। सरकार और National Testing Agency (NTA) का कहना है कि कुछ Telegram चैनल और ग्रुप NEET री-एग्जाम से जुड़ी फर्जी जानकारी, कथित पेपर लीक और छात्रों को ठगने वाले दावे फैला रहे थे।

यह कदम परीक्षा की सुरक्षा और छात्रों को धोखाधड़ी से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया बताया गया है। सरकार ने यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धारा 69A के तहत की। Telegram पर यह प्रतिबंध सीमित समय के लिए लगाया गया, ताकि परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित न हो।

क्यों पड़ी Telegram पर सख्ती की जरूरत?
NEET जैसी बड़ी परीक्षा में लाखों छात्र शामिल होते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अफवाहें तेजी से फैलती हैं। कुछ लोग Telegram चैनलों के जरिए दावा कर रहे थे कि उनके पास NEET के असली प्रश्नपत्र हैं या वे परीक्षा में मदद कर सकते हैं।
NTA ने छात्रों को चेतावनी दी कि ऐसे दावों पर भरोसा न करें क्योंकि कई बार ठग छात्रों से पैसे लेकर फर्जी पेपर देने का दावा करते हैं। एजेंसी ने कहा कि आधिकारिक जानकारी केवल NTA के माध्यम से ही ली जाए।

सरकार की चिंता सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं थी, बल्कि फर्जी स्क्रीनशॉट और पुराने मैसेज को एडिट करके झूठे सबूत बनाने की समस्या भी सामने आई। इसी कारण Telegram के मैसेज एडिट फीचर पर भी कुछ समय के लिए रोक लगाई गई।

सरकार ने क्या कार्रवाई की?
सरकार द्वारा उठाए गए मुख्य कदम:
भारत में Telegram की पहुंच को अस्थायी रूप से सीमित किया गया।
परीक्षा अवधि के दौरान संदिग्ध गतिविधियों को रोकने की कोशिश की गई।
Telegram से अवैध और भ्रामक सामग्री हटाने को कहा गया।
मैसेज एडिट करने की सुविधा पर भी अस्थायी रोक लगाई गई।

NTA का कहना है कि यह कदम छात्रों के हित में है ताकि परीक्षा निष्पक्ष तरीके से हो सके।

क्या सच में NEET पेपर लीक हुआ था?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में पेपर लीक हुआ था?
अब तक सामने आई जानकारी के अनुसार NTA ने किसी वास्तविक प्रश्नपत्र लीक की पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों ने कई Telegram चैनलों पर चल रहे दावों को फर्जी और धोखाधड़ी से जुड़ा बताया है। कई लोग सिर्फ डर पैदा करके छात्रों से पैसे लेने की कोशिश कर रहे थे।

यानी छात्रों को सावधान रहने की जरूरत है कि “100% पेपर मिलेगा” या “अंदर की जानकारी है” जैसे दावों से बचें।


Telegram का पक्ष क्या है?
Telegram की तरफ से कहा गया कि वह गैरकानूनी सामग्री हटाने के लिए कार्रवाई करता रहा है। कंपनी का तर्क है कि पूरे प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने से आम यूजर्स भी प्रभावित होते हैं, जबकि समस्या कुछ गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों की है।

Telegram से जुड़े लोगों ने यह भी कहा कि उसने कई संदिग्ध लिंक और चैनल हटाए थे। कंपनी का मानना है कि गलत गतिविधियों के लिए पूरे ऐप को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

लोगों की क्या राय है?
इस फैसले पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई है।


सरकार के समर्थन में राय
कई छात्रों और अभिभावकों का मानना है कि अगर कोई प्लेटफॉर्म परीक्षा से जुड़ी अफवाहों और ठगी का माध्यम बन रहा है तो परीक्षा के समय सख्त कदम जरूरी हैं।
उनका कहना है कि NEET जैसी परीक्षा में एक छोटी सी अफवाह भी लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है।


विरोध करने वालों की राय
कुछ लोगों का कहना है कि केवल Telegram को रोकना समस्या का पूरा समाधान नहीं है। उनका तर्क है कि अगर कोई गिरोह पेपर लीक कर रहा है तो असली जांच उन लोगों तक पहुंचने की होनी चाहिए जो पेपर तक पहुंच रखते हैं।
कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि Telegram का उपयोग पढ़ाई, नोट्स और स्टडी ग्रुप के लिए भी किया जाता है, इसलिए सभी लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

छात्रों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
NEET अभ्यर्थियों के लिए जरूरी बातें:
किसी भी पेपर या आंसर-की के दावे पर तुरंत विश्वास न करें।
केवल NTA की आधिकारिक वेबसाइट और सूचना माध्यमों से अपडेट लें।
पैसे लेकर पेपर देने वालों से दूर रहें।
फर्जी खबरों को आगे शेयर न करें।


निष्कर्ष
NEET री-एग्जाम से पहले Telegram पर सरकार की कार्रवाई परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित रखने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। जहां सरकार इसे छात्रों के हित में जरूरी कदम बता रही है, वहीं कुछ लोग इसे बड़ा और कठोर फैसला मान रहे हैं।
असल चुनौती सिर्फ किसी एक ऐप को रोकना नहीं, बल्कि परीक्षा प्रणाली को इतना मजबूत बनाना है कि पेपर लीक और फर्जी दावों की गुंजाइश ही कम हो जाए। छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि अफवाहों से बचें और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

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