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G7 में ट्रंप–मेलोनी विवाद: आखिर क्यों बिगड़े अमेरिका और इटली के रिश्ते? पूरी कहानी

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नई दिल्ली, 20 जून 2026

G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni के बीच शुरू हुआ विवाद अब अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। कभी करीबी माने जाने वाले दोनों नेताओं के रिश्तों में अचानक तनाव देखने को मिला। विवाद की शुरुआत एक फोटो और उस पर की गई टिप्पणी से हुई, लेकिन इसके पीछे कई महीनों से चल रही राजनीतिक दूरियां भी बताई जा रही हैं।

क्या हुआ G7 में?
फ्रांस के एवियां (Évian) में हुए G7 सम्मेलन के दौरान ट्रंप और मेलोनी की मुलाकात हुई थी। दोनों नेताओं ने सार्वजनिक रूप से अपने पुराने रिश्तों को मजबूत दिखाने की कोशिश की थी। यहां तक कि बातचीत के दौरान दोनों ने कहा था कि वे हमेशा दोस्त रहे हैं।

लेकिन सम्मेलन के बाद एक इंटरव्यू में ट्रंप ने दावा किया कि मेलोनी ने उनके साथ फोटो लेने के लिए उनसे आग्रह किया था। ट्रंप के बयान के अनुसार उन्होंने फोटो इसलिए ली क्योंकि उन्हें मेलोनी पर “तरस आया”। यह बयान इटली में काफी विवादित हो गया।

मेलोनी ने क्या जवाब दिया?
मेलोनी ने ट्रंप के दावे को पूरी तरह गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह बात बनाई गई है और वह तथा इटली कभी किसी से इस तरह अनुरोध नहीं करते। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अमेरिका अपने पुराने सहयोगियों के साथ सख्ती क्यों दिखा रहा है, जबकि पश्चिम के विरोधियों के प्रति ज्यादा नरम रवैया अपनाता है।

मेलोनी की प्रतिक्रिया को इटली में काफी समर्थन मिला। कई नेताओं ने कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री का नहीं बल्कि पूरे देश के सम्मान का मामला है।

इटली के विदेश मंत्री ने उठाया कदम
विवाद बढ़ने के बाद इटली के विदेश मंत्री Antonio Tajani ने अमेरिका की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी। उन्होंने ट्रंप की टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए कहा कि यह केवल मेलोनी नहीं बल्कि इटली का अपमान है।

क्या यह सिर्फ फोटो विवाद है?
जानकारों के अनुसार यह विवाद केवल एक फोटो तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ समय से ट्रंप और मेलोनी के बीच कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मतभेद सामने आए हैं।

1. ईरान संकट
अमेरिका की ईरान नीति को लेकर इटली और कुछ यूरोपीय देशों में चिंता रही है। मेलोनी ने युद्ध और तनाव बढ़ाने वाले कदमों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही थी, जबकि ट्रंप का रुख ज्यादा आक्रामक रहा।

2. पोप को लेकर विवाद
ट्रंप द्वारा पोप की विदेश नीति पर टिप्पणी किए जाने के बाद भी मेलोनी ने नाराजगी जताई थी। उन्होंने इसे स्वीकार न करने योग्य बताया था।

3. यूरोप और अमेरिका की प्राथमिकताएं
मेलोनी पहले ट्रंप की यूरोप में सबसे करीबी नेताओं में गिनी जाती थीं। लेकिन अब उनके सामने चुनौती है कि वह अमेरिका के साथ संबंध भी बनाए रखें और यूरोप के हितों की रक्षा भी करें।

क्या मेलोनी ने ट्रंप के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला?
पूरी तरह से ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। मेलोनी अभी भी अमेरिका के साथ संबंधों को महत्वपूर्ण मानती हैं। लेकिन इस बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से ट्रंप की आलोचना की, जो उनके पहले के संतुलित रवैये से अलग दिखाई दिया।

राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि मेलोनी अब केवल ट्रंप के साथ व्यक्तिगत संबंधों पर निर्भर नहीं रहना चाहतीं, बल्कि इटली की स्वतंत्र विदेश नीति की छवि भी बनाना चाहती हैं।

ट्रंप के लिए इसका क्या मतलब है?
ट्रंप के लिए यह विवाद यूरोप में उनकी छवि से जुड़ा है। अमेरिका के कई पुराने सहयोगी पहले ही व्यापार, सुरक्षा और विदेश नीति को लेकर उनसे असहमत रहे हैं। मेलोनी जैसी करीबी नेता का खुला विरोध इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अमेरिका–यूरोप संबंधों में तनाव बढ़ रहा है।

आगे क्या होगा?
अभी यह कहना मुश्किल है कि यह विवाद लंबे समय तक चलेगा या दोनों पक्ष इसे खत्म कर देंगे। G7 जैसे मंचों पर देशों के रिश्ते अक्सर सार्वजनिक बयानबाजी के बाद पर्दे के पीछे बातचीत से सुधारे जाते हैं।

लेकिन एक बात साफ है कि ट्रंप और मेलोनी की पुरानी दोस्ती अब पहले जैसी आसान नहीं रही। यह घटना दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में व्यक्तिगत रिश्तों से ज्यादा महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित और विदेश नीति होती है।

निष्कर्ष:
G7 का यह विवाद एक फोटो से शुरू हुआ, लेकिन इसके पीछे अमेरिका और यूरोप के बदलते रिश्ते, युद्ध नीति, सहयोगियों के साथ व्यवहार और वैश्विक राजनीति की बड़ी तस्वीर छिपी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेलोनी और ट्रंप फिर से पुराने रिश्ते मजबूत करते हैं या दोनों देशों के बीच दूरी बढ़ती है।

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