Skip to main content

सावधान नेशन न्यूज़

चार साल बाद टीम इंडिया में भुवनेश्वर कुमार की धमाकेदार वापसी, स्विंग के दम पर फिर जगाई उम्मीदें

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026

36 वर्षीय तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार को न्यूजीलैंड के खिलाफ आगामी पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। उनकी वापसी के पीछे आईपीएल में शानदार प्रदर्शन, गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता और फिटनेस पर की गई मेहनत अहम मानी जा रही है।

चार साल के लंबे इंतजार के बाद मिली टीम इंडिया में जगह
भारतीय क्रिकेट में कुछ खिलाड़ियों की पहचान उनकी रफ्तार से बनती है, तो कुछ अपनी तकनीक और गेंद पर नियंत्रण से बल्लेबाजों को परेशान करते हैं। भुवनेश्वर कुमार ऐसे ही गेंदबाज हैं, जिनकी सबसे बड़ी ताकत गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता रही है। अब करीब चार साल बाद भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में उनकी वापसी ने क्रिकेट प्रशंसकों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है।
भारतीय चयनकर्ताओं ने 6 अक्टूबर 2026 को न्यूजीलैंड दौरे पर होने वाली पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए भुवनेश्वर को टीम में शामिल किया। 36 वर्षीय गेंदबाज के लिए यह चयन खास है, क्योंकि नवंबर 2022 के बाद उन्हें दोबारा भारत की टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम में जगह मिली है।
यह केवल एक अनुभवी खिलाड़ी की वापसी नहीं, बल्कि उस गेंदबाज पर दोबारा भरोसा जताने का फैसला है, जिसने लगातार मेहनत करके अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाया।


आईपीएल 2026 में प्रदर्शन बना वापसी की बड़ी वजह
भुवनेश्वर कुमार की वापसी के पीछे इंडियन प्रीमियर लीग में उनका प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की ओर से खेलते हुए उन्होंने नई गेंद से विकेट निकालने और दबाव के समय किफायती गेंदबाजी करने की अपनी क्षमता दिखाई।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आईपीएल 2025 और 2026 को मिलाकर भुवनेश्वर ने 45 विकेट लिए। इस दौरान उन्होंने पावरप्ले के साथ-साथ पारी के अंतिम ओवरों में भी प्रभावी गेंदबाजी की। उनके प्रदर्शन ने चयनकर्ताओं के सामने यह साबित किया कि अनुभव के साथ उनकी गेंदबाजी की उपयोगिता भी बनी हुई है।
टी20 क्रिकेट में केवल तेज गेंद फेंकना ही पर्याप्त नहीं होता। बल्लेबाजों की कमजोरियों को समझना, सही लाइन और लेंथ पर गेंद डालना तथा रन बनाने के अवसर सीमित करना भी उतना ही जरूरी है। भुवनेश्वर की खासियत यही है कि वह इन पहलुओं पर अच्छी पकड़ रखते हैं।

चोटों और टीम से बाहर रहने के बाद बदली रणनीति

भुवनेश्वर कुमार के करियर में चोटों ने कई बार बाधाएं पैदा कीं। पीठ और शरीर के निचले हिस्से से जुड़ी फिटनेस संबंधी परेशानियों के कारण उनके लिए लंबे समय तक लगातार क्रिकेट खेलना चुनौतीपूर्ण रहा। नवंबर 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलने के बाद वह भारतीय टी20 अंतरराष्ट्रीय टीम से बाहर हो गए थे।

लेकिन राष्ट्रीय टीम से बाहर रहने का अर्थ यह नहीं था कि उन्होंने क्रिकेट को लेकर अपनी मेहनत छोड़ दी। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने अपने फिजियोथेरेपिस्ट रामनीश वोहरा और ट्रेनर सूर्या यादव के साथ फिटनेस, शरीर की मजबूती और गेंद को स्विंग कराने की तकनीक पर काम किया।
उनका ध्यान केवल गेंद की गति बढ़ाने पर नहीं, बल्कि अपनी पुरानी ताकत को वापस पाने पर भी रहा। सही गेंदबाजी एक्शन, संतुलन और शरीर की मजबूती ने उनके खेल को बेहतर बनाने में मदद की।

यही मेहनत अब उनके अंतरराष्ट्रीय करियर को एक नया अवसर देती दिखाई दे रही है।

स्विंग के बादशाह की सबसे बड़ी ताकत क्या है?
भुवनेश्वर कुमार की गेंदबाजी का सबसे प्रभावी पहलू नई गेंद से बल्लेबाजों को चुनौती देना है। जब गेंद में स्विंग होती है, तो बल्लेबाज के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि गेंद अंदर आएगी या बाहर जाएगी। ऐसी स्थिति में हल्की-सी गलती भी विकेट गंवाने का कारण बन सकती है।
उनकी प्रमुख खूबियां हैं:
नई गेंद से स्विंग: शुरुआती ओवरों में विकेट लेने की क्षमता।
लाइन और लेंथ पर नियंत्रण: बल्लेबाजों को आसानी से रन बनाने का मौका नहीं देना।
अनुभव: दबाव वाले क्षणों में सही गेंद चुनने की समझ।
डेथ ओवरों में उपयोगिता: पारी के आखिरी चरण में रन रोकने और विकेट निकालने की क्षमता।
युवा खिलाड़ियों के लिए मार्गदर्शन: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव साझा करने का अवसर।
टी20 प्रारूप में इन खूबियों का महत्व काफी अधिक है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि वह अपनी लय और फिटनेस को मैचों के दौरान कितना बरकरार रख पाते हैं।

न्यूजीलैंड दौरे पर क्या होगी असली चुनौती?
न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज भुवनेश्वर कुमार के लिए खुद को दोबारा साबित करने का अवसर होगी। चयन में जगह मिलना पहला कदम है, जबकि अंतिम एकादश में मौका मिलने पर अच्छा प्रदर्शन करना अगली चुनौती होगी।
न्यूजीलैंड की परिस्थितियों में गेंद की गति, उछाल और स्विंग का मुकाबले पर असर पड़ सकता है। ऐसे में भुवनेश्वर का अनुभव भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के काम आ सकता है। हालांकि, किसी भी मैच में उनका प्रदर्शन पिच, मौसम, विरोधी बल्लेबाजों और टीम की रणनीति पर भी निर्भर करेगा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि टीम में चयन का अर्थ आगामी सभी बड़े टूर्नामेंटों में जगह पक्की होना नहीं है। इसके लिए उन्हें लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा और अपनी फिटनेस बनाए रखनी होगी।

क्या 2027 वनडे विश्व कप तक जारी रह सकता है सफर?
भुवनेश्वर कुमार की टी20 टीम में वापसी के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या वह भविष्य में वनडे क्रिकेट में वापसी कर सकते हैं। उनके अनुभव और स्विंग गेंदबाजी को देखते हुए इस संभावना पर चर्चा हो सकती है, लेकिन अभी इसे पक्का फैसला नहीं माना जा सकता।
टी20 और वनडे क्रिकेट की जरूरतें अलग-अलग हैं। वनडे प्रारूप में लंबे स्पेल डालने, अलग-अलग चरणों में गेंदबाजी करने और लगातार फिट रहने की जरूरत होती है। इसलिए वनडे टीम या 2027 विश्व कप में उनकी संभावित भागीदारी के बारे में कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वापसी का मौका मिला है। आने वाले मैच यह तय करने में मदद करेंगे कि वह इस अवसर को किस तरह भुनाते हैं।


निष्कर्ष: मेहनत ने फिर खोला टीम इंडिया का दरवाजा
भुवनेश्वर कुमार की वापसी उन खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा है, जो कठिन दौर में भी अपने खेल को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहते हैं। करीब चार साल तक भारतीय टी20 टीम से बाहर रहने के बाद उनका फिर चुना जाना बताता है कि घरेलू और लीग क्रिकेट में लगातार अच्छा प्रदर्शन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवसर दिला सकता है।
हालांकि, असली सफलता मैदान पर प्रदर्शन से ही तय होगी। अब प्रशंसकों की निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भुवनेश्वर अपनी स्विंग, अनुभव और नियंत्रण से न्यूजीलैंड के खिलाफ भारतीय टीम को कितनी मजबूती दे पाते हैं।

सावधान नेशन न्यूज़…