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सावधान नेशन न्यूज़

खड़गे ने PM मोदी से फिर की सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग, जानिए क्या है पूरा विवाद और इसकी वजह

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नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर परिसीमन के प्रस्तावों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। 16 अक्टूबर 2026 को लिखे गए इस पत्र में खड़गे ने संसद के मानसून सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि देश की चुनावी व्यवस्था और संसद की सीटों से जुड़े इतने बड़े फैसले पर सभी राजनीतिक दलों से चर्चा होनी चाहिए।
इस पूरे मामले की अहम वजह परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद हैं। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि विवाद क्या है, खड़गे क्यों बैठक चाहते हैं और इसका देश की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है।

खड़गे ने सर्वदलीय बैठक की मांग क्यों की?

खड़गे का कहना है कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कोई नया प्रस्ताव संसद में लाने से पहले सभी राजनीतिक दलों को उसे समझने और उस पर अपनी राय रखने का पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
उनके मुताबिक, व्यापक संवैधानिक बदलाव को बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के आगे बढ़ाना उचित नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस संबंध में पहले भी पत्र लिखकर आग्रह किया था। 16 अक्टूबर का पत्र इस मांग को लेकर उनका चौथा पत्र बताया गया है।
खड़गे की मुख्य आपत्तियां हैं:
सभी दलों से चर्चा किए बिना परिसीमन के प्रस्तावों को अंतिम रूप न दिया जाए।
राजनीतिक दलों और राज्य सरकारों को प्रस्तावों का अध्ययन करने के लिए पर्याप्त समय मिले।
संसद में महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक पर व्यापक सहमति बनाने का प्रयास किया जाए।
संसद की कार्यवाही और संवैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर पारदर्शिता रखी जाए।
ये खड़गे और कांग्रेस की ओर से उठाए गए मुद्दे हैं। इन्हें सरकार की मंशा के बारे में सिद्ध तथ्य नहीं समझना चाहिए।

परिसीमन क्या है और इस पर इतना विवाद क्यों है?
परिसीमन का मतलब है लोकसभा या विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व से जुड़ी व्यवस्था का पुनर्निर्धारण। इसके जरिए यह तय किया जाता है कि कौन-सा इलाका किस निर्वाचन क्षेत्र में आएगा और संबंधित सीटों का प्रतिनिधित्व कैसे निर्धारित होगा।
यह मुद्दा महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि इससे राज्यों और क्षेत्रों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। इसी कारण कांग्रेस सहित विपक्षी दल चाहते हैं कि किसी भी नए प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा हो।

संसद के मानसून सत्र को लेकर खड़गे ने क्या कहा?
खड़गे ने पत्र में बताया कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किया गया था। उनके पत्र के अनुसार, 16 अक्टूबर तक 64 दिन बीत जाने के बावजूद लोकसभा और राज्यसभा का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ था।
खड़गे ने इस स्थिति को असामान्य बताते हुए आशंका जताई कि सरकार परिसीमन से जुड़े विधेयक को फिर संसद में लाने की तैयारी कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से किसी नए विशेष सत्र की घोषणा होने की पुष्टि इन खबरों में नहीं है।

अप्रैल में क्या हुआ था?
खड़गे ने अपने पत्र में अप्रैल 2026 की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
11 अप्रैल: खड़गे ने परिसीमन विधेयक लाने से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था।
14 अप्रैल: उनके अनुसार, संबंधित विधेयकों को सार्वजनिक किया गया।
16 अप्रैल: इस विषय पर संसद का विशेष सत्र बुलाया गया।
17 अप्रैल: परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका।
खड़गे ने इसी घटनाक्रम का हवाला देकर कहा है कि इस बार सरकार को सभी दलों से पहले ही चर्चा करनी चाहिए।

कांग्रेस की क्या मांग है?
कांग्रेस ने परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर अपना रुख भी स्पष्ट किया है। अगस्त में खड़गे ने कहा था कि लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या और राज्यों के बीच सीटों का मौजूदा बंटवारा अगले 25 वर्षों तक बनाए रखा जाए तथा महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू किया जाए।
ये कांग्रेस की मांगें हैं, सरकार द्वारा स्वीकार किए गए निर्णय नहीं।

क्या प्रधानमंत्री मोदी ने खड़गे की मांग मान ली है?
16 और 17 अक्टूबर की उपलब्ध समाचार रिपोर्टों में खड़गे की ओर से बैठक की मांग किए जाने की जानकारी है, लेकिन बैठक बुलाए जाने या प्रधानमंत्री की ओर से इस मांग को स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि सर्वदलीय बैठक तय हो गई है।

निष्कर्ष
खड़गे की सर्वदलीय बैठक की मांग के पीछे मुख्य वजह परिसीमन को लेकर राजनीतिक और संवैधानिक मतभेद हैं। कांग्रेस चाहती है कि लोकसभा सीटों और चुनावी प्रतिनिधित्व में किसी बड़े बदलाव से पहले सभी दलों और राज्य सरकारों को अपनी बात रखने का मौका मिले। वहीं, इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह केंद्र सरकार के अगले फैसलों पर निर्भर करेगा।

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