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सावधान नेशन न्यूज़

पंजाब में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या: CBI ने संभाली जांच, परिवार के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू

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नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026

पंजाब के मानसा जिले में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले 42 वर्षीय परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने राज्य में नशे के अवैध कारोबार और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार की मांग पर पंजाब सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी है। 22 अक्टूबर की ताजा रिपोर्टों के अनुसार, CBI ने नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

क्या है पूरा मामला?
परविंदर सिंह झोटा नशे की अवैध बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। 13 अक्टूबर 2026 को मानसा के एक मेडिकल स्टोर में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। रिपोर्टों के अनुसार, घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे और कथित तौर पर एक बुजुर्ग व्यक्ति को नशीले पदार्थ बेचे जाने के मुद्दे पर स्टोर संचालक से सवाल कर रहे थे।
आरोप है कि इसी विवाद के दौरान स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने गोली चलाई। इस घटना में झोटा की मौत हो गई और चार अन्य लोग घायल हुए। पुलिस ने कथित तौर पर इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी बरामद की है। मामले में आरोपियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और अदालत की प्रक्रिया से होगा।

CBI की जांच में अब तक क्या हुआ?
22 अक्टूबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, जांच में ये प्रमुख कदम उठाए गए हैं:
नई FIR दर्ज: CBI ने मामले को अपने हाथ में लेकर नई FIR दर्ज की है।
परिवार के बयान: जांच टीम ने मानसा में झोटा के घर पहुंचकर परिवार के सदस्यों के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।
पुलिस रिकॉर्ड कब्जे में: CBI ने मानसा सिटी-2 पुलिस थाने से केस की फाइलें, रिकॉर्ड और जब्त सामग्री अपने कब्जे में ली।
घटनास्थल की जांच: टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने मौके से नमूने एकत्र किए और वहां लगे डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर को भी कथित तौर पर जब्त किया।
कानूनी धाराएं: FIR में हत्या, हत्या के प्रयास, आपराधिक साजिश, चोट पहुंचाने और शस्त्र अधिनियम से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं।

कितने आरोपी गिरफ्तार हुए?
द ट्रिब्यून की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है:
अश्वनी कुमार — मेडिकल स्टोर संचालक।
नीलम रानी — अश्वनी कुमार की पत्नी।
परवीन गर्ग — अश्वनी कुमार का रिश्तेदार।
लड्डी — मेडिकल स्टोर का एक कर्मचारी।
रिपोर्ट के अनुसार, चारों पुलिस रिमांड पर थे। हालांकि, किसी की गिरफ्तारी अपने आप में अपराध साबित नहीं करती। जांच एजेंसी को प्रत्येक आरोपी की भूमिका के संबंध में साक्ष्य जुटाने होंगे।

पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार पर क्या अपडेट है?
परिवार की प्रमुख मांगों में निष्पक्ष जांच और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराना शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित PGIMER में विशेषज्ञों की टीम से कराने की योजना बनाई गई थी। 22 अक्टूबर की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि रिपोर्ट लिखे जाने तक शव अस्पताल नहीं पहुंचा था और परिवार अंतिम संस्कार के लिए सहमत नहीं हुआ था।

अमित शाह और भगवंत मान ने क्या कदम उठाए?
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 20 अक्टूबर को परिवार की मांग स्वीकार करते हुए हत्या की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मानसा में झोटा के परिवार से मुलाकात की।
परिवार की मांग थी कि हत्या की निष्पक्ष जांच हो और नशे के अवैध कारोबार से जुड़े संभावित नेटवर्क की भी पड़ताल की जाए। परिवार ने कथित तौर पर नशा तस्करों, पुलिस अधिकारियों और राजनीतिक प्रतिनिधियों के बीच संभावित गठजोड़ की जांच की मांग भी उठाई है। यह आरोप और जांच की मांग है; किसी गठजोड़ का स्थापित तथ्य होना अभी साबित नहीं हुआ है।

क्या CBI ने हत्या की साजिश का खुलासा कर दिया है?
फिलहाल उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में हत्या की पूरी साजिश का खुलासा होने, किसी बड़े नेटवर्क की पुष्टि होने या सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित होने की जानकारी नहीं है। CBI ने जांच शुरू की है और साक्ष्य जुटा रही है।
जांच के अहम सवाल हैं: गोली चलाने की पूरी परिस्थिति क्या थी, घटना में प्रत्येक आरोपी की क्या भूमिका थी और क्या इसके पीछे कोई व्यापक साजिश थी? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

खबर का निष्कर्ष
परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला अब पंजाब पुलिस से आगे बढ़कर CBI की जांच के अधीन है। 22 अक्टूबर 2026 तक सबसे महत्वपूर्ण अपडेट नई FIR, परिवार के बयान, पुलिस रिकॉर्ड का हस्तांतरण और घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच है। परिवार को न्याय दिलाने के साथ-साथ यह पता लगाना भी जरूरी है कि हत्या किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें अन्य लोगों की कोई भूमिका थी।

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