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सावधान नेशन न्यूज़

ओडिशा पर चक्रवाती तूफान का खतरा, पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल-कॉलेज बंद; प्रशासन अलर्ट पर

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नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026

बंगाल की खाड़ी में बन रहा मौसमी सिस्टम अब ओडिशा और आंध्र प्रदेश के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र 24 अक्टूबर को डिप्रेशन यानी अवदाब में बदल गया था। इसके आगे गहरे अवदाब और फिर चक्रवाती तूफान में बदलने की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 26 अक्टूबर तक यह चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है और 28 अक्टूबर की सुबह के आसपास आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंच सकता है।
इस खतरे को देखते हुए ओडिशा सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य के पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है। राहत और बचाव दलों को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, तूफान के बनने, उसकी ताकत और उसके जमीन से टकराने की सही जगह को लेकर मौसम विभाग के पूर्वानुमान में बदलाव संभव है। इसलिए अभी से यह कहना सही नहीं होगा कि ओडिशा के किसी खास इलाके में भारी तबाही निश्चित है।

यह खबर कब आई और तूफान की शुरुआत कैसे हुई?
इस तूफान से जुड़ी खबरें 24 अक्टूबर 2026 से सामने आने लगीं। 24 अक्टूबर को ओडिशा सरकार ने संभावित चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद 25 अक्टूबर को भी तूफान के रास्ते, बारिश और बचाव व्यवस्था को लेकर खबरें प्रकाशित हुईं।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के 24 अक्टूबर की रात जारी तटीय मौसम बुलेटिन के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के पूर्व-मध्य और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना कम दबाव का क्षेत्र अवदाब में बदल चुका था। मौसम विभाग ने इसके और शक्तिशाली होने का अनुमान जताया।

मौसम की इस प्रक्रिया को आसान भाषा में समझें:
कम दबाव का क्षेत्र: समुद्र के ऊपर ऐसा क्षेत्र, जहां हवा का दबाव आसपास के मुकाबले कम हो जाता है।
अवदाब (Depression): जब यह मौसमी सिस्टम अधिक संगठित और मजबूत होता है, तो इसे अवदाब कहा जाता है।
गहरा अवदाब: इसके और मजबूत होने की अगली अवस्था।
चक्रवाती तूफान: जब सिस्टम निर्धारित हवा की गति तक पहुंचता है, तो उसे चक्रवाती तूफान का दर्जा दिया जाता है।
इसलिए कम दबाव का क्षेत्र बनना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि वह विनाशकारी तूफान बनेगा। उसकी दिशा, समुद्र का तापमान और हवा की परिस्थितियां उसकी ताकत तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

किन पांच जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रहेंगे?

  1. गंजाम (Ganjam)
    ओडिशा का तटीय जिला। भारी बारिश और तेज हवाओं के दौरान निचले इलाकों में जलभराव का खतरा हो सकता है।
  2. गजपति (Gajapati)
    पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में तेज बारिश से सड़क संपर्क बाधित होने और भूस्खलन जैसी समस्याओं का जोखिम हो सकता है।
  3. रायगड़ा (Rayagada)
    भारी बारिश की स्थिति में निचले इलाकों, नदी-नालों और ग्रामीण सड़कों पर विशेष सतर्कता जरूरी है।
  4. कोरापुट (Koraput)
    पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर भूस्खलन और आवागमन में परेशानी की आशंका रहती है।
  5. मलकानगिरी (Malkangiri)
    तेज बारिश से निचले इलाकों में पानी भरने और कुछ स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित होने का खतरा हो सकता है।

ओडिशा सरकार की 24 अक्टूबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन पांच जिलों में 28 और 29 अक्टूबर को स्कूल, कॉलेज और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। दूसरे जिलों में शिक्षण संस्थानों को बंद करने का फैसला संबंधित जिला कलेक्टर स्थानीय मौसम की स्थिति देखकर करेंगे।
ध्यान दें कि छुट्टी का यह आदेश 28 और 29 अक्टूबर के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी जिलों में अभी से स्कूल बंद कर दिए गए हैं।

तूफान कब और कहां टकरा सकता है?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, यह सिस्टम 25 अक्टूबर को और मजबूत होकर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ सकता है। इसके 26 अक्टूबर की सुबह तक चक्रवाती तूफान बनने और आगे चलकर अधिक शक्तिशाली होने की संभावना जताई गई है।
25 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्टों में तूफान के 28 अक्टूबर की सुबह के आसपास आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने का अनुमान दिया गया। एक पूर्वानुमान में आंध्र प्रदेश के बापटला और विशाखापत्तनम के बीच तट पार करने की संभावना बताई गई है। ओडिशा के तटीय और दक्षिणी जिलों में भी इसके प्रभाव से तेज बारिश और हवाएं चल सकती हैं।

यहां एक जरूरी अंतर समझना चाहिए: तूफान का आंध्र प्रदेश के तट पर पहुंचने का अनुमान होने का अर्थ यह नहीं है कि ओडिशा सुरक्षित रहेगा। तूफान के बाहरी हिस्सों से भी बारिश, तेज हवाएं और समुद्र में ऊंची लहरें पैदा हो सकती हैं।

कितनी तेज हवाएं चल सकती हैं और बारिश कितनी होगी?
ओडिशा सरकार की तैयारियों से जुड़ी रिपोर्टों में दक्षिणी जिलों में लगभग 80–90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने की आशंका बताई गई है। मौसम विभाग के कुछ पूर्वानुमानों में आंध्र प्रदेश के संभावित तटवर्ती क्षेत्र के लिए इससे अधिक तेज हवाओं की संभावना भी जताई गई है।
बारिश और तेज हवाओं के कारण इन समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
निचले इलाकों में जलभराव और स्थानीय बाढ़।
पेड़ या बिजली के खंभे गिरने से सड़क और बिजली आपूर्ति बाधित होना।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा।
खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान।
समुद्र में मछुआरों और छोटी नावों के लिए खतरा।
हालांकि, किसी जिले में कितनी बारिश होगी और कितने समय तक होगी, इसका सही आकलन ताजा जिला-वार मौसम चेतावनी से ही किया जाना चाहिए।

ओडिशा सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने 24 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बैठक में चक्रवात से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। राज्य सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए कुल 302 दल तैयार रखे हैं।
इनमें शामिल हैं:
60 ओडिशा डिजास्टर रैपिड एक्शन फोर्स (ODRAF) दल।
17 राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) दल।
225 अग्निशमन सेवा दल।
सरकार ने अधिकारियों को संवेदनशील और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, राहत शिविर तैयार रखने और जरूरत पड़ने पर गर्भवती महिलाओं तथा गंभीर मरीजों को स्वास्थ्य केंद्रों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक दवाएं और चिकित्सा सामग्री उपलब्ध रखने के लिए भी कहा गया है।
इसके अलावा, बिजली, पेयजल और सड़क सेवाओं को जल्द बहाल करने की तैयारी करने तथा जलाशयों और नदियों के जलस्तर पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

आम लोगों और किसानों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
तूफान के संभावित प्रभाव को देखते हुए प्रशासन की सलाह का पालन करना जरूरी है।
मौसम विभाग और जिला प्रशासन की ताजा चेतावनी पर नजर रखें।
समुद्र में मछली पकड़ने जाने से बचें और समुद्र में मौजूद मछुआरे सुरक्षित तट पर लौटने संबंधी निर्देशों का पालन करें।
बिजली के खंभों, पेड़ों और कमजोर इमारतों से दूरी रखें।
घर में पीने का पानी, जरूरी दवाएं, टॉर्च और मोबाइल चार्ज रखने की व्यवस्था करें।
निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन के निर्देश पर सुरक्षित शिविरों में जाएं।
किसान स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार फसलों और कृषि उपकरणों को सुरक्षित रखने की तैयारी करें।

क्या राष्ट्रपति का ओडिशा दौरा भी टला है?
जी हां। प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का 28 और 29 अक्टूबर का प्रस्तावित ओडिशा दौरा भी चक्रवात की आशंका के कारण आगे बढ़ा दिया गया है। अब दौरा 4 और 5 नवंबर के लिए निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई है।

निष्कर्ष: क्या ओडिशा में बड़ी तबाही होने वाली है?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बंगाल की खाड़ी में बना मौसमी सिस्टम मजबूत हो रहा है और ओडिशा के दक्षिणी जिलों में भारी बारिश का खतरा है। सरकार ने स्कूल-कॉलेज बंद रखने, राहत दल तैयार रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं।
लेकिन तबाही कितनी होगी, इसका दावा अभी नहीं किया जा सकता। तूफान की दिशा, उसकी वास्तविक ताकत और तट से टकराने के स्थान की पुष्टि ताजा मौसम बुलेटिन से ही होगी। लोगों को अफवाहों से बचना चाहिए और आधिकारिक चेतावनियों पर भरोसा करना चाहिए।

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