सावधान नेशन न्यूज़
अभिषेक यादव (प्रबंध निदेशक)
बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।
यहाँ इस खबर का विस्तृत विवरण है:
बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री विजय कुमार चौधरी और अशोक चौधरी ने सदन में और मीडिया के सामने साफ कर दिया कि बिहार में शराबबंदी कानून को वापस लेने या इसकी समीक्षा करने का फिलहाल कोई विचार नहीं है।
संसदीय कार्य मंत्री का जवाब: विजय कुमार चौधरी ने कहा कि शराबबंदी का फैसला सभी दलों की सर्वसम्मति से लिया गया था और यह राज्य में लागू रहेगी। उन्होंने तर्क दिया कि जब यह कानून बना था, तब सरकार को राजस्व घाटे का अंदाजा था, लेकिन सामाजिक सुधार के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।

अशोक चौधरी का बयान: उन्होंने इसे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक “ऐतिहासिक कदम” बताते हुए कहा कि इससे बिहार में बड़ा सामाजिक बदलाव आया है।
विपक्ष और सहयोगियों का दबाव
सरकार के इस कड़े रुख के बावजूद, सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से सवाल उठ रहे हैं:
NDA सहयोगियों की मांग: केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी (HAM) और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के विधायक आनंद माधव ने राजस्व के नुकसान और अवैध शराब की होम डिलीवरी का हवाला देते हुए इस कानून की समीक्षा की मांग की थी।
विपक्ष का हमला: आरजेडी (RJD) विधायक रणविजय साहू ने दावा किया कि बिहार में 30 हजार करोड़ का अवैध शराब कारोबार चल रहा है और पुलिस-प्रशासन इसे रोकने में विफल है।
कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर विधानसभा के अंदर विधायकों का ब्लड टेस्ट कराया जाए, तो शराबबंदी की असलियत सामने आ जाएगी।
प्रमुख बिंदु (Summary)
राजस्व का तर्क: समीक्षा की मांग करने वालों का कहना है कि बिहार को सालाना लगभग 3,000 से 40,000 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हो रहा है।
जहरीली शराब: हाल ही में सीवान, सारण और रोहतास में जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद कानून की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
नियम: वर्तमान में पहली बार शराब पीने पर पकड़े जाने पर 2,000 से 5,000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।