सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
नई दिल्ली। मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को हिला कर रख दिया। ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव की खबरों से निवेशकों में घबराहट फैल गई, जिसका सीधा असर दलाल स्ट्रीट पर देखने को मिला।
सुबह कारोबार की शुरुआत होते ही BSE Sensex 2743 अंक यानी करीब 3.38% टूटकर 78,543 पर खुला। वहीं Nifty 50 में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोपहर 12:25 बजे तक कुछ रिकवरी देखने को मिली, लेकिन तब भी सेंसेक्स करीब 1500 अंक नीचे 79,790 के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि निफ्टी लगभग 450 अंक गिरकर 24,727 पर बना रहा।
9 लाख करोड़ रुपये का मार्केट कैप साफ
तेज गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका लगा। शुरुआती घंटों में ही बाजार पूंजीकरण में करीब 9 लाख करोड़ रुपये की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जंग की आशंका, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं।
कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंता
ईरान पर हमले की खबरों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चिंताजनक है। तेल महंगा होने से महंगाई बढ़ने, चालू खाते का घाटा बढ़ने और कॉरपोरेट मुनाफे पर दबाव पड़ने की आशंका रहती है। यही कारण है कि ऑटो, बैंकिंग और एविएशन जैसे सेक्टरों में भारी बिकवाली देखी गई।
30 में से 29 शेयर लाल निशान पर
बीएसई टॉप-30 कंपनियों में से 29 शेयर गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। सिर्फ Bharat Electronics Limited के शेयरों में करीब 1% की तेजी रही। रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में तनाव के माहौल में खरीदारी देखी गई।
वहीं एविएशन सेक्टर की कंपनी InterGlobe Aviation (इंडिगो) के शेयर करीब 5% टूट गए। निर्माण क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Larsen & Toubro में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग, आईटी और एफएमसीजी कंपनियों पर भी दबाव बना रहा।
सेक्टरों में चौतरफा बिकवाली
ऑटो, एफएमसीजी, आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर और फाइनेंशियल सर्विसेज—लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में रहे। केवल मेटल सेक्टर में हल्की मजबूती देखी गई, जिसका कारण वैश्विक कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव को माना जा रहा है।
NIFTY Bank में भी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निजी और सरकारी बैंकों के शेयर दबाव में आ गए। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है तो बैंकिंग सेक्टर पर और दबाव आ सकता है।
162 शेयरों में लगा लोअर सर्किट
बाजार में घबराहट का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बीएसई पर सक्रिय 3,660 शेयरों में से 162 शेयरों में लोअर सर्किट लग गया। वहीं करीब 510 शेयरों में मामूली बढ़त देखी गई, लेकिन गिरावट का दायरा कहीं ज्यादा व्यापक रहा।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भू-राजनीतिक घटनाओं में बाजार में अस्थिरता स्वाभाविक है। लंबी अवधि के निवेशकों को घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में गिरावट के दौरान मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति अपनाई जा सकती है।
हालांकि अल्पकालिक निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमत, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक बाजारों की चाल पर नजर रखना जरूरी होगा।
आगे क्या?
अब बाजार की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिकी हैं। यदि तनाव कम होता है तो बाजार में रिकवरी संभव है, लेकिन संघर्ष बढ़ने की स्थिति में गिरावट और गहरी हो सकती है।
फिलहाल, दलाल स्ट्रीट पर अनिश्चितता का माहौल है। निवेशक सतर्क हैं और वैश्विक संकेतों के आधार पर रणनीति बना रहे हैं। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह गिरावट अस्थायी है या बाजार में लंबी कमजोरी की
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