सावधान नेशन न्यूज़

दिल्ली हाईकोर्ट ने 43.33 करोड़ की साइबर ठगी के आरोपी ‘रोहित’ की जमानत याचिका खारिज की 

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तरुण कश्यप

दिनांक: 16 फरवरी, 2026]
[स्थान: नई दिल्ली]

मुख्य बिंदु:

  • फेक ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए लोगों से करोड़ों की ठगी का मामला।
  • आरोपी के बैंक खाते में 6 महीने के भीतर 43.33 करोड़ रुपये का लेनदेन पाया गया।
  • कोर्ट ने कहा: यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर हमला है। 

पूरी खबर:
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़े साइबर अपराध नेटवर्क से जुड़े आरोपी रोहित गगेरना को नियमित जमानत देने से साफ इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति गिरीश कठपालिया की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कहा कि यह केवल सामान्य धोखाधड़ी का मामला नहीं है, बल्कि एक जटिल ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ जाल है, जो देश की आर्थिक स्थिरता को नुकसान पहुँचाता है। 

क्या है पूरा मामला?
जांच के अनुसार, यह पूरा खेल एक फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग एप्लिकेशन के जरिए खेला गया था। ठगों ने निर्दोष निवेशकों को ऊंचे और सुरक्षित रिटर्न का लालच देकर ऐप में पैसे निवेश कराए, जिन्हें बाद में विभिन्न खातों के माध्यम से गायब कर दिया गया। पुलिस जांच (FIR No. 11/2025, साइबर सेंट्रल थाना) में सामने आया कि रोहित गगेरना की प्रोप्राइटरशिप फर्म के खाते में महज छह महीने के भीतर 43.33 करोड़ रुपये जमा हुए थे। 

बचाव पक्ष और कोर्ट की टिप्पणी:
आरोपी के वकील ने तर्क दिया था कि रोहित के निजी खाते में केवल 12,100 रुपये ही आए थे और वह निर्दोष है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि भले ही निजी खाते में राशि कम हो, लेकिन उसकी फर्म के जरिए करोड़ों का जो ट्रांजेक्शन हुआ है, उसके पीछे कोई वैध व्यावसायिक रिकॉर्ड (जैसे GST या आयकर दस्तावेज) नहीं मिले हैं। 

अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इस तरह के संगठित अपराध “हिमशैल का सिरा” (tip of the iceberg) मात्र हैं और जांच के दौरान आरोपी की रिहाई से सबूतों के साथ छेड़छाड़ का खतरा बढ़ सकता है। वर्तमान में आरोपी भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) (धोखाधड़ी) और 313(5) (संगठित चोरी गिरोह का सदस्य होना) के तहत आरोपों का सामना कर रहा है। 

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