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गैस की किल्लत, ₹900 वाला सिलेंडर ₹1800 में


गैस की किल्लत: ₹900 वाला सिलेंडर ₹1800 में मिल रहा, गांवों में अब 45 दिन बाद ही हो सकेगी बुकिंग

देश के कई ग्रामीण इलाकों में इन दिनों रसोई गैस की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि जो घरेलू गैस सिलेंडर सरकारी दर पर लगभग ₹900 में मिलता है, वही सिलेंडर कुछ जगहों पर ब्लैक में ₹1500 से ₹1800 तक में बेचा जा रहा है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की रसोई का बजट बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसियों में समय पर सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। कई जगहों पर सिलेंडर की सप्लाई कम होने की वजह से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि पहले जहां उपभोक्ता 25 दिन के बाद नया सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब नियम बदलकर 45 दिन कर दिया गया है। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

गांवों में ज्यादा असर

गैस की इस किल्लत का सबसे ज्यादा असर गांवों में देखने को मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग बताते हैं कि गैस एजेंसी में बुकिंग कराने के बाद भी कई बार 10 से 15 दिन तक सिलेंडर नहीं मिलता। ऐसे में मजबूरी में उन्हें बाजार से महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है।

कुछ उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसी के कर्मचारी और कुछ स्थानीय लोग मिलकर सिलेंडर की कालाबाजारी कर रहे हैं। वे घरेलू सिलेंडर को बाजार में अधिक कीमत पर बेच देते हैं। इसके कारण आम उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पाता।

45 दिन में ही हो सकेगी नई बुकिंग

नए नियम के अनुसार अब ग्रामीण उपभोक्ता 45 दिन के अंतराल के बाद ही नया सिलेंडर बुक कर पाएंगे। पहले यह अवधि 25 दिन थी। इस बदलाव से उन परिवारों को ज्यादा परेशानी हो रही है जिनके घर में गैस का उपयोग अधिक होता है या जिनके पास केवल एक ही सिलेंडर है।

लोगों का कहना है कि 45 दिन तक एक सिलेंडर चलाना कई बार संभव नहीं होता। खासकर बड़े परिवारों में गैस जल्दी खत्म हो जाती है और फिर लोगों को लकड़ी या कोयले का सहारा लेना पड़ता है।

कालाबाजारी की शिकायतें

कई जगहों से यह भी शिकायतें आ रही हैं कि गैस सिलेंडर की कालाबाजारी बढ़ गई है। सरकारी दर पर मिलने वाला सिलेंडर कुछ दुकानदार और बिचौलिए ज्यादा कीमत पर बेच रहे हैं। कुछ जगहों पर ₹900 का सिलेंडर ₹1500 से लेकर ₹1800 तक में बेचा जा रहा है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब वे एजेंसी पर पूछताछ करते हैं तो जवाब मिलता है कि स्टॉक खत्म हो गया है। लेकिन वहीं बाजार में वही सिलेंडर ऊंचे दामों पर आसानी से मिल जाता है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

सरकार से कार्रवाई की मांग

ग्रामीण इलाकों के लोगों ने सरकार और प्रशासन से इस मामले में कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि अगर गैस की सप्लाई सही तरीके से की जाए और कालाबाजारी पर रोक लगाई जाए तो आम लोगों को राहत मिल सकती है।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि गैस की सप्लाई चेन को बेहतर बनाने की जरूरत है। साथ ही एजेंसियों की नियमित जांच और निगरानी भी जरूरी है ताकि किसी तरह की गड़बड़ी को समय रहते रोका जा सके।

गरीब परिवारों पर बढ़ा बोझ

गैस की कीमत और उपलब्धता की समस्या का सबसे ज्यादा असर गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। कई परिवार ऐसे हैं जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे हैं। ऐसे में अगर उन्हें गैस सिलेंडर के लिए दोगुनी कीमत चुकानी पड़े तो उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है।

कई ग्रामीण महिलाएं बताती हैं कि अगर समय पर गैस नहीं मिलती तो उन्हें फिर से लकड़ी और चूल्हे का सहारा लेना पड़ता है। इससे न सिर्फ समय ज्यादा लगता है बल्कि धुएं की वजह से स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है।

समाधान की उम्मीद

लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या पर ध्यान देगा और गैस की सप्लाई को सामान्य बनाएगा। अगर सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई जाए और बुकिंग की अवधि को फिर से कम किया जाए तो ग्रामीण उपभोक्ताओं को काफी राहत मिल सकती है।

फिलहाल गैस की किल्लत और कालाबाजारी के कारण आम लोगों की रसोई पर संकट मंडरा रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस समस्या का समाधान कितनी जल्दी निकालते हैं।

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