सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
गाजियाबाद,
मुख्य बिंदु:
- गाजियाबाद के 260 PUC केंद्रों की होगी चरणबद्ध जांच।
- बिना वाहन जांच के सर्टिफिकेट जारी करने की शिकायतों पर ARTO प्रशासन सख्त।
- मशीनों की सटीकता और ऑपरेटरों की योग्यता की होगी पड़ताल।
- नियमों के उल्लंघन पर केंद्रों के लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी।
विस्तृत समाचार:
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बढ़ते स्तर और वाहनों से निकलने वाले धुएं पर लगाम लगाने के लिए गाजियाबाद परिवहन विभाग ने कमर कस ली है। एआरटीओ (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव ने जिले में संचालित सभी 260 प्रदूषण जांच केंद्रों की सघन जांच के आदेश जारी किए हैं।
क्यों हो रही है कार्रवाई?
विभाग को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई केंद्रों पर बिना वाहन की वास्तविक जांच किए ही ‘खेल’ चल रहा है और अवैध रूप से प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा, कई केंद्रों पर मशीनें मानक के अनुरूप काम नहीं कर रही हैं।
जांच में किन बातों पर रहेगा फोकस?
परिवहन विभाग की टीमें (जिसमें एआरटीओ और आरआई शामिल होंगे) निम्नलिखित बिंदुओं की जांच करेंगी:
- मशीनों की कार्यक्षमता: क्या प्रदूषण मापने वाली मशीनें सही रीडिंग दे रही हैं?
- प्रशिक्षित ऑपरेटर: क्या जांच करने वाला व्यक्ति अधिकृत और प्रशिक्षित है?
- पारदर्शिता: क्या वाहनों की जांच प्रक्रिया का रिकॉर्ड और वीडियो पोर्टल पर सही ढंग से अपलोड किया जा रहा है?
अधिकारियों की चेतावनी:
एआरटीओ प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निरीक्षण के दौरान किसी भी केंद्र पर प्रशिक्षित ऑपरेटर नहीं मिला या मशीनों में गड़बड़ी पाई गई, तो उस केंद्र के खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी और उनका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
जनता के लिए अपील:
परिवहन विभाग ने वाहन स्वामियों से भी अपील की है कि वे केवल अधिकृत केंद्रों से ही जांच कराएं और सुनिश्चित करें कि उनके वाहन का धुआं सही तरीके से मापा गया है। बता दें कि गाजियाबाद इस सीजन में देश के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर रहा है, जिससे प्रशासन पर दबाव और बढ़
क्यों जरूरी है यह कार्रवाई? (ताजा AQI रिपोर्ट)
गाजियाबाद की हवा इस वक्त सांस लेने लायक नहीं बची है। 10 मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार स्थिति भयावह है:
- गाजियाबाद का औसत AQI: 390 (Hazardous/खतरनाक) [1]
- लोनी (Loni): सबसे प्रदूषित क्षेत्र, जहाँ AQI 361 तक दर्ज किया गया है। [2]
- इंदिरापुरम: यहाँ भी AQI 313 के पार है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है।
- PM 2.5 स्तर: हवा में पीएम 2.5 के कणों की मात्रा 261 तक पहुँच गई है, जो सामान्य से कई गुना ज्यादा है।
जांच में क्या होगा?
एआरटीओ (प्रशासन) अशोक कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीमें निम्नलिखित बिंदुओं पर छापेमारी कर रही हैं:
- ऑनलाइन रिकॉर्डिंग: क्या जांच केंद्र वाहनों की जांच का वीडियो और डेटा लाइव पोर्टल पर अपलोड कर रहे हैं?
- फर्जी पासिंग: कहीं बिना वाहन के ही सर्टिफिकेट तो जारी नहीं किए जा रहे?
- मशीनों की कैलिब्रेशन: क्या धुआं मापने वाली मशीनें सही रीडिंग दे रही हैं या उनमें छेड़छाड़ की गई है?
लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल जांच नहीं, बल्कि ‘करो या मरो’ की स्थिति है। निरीक्षण में दोषी पाए जाने वाले केंद्रों के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) या रद्द किए जाएंगे। साथ ही, केंद्र संचालकों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की भी तैयारी है।
वाहन चालकों के लिए अपील:
प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे चंद रुपयों के लालच में फर्जी सर्टिफिकेट न बनवाएं। प्रदूषण कम करने में सहयोग करें, क्योंकि गाजियाबाद इस विंटर सीजन में देश के सबसे प्रदूषित शहरों में से एक रहा है।
“फर्जीवाड़ा करने वाले प्रदूषण केंद्रों की अब खैर नहीं, क्योंकि गाजियाबाद RTO का हंटर चलने को तैयार है। पल-पल की अपडेट के लिए जुड़े रहिए सावधान नेशन न्यूज के साथ। खबर जो आपको रखे हर पल सावधान!”