सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को भगवान सदाशिव अपने अनंत शिवलिंग स्वरूप में प्रकट हुए थे, जिसे हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं। इस पावन अवसर पर शिवलिंग का जलाभिषेक करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शिवपुराण के अनुसार जल अर्पित करने का एक विशेष शास्त्रीय क्रम है?
जलाभिषेक का सही शास्त्रीय क्रम
शिवपुराण के अनुसार, शिवलिंग में पूरे शिव परिवार का वास होता है। इसलिए जल सीधे शिवलिंग पर चढ़ाने के बजाय इस क्रम का पालन करें:
- भगवान गणेश: सबसे पहले शिवलिंग के दाईं ओर (Right side) जल अर्पित करें।
- भगवान कार्तिकेय: इसके बाद बाईं ओर (Left side) जल चढ़ाएं।
- माता पार्वती: शिवलिंग के चारों ओर (आधार भाग) जल अर्पित करें।
- अशोक सुंदरी: माता पार्वती के साथ ही उनकी पुत्री अशोक सुंदरी का पूजन भी स्वतः हो जाता है।
- नंदी महाराज: अंत में नंदी जी पर जल चढ़ाएं।
- महादेव: सबसे अंत में शिवलिंग के ऊपरी भाग पर धीरे-धीरे जल की धारा प्रवाहित करें।
महत्वपूर्ण नियम और सावधानियां:
- दिशा का ध्यान: जलाभिषेक करते समय अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर रखें। दक्षिण दिशा में खड़े होकर जल चढ़ाना सबसे उत्तम माना जाता है ताकि मुख उत्तर की ओर रहे।
- पात्र का चुनाव: जल के लिए तांबे, पीतल या चांदी के लोटे का उपयोग करें।
- मंत्र जाप: जल अर्पित करते समय “ॐ नमः शिवाय” या “ॐ नमः शम्भवाय च…” मंत्र का निरंतर जाप करें।
- सामग्री: जल के साथ-साथ बिल्वपत्र, धतूरा, अक्षत और भस्म अर्पित करना न भूलें।
शुभ मुहूर्त (Mahashivratri 2026 Timing):
- तारीख: 15 फरवरी 2026, रविवार।
- चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 15 फरवरी, शाम 05:04 बजे से।
- निशिता काल पूजा: रात 12:09 से 01:01 तक (16 फरवरी)।
निष्कर्ष:
महाशिवरात्रि पर श्रद्धा और सही विधि से किया गया अभिषेक जीवन में सुख-समृद्धि लाता है। शिवपुराण के अनुसार, इस दिन रात्रि के चारों प्रहर की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
“यह पूजा केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और समर्पण का प्रतीक भी है। सावधान नेशन न्यूज हमेशा आपके लिए ऐसे अनमोल पलों की जानकारी लाता रहेगा। मैं तरुण कश्यप आपको नमस्कार कहता हूँ।”