पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ (PUSU) चुनाव हमेशा से बिहार की राजनीति का ‘नर्सरी’ माना जाता रहा है, लेकिन आज यानी 28 फरवरी, 2026 को मतदान के दौरान जो कुछ भी हुआ,
उसने लोकतंत्र के इस उत्सव पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पटना कॉलेज कैंपस से लेकर सड़कों तक हंगामे, पत्थरबाजी और झड़प के जो वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, वे डराने वाले हैं।
यहाँ इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट दी गई है:
1. सुबह का उत्साह और फिर अचानक भड़की हिंसा
शनिवार सुबह जब मतदान शुरू हुआ, तो छात्रों में भारी उत्साह देखा गया। कतारें लंबी थीं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। लेकिन दोपहर होते-होते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
पटना कॉलेज कैंपस के अंदर दो गुटों के बीच किसी बात को लेकर बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि छात्र एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंक रहे हैं और लाठी-डंडों से हमला कर रहे हैं।
2. पत्थरबाजी और पुलिस का लाठीचार्ज
हंगामा इतना बढ़ गया कि कॉलेज के गेट के बाहर भी पत्थरबाजी शुरू हो गई। आम राहगीरों और पुलिसकर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागना पड़ा।
स्थिति को काबू में करने के लिए पटना पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े। इस झड़प में कई छात्रों को चोटें आई हैं, जिन्हें इलाज के लिए पीएमसीएच (PMCH) ले जाया गया है।
3. निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल यादव की गिरफ्तारी
इस पूरे ड्रामे के बीच एक बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने निर्दलीय प्रत्याशी रिंकल यादव को हिरासत में ले लिया। पुलिस का आरोप है कि रिंकल यादव अपने समर्थकों के साथ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे
और उनके समर्थकों ने ही पुलिस पर पथराव शुरू किया। हालांकि, उनके समर्थकों का कहना है कि प्रशासन सत्ता पक्ष के दबाव में काम कर रहा है और उन्हें जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया से दूर रखने के लिए गिरफ्तार किया गया है।
4. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का असर
ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर #PatnaUniversityElection और #PUSU2026 ट्रेंड कर रहा है। वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारियों को छात्रों के पीछे दौड़ते और छात्र गुटों को बमबाजी की अफवाह के बीच भागते हुए देखा जा सकता है। इन वीडियो ने न केवल अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
5. क्यों खास है यह चुनाव?
पटना विश्वविद्यालय का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहाँ से निकले छात्र नेता आगे चलकर बिहार और देश की मुख्यधारा की राजनीति में बड़ा मुकाम हासिल करते हैं। इस बार मुख्य मुकाबला छात्र जदयू, एबीवीपी (ABVP), और महागठबंधन (RJD-Left) के समर्थित उम्मीदवारों के बीच है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने इस त्रिकोणीय मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है।
6. प्रशासन और कुलपति का पक्ष
पटना विश्वविद्यालय के कुलपति ने इस घटना पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने Patna University Official Site के माध्यम से छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की। प्रशासन का कहना है कि “कुछ बाहरी तत्वों” ने कैंपस का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है और उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
7. मतदान के बाद अब नतीजों का इंतजार
तमाम हंगामे के बावजूद प्रशासन ने दावा किया है कि लगभग 55% से अधिक मतदान हुआ है। अब सभी मतपेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच स्ट्रॉन्ग रूम में रख दिया गया है। वोटों की गिनती कल होगी, लेकिन आज के हंगामे ने यह साफ कर दिया है कि छात्र राजनीति में वैचारिक लड़ाई से ज्यादा अब बाहुबल का प्रभाव बढ़ने लगा है।
निष्कर्ष:
पटना कॉलेज में आज जो हुआ, वह केवल छात्रों के बीच की लड़ाई नहीं है, बल्कि बिहार की गिरती छात्र राजनीति का प्रतीक है। शिक्षा के मंदिर में पत्थरबाजी और पुलिसिया कार्रवाई यह दर्शाती है कि लोकतांत्रिक मूल्यों की जगह अब अराजकता ले रही है। अब देखना यह होगा कि कल के नतीजे क्या नया समीकरण लेकर आते हैं।
पटना विश्वविद्यालय चुनाव की यह हिंसा दर्शाती है कि ‘बिहार के ऑक्सफोर्ड’ में अब कलम से ज्यादा बाहुबल की गूंज है; अब सबकी नजरें कल आने वाले चुनावी नतीजों पर टिकी हैं।