सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
नमस्कार, स्वागत है आपका हमारे खास हेल्थ सेगमेंट में। फरवरी की विदाई और मार्च के आगमन के साथ ही मौसम का मिजाज बदलने लगा है। आयुर्वेद में इस समय को ‘वसन्त ऋतु’ का काल माना जाता है। इस दौरान सर्दी कम होती है और सूरज की तपिश बढ़ने लगती है, जिससे शरीर में जमा हुआ ‘कफ’ पिघलने लगता है। अगर इस समय सही खान-पान न रखा जाए, तो सर्दी, खांसी, सुस्ती और पाचन की समस्याएं घेर सकती हैं। आइए जानते हैं, आयुर्वेद के अनुसार मार्च में क्या खाना आपके लिए फायदेमंद है।
क्या खाएं :
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम में शरीर की जठराग्नि (पाचन शक्ति) थोड़ी मंद हो जाती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन ही सबसे उत्तम है।
- अनाज: मार्च के महीने में पुराने जौ, गेहूं और बाजरे का सेवन करना चाहिए। ये पचने में हल्के होते हैं और शरीर से अतिरिक्त कफ को कम करने में मदद करते हैं।
- दालें: दालों में मूंग, मसूर, अरहर और चने की दाल का सेवन सबसे ज्यादा लाभकारी बताया गया है。
- सब्जियां व मसाले: भोजन में अदरक, ताजी हल्दी, मूली, सहजन (ड्रमस्टिक), और कड़वी सब्जियां जैसे करेला और मेथी शामिल करें। ये आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखती हैं।
- शहद का प्रयोग: आयुर्वेद में वसंत ऋतु में शहद को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। गुनगुने पानी में शहद मिलाकर पीना कफ को संतुलित करने का बेहतरीन तरीका है।
(सावधानी – किन चीजों से बचें):
इस मौसम में कफ दोष बढ़ता है, इसलिए कुछ चीजों का परहेज बहुत जरूरी है:
- भारी और चिकना भोजन: ज्यादा तेल-मसाले, घी और भारी मिठाइयों से बचें क्योंकि ये कफ को और बढ़ाते हैं।
- खट्टे और ठंडे पदार्थ: फ्रिज का ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स और बहुत ज्यादा खट्टी चीजों (जैसे दही) का सेवन कम से कम करें।
- नया गुड़ और नए अनाज: आयुर्वेद के अनुसार मार्च-अप्रैल में नया गुड़ खाने से बचना चाहिए।