सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज ‘विकसित भारत’ के संकल्प की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय के नए परिसर ‘सेवा तीर्थ‘ और केंद्रीय सचिवालय के ‘कर्तव्य भवन-1 व 2’ का लोकार्पण किया। 78 वर्षों के बाद, देश का शासन केंद्र अब ब्रिटिश काल के ‘साउथ ब्लॉक’ से निकलकर पूरी तरह भारतीय संकल्पों से निर्मित इस आधुनिक परिसर में स्थानांतरित हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- ‘नागरिक देवो भव’ का संकल्प: सेवा तीर्थ की पट्टिका पर देवनागरी लिपि में ‘नागरिक देवो भव’ अंकित है, जो शासन के सेवा-भाव और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।
- गुलामी की मानसिकता से मुक्ति: उद्घाटन संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि साउथ और नॉर्थ ब्लॉक ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतीक थे, जबकि सेवा तीर्थ 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।
- एकीकृत प्रशासन: इस नए परिसर में अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय भी एक ही छत के नीचे कार्य करेंगे, जिससे अंतर-विभागीय तालमेल और कार्यक्षमता बढ़ेगी।
- पर्यावरण अनुकूल संरचना: यह इमारत 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप बनाई गई है, जिसमें सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और आधुनिक कचरा प्रबंधन की सुविधाएं हैं।
नए दफ्तर से लिए गए पहले बड़े निर्णय:
प्रधानमंत्री ने सेवा तीर्थ में कार्यभार संभालते ही कई महत्वपूर्ण फाइलों पर हस्ताक्षर किए:
- PM RAHAT योजना: सड़क दुर्घटना पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त कैशलेस इलाज।
- लखपति दीदी अभियान: लक्ष्य को बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाओं तक करने की मंजूरी।
- कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड: फंड को 1 लाख करोड़ से बढ़ाकर 2 लाख करोड़ रुपये किया गया।
निष्कर्ष:
‘सेवा तीर्थ‘ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि शासन की उस नई कार्यसंस्कृति का प्रतीक है जहाँ शक्ति का प्रदर्शन नहीं, बल्कि जनता की सेवा सर्वोपरि है। पुराने साउथ ब्लॉक को अब एक संग्रहालय (Museum) के रूप में विकसित किया जाएगा।