सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
भारत सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए दो बड़े कदम उठाए हैं। जहाँ एक ओर ‘बायोफार्मा शक्ति’ (Biopharma SHAKTI) मिशन के जरिए दवाओं के निर्माण में क्रांति लाने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर देश में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मेडिकल सीटों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की जा रही है।
1. क्या है ‘बायोफार्मा शक्ति’ मिशन?
सरकार ने ₹10,000 करोड़ के शुरुआती निवेश के साथ ‘बायोफार्मा शक्ति’ योजना को मंजूरी दी है। इस मिशन के मुख्य उद्देश्य हैं:
- दवाओं का स्वदेशी निर्माण: कैंसर, डायबिटीज और दुर्लभ बीमारियों की महंगी दवाओं को भारत में ही बनाने के लिए कंपनियों को प्रोत्साहन देना।
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D): नई वैक्सीन और बायोलॉजिक्स की खोज के लिए देश भर में 5 नए ‘बायो-इनोवेशन हब’ स्थापित किए जाएंगे।
- ग्लोबल सप्लाई चेन: भारत को दुनिया की ‘फार्मेसी’ से बदलकर ‘इनोवेशन हब’ बनाना।
2. मेडिकल शिक्षा में बड़ा बदलाव: 75,000 नई सीटें
डॉक्टरों और मरीजों के अनुपात को सुधारने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय ने अगले 5 वर्षों का रोडमैप जारी किया है:
- सीटों की बढ़ोतरी: सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में कुल 75,000 नई एमबीबीएस और पीजी सीटें जोड़ी जा रही हैं।
- नए मेडिकल कॉलेज: मौजूदा जिला अस्पतालों को अपग्रेड करके नए मेडिकल कॉलेज बनाए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण इलाकों के छात्रों को अपने ही क्षेत्र में पढ़ाई का मौका मिले।
- डिजिटल लर्निंग: एआई (AI) और वर्चुअल रियलिटी के जरिए मेडिकल छात्रों को एडवांस सर्जरी की ट्रेनिंग दी जाएगी।
3. आम जनता पर क्या होगा असर?
- सस्ता इलाज: स्वदेशी दवाओं के उत्पादन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज 40% तक सस्ता होने की उम्मीद है।
- रोजगार के अवसर: बायोफार्मा सेक्टर में रिसर्चर्स, वैज्ञानिकों और लैब टेक्नीशियंस के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होंगे।
- बेहतर हेल्थकेयर: अधिक डॉक्टर होने से सरकारी अस्पतालों में वेटिंग टाइम कम होगा और इलाज की गुणवत्ता बढ़ेगी।