सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
चंडीगढ़: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ स्थित शाखा में ₹590 करोड़ की धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने और फंड ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, लेकिन बैंक बैलेंस और रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया।
मुख्य बाते
- घोटाले की राशि: प्राथमिक जांच में करीब ₹590 करोड़ की हेराफेरी की बात सामने आई है।
- प्रभावित खाते: यह धोखाधड़ी पूरी तरह से हरियाणा सरकार से जुड़ी संस्थाओं और विभागों के खातों तक सीमित है।
- कार्रवाई: बैंक ने तत्काल प्रभाव से चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दी गई है।
- सरकारी फैसला: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में घोषणा की कि आईडीएफसी बैंक को सरकारी पैनल से बाहर (De-empanel) कर दिया गया है। 31 मार्च तक सभी विभागों को इस बैंक से अपने खाते बंद करने का निर्देश दिया गया है।
कैसे हुआ खुलासा?
बैंक के अनुसार, 18 फरवरी 2026 के बाद जब कई सरकारी विभागों ने अपने बैंक स्टेटमेंट का मिलान किया, तो उनके वास्तविक बैलेंस और बैंक रिकॉर्ड में बड़ा अंतर नजर आया। बैंक का मानना है कि कर्मचारियों ने बाहरी लोगों के साथ मिलकर फर्जी फिजिकल चेक के जरिए अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए।
निवेशकों और बैंक पर असर:
इस खबर के सार्वजनिक होते ही सोमवार को आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के शेयरों में 20% की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के करीब ₹14,000 करोड़ डूब गए। हालांकि, आरबीआई (RBI) गवर्नर ने स्पष्ट किया है कि यह एक स्थानीय मामला है और बैंकिंग सिस्टम पर इसका कोई बड़ा संकट नहीं है。
“बैंकिंग जगत के इस महाघोटाले से जुड़ी हर अपडेट हम आप तक पहुँचाते रहेंगे। निष्पक्ष और बेबाक खबरों के लिए देखते रहिए ‘सावधान नेशन न्यूज़’