सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
[नई दिल्ली, फरवरी 2026]
केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के साथ ही भारत ने ‘ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स हब’ बनने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। वित्त मंत्री ने आज घोषणा की कि सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के लिए बजटीय आवंटन को बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया है। इस बड़े निवेश का उद्देश्य घरेलू स्तर पर पुर्जों (components) के निर्माण को बढ़ावा देना और चीन पर निर्भरता को कम करना है।
- भारी निवेश: ECMS फंड को पिछले वर्षों के मुकाबले लगभग दोगुना कर दिया गया है, ताकि भारत में सेमीकंडक्टर और हाई-टेक पार्ट्स की असेंबली तेज हो सके।
- रोजगार के अवसर: विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना से अगले दो वर्षों में टेक सेक्टर में 5 लाख से अधिक नई नौकरियां पैदा होंगी।
- मेक इन इंडिया 2.0: अब स्मार्टफोन ही नहीं, बल्कि लैपटॉप, स्मार्ट वॉच और ईवी (EV) के क्रिटिकल कंपोनेंट्स भी भारत में बनेंगे।
- कस्टम ड्यूटी में राहत: बजट में उन मशीनरी और कच्चे माल पर आयात शुल्क (Custom Duty) कम करने का प्रस्ताव है, जिनका उपयोग भारत में इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स बनाने के लिए किया जाता है।
आम जनता को क्या होगा फायदा?
जब स्मार्टफोन और लैपटॉप के इंटरनल कंपोनेंट्स (जैसे डिस्प्ले, बैटरी और सर्किट बोर्ड) भारत में बनेंगे, तो लॉजिस्टिक्स और इम्पोर्ट ड्यूटी का खर्च बचेगा। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन और अन्य गैजेट्स की कीमतों में 5-10% की गिरावट देखी जा सकती है।
इंडस्ट्री की प्रतिक्रिया:
टेक दिग्गजों और इंडियन सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने इस कदम का स्वागत किया है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि ₹40,000 करोड़ का यह बूस्ट भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में वियतनाम और चीन के बराबर खड़ा कर देगा।
निष्कर्ष:
बजट 2026 यह साफ संदेश देता है कि सरकार अब केवल ‘असेंबली’ नहीं बल्कि ‘कम्पलीट मैन्युफैक्चरिंग’ पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यह न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि दुनिया भर के बड़े ब्रांड्स को भारत में अपनी फैक्ट्री लगाने के लिए प्रेरित करेगा।