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सावधान नेशन न्यूज़

ईरान ने भारतीय टैंकर्स को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की दी मंजूरी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने भारतीय तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद भारत की ऊर्जा आपूर्ति को लेकर जो चिंताएं बढ़ रही थीं, उनमें काफी हद तक कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। खाड़ी देशों से निकलने वाला बड़ी मात्रा में कच्चा तेल इसी रास्ते से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। भारत भी अपने तेल आयात का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग के जरिए प्राप्त करता है। ऐसे में अगर इस रास्ते पर किसी तरह की पाबंदी लगती या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती तो भारत की ऊर्जा जरूरतों पर सीधा असर पड़ सकता था।

हाल के दिनों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। कई अंतरराष्ट्रीय तेल कंपनियों और शिपिंग कंपनियों ने भी अपने जहाजों की आवाजाही को लेकर सावधानी बरतनी शुरू कर दी थी। इसी बीच भारतीय तेल टैंकरों की सुरक्षा और आवाजाही को लेकर भी सवाल उठने लगे थे।

लेकिन अब ईरान की ओर से यह साफ कर दिया गया है कि भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। इस फैसले को भारत के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। इससे भारत की तेल आपूर्ति की श्रृंखला प्रभावित होने की आशंका काफी हद तक कम हो गई है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है। देश अपनी कुल जरूरत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। इसमें खाड़ी देशों का बड़ा योगदान है। सऊदी अरब, इराक, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देशों से भारत बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। इन देशों से आने वाले ज्यादातर तेल टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर ही गुजरते हैं।

ऐसे में इस समुद्री मार्ग की सुरक्षा और खुले रहने का भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम महत्व है। अगर इस रास्ते पर किसी तरह की रुकावट आती है तो न केवल तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी तेजी आ सकती है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी जैसी चीजों की कीमतों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह फैसला भारत के साथ उसके अच्छे संबंधों को भी दर्शाता है। भारत और ईरान के बीच लंबे समय से कूटनीतिक और व्यापारिक संबंध रहे हैं। भारत ने हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता की वकालत की है और सभी पक्षों से बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के मुताबिक अगर भारतीय टैंकरों की आवाजाही सुचारु रूप से जारी रहती है तो भारत के लिए तेल की सप्लाई सामान्य बनी रह सकती है। इससे बाजार में अनिश्चितता कम होगी और कीमतों में अचानक उछाल आने की संभावना भी घटेगी।

हालांकि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पूरे क्षेत्र पर टिकी हुई हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

फिलहाल ईरान द्वारा भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दिए जाने को भारत के लिए एक सकारात्मक खबर माना जा रहा है। इससे न केवल ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राहत मिली है बल्कि यह भी संकेत मिलता है कि मौजूदा तनाव के बीच भी भारत के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है।

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