सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
- राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्लोबल टैरिफ को ‘अवैध’ घोषित करने के बाद अब दुनिया भर की नजरें उस भारी-भरकम रकम पर टिकी हैं, जो अमेरिका पहले ही वसूल चुका है। अनुमान है कि यह राशि $175 बिलियन (करीब 14.5 लाख करोड़ रुपये) से भी ज्यादा हो सकती है।
- रिफंड का गणित: पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के पेन व्हार्टन बजट मॉडल (Penn Wharton Budget Model) के अनुसार, 1977 के इमरजेंसी कानून (IEEPA) के तहत वसूले गए करोड़ों डॉलर अब कानूनी रूप से वापस किए जाने योग्य हो सकते हैं। आयातकों और कंपनियों ने अब अमेरिकी कस्टम विभाग से अपने पैसे वापस मांगने की तैयारी तेज कर दी है।
- ट्रंप की चेतावनी: इस संभावित रिफंड पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई इतनी आसान नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी है कि रिफंड के मुद्दे पर अगले 5 सालों तक अदालती जंग (Legal War) चलेगी। ट्रंप का तर्क है कि वसूला गया पैसा पहले ही खर्च किया जा चुका है और इसे वापस करना अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए “विनाशकारी” होगा।
- कानूनी पेंच: सुप्रीम कोर्ट ने अपने 6-3 के फैसले में टैरिफ को तो रद्द कर दिया, लेकिन पैसे की वापसी कैसे होगी, इस पर स्पष्ट निर्देश नहीं दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को व्यक्तिगत रूप से अदालतों (Court of International Trade) में केस लड़ने होंगे, जो एक लंबी और “मेसी” (Messy) प्रक्रिया हो सकती है।
- नया दांव: रिफंड के दबाव के बीच, ट्रंप ने पीछे हटने के बजाय 15% का नया ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है, ताकि राजस्व की कमी को पूरा किया जा सके।
- अमेरिका से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीति को एक बड़ा झटका देते हुए उनके द्वारा लगाए गए ‘ग्लोबल टैरिफ’ को पूरी तरह से अवैध करार दिया है।
- कोर्ट का फैसला: कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने स्पष्ट किया कि संविधान के तहत टैक्स और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं।
- कानूनी आधार: ट्रंप प्रशासन ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का इस्तेमाल कर दुनिया भर से आने वाले सामान पर भारी शुल्क लगाया था। कोर्ट ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को व्यापक स्तर पर टैक्स थोपने की अनुमति नहीं देता।
- ट्रंप की प्रतिक्रिया: इस फैसले पर राष्ट्रपति ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “अमेरिका विरोधी” और “शर्मनाक” बताया है। उन्होंने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए 15% नया ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है, जिसे वे दूसरे कानूनी प्रावधानों के तहत लागू करने की कोशिश कर रहे हैं।
- भारत पर असर: भारत के लिए यह राहत भरी खबर हो सकती है, क्योंकि इससे पुराने टैरिफ नियम बेअसर हो सकते हैं और नई ट्रेड डील के रास्ते खुल सकते हैं।