1971 का युद्ध: जब लेफ्टिनेंट जनरल जैक फर्ज राफेल जैकब की रणनीति से टूटा पाकिस्तान
सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
नई दिल्ली-प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने इजरायल दौरे के दौरान इजरायली संसद कनेसेट में संबोधन करते हुए 1971 के भारत-पाक युद्ध के नायक Jack Farj Rafael Jacob को याद किया। पीएम मोदी ने कहा कि जनरल जैकब का योगदान इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है और उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी उनसे मिलने का अवसर मिला था।
भारत-इजरायल रिश्तों का ऐतिहासिक संदर्भ
पीएम मोदी ने अपने भाषण में बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था — उसी दिन भारत ने इजरायल को मान्यता दी थी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्ते साझा मूल्यों, लोकतंत्र और रणनीतिक सहयोग पर आधारित हैं।
प्रधानमंत्री मोदी 2017 में इजरायल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने थे, जिससे द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती मिली।
1971 का युद्ध और पाकिस्तान का आत्मसमर्पण
1971 का भारत-पाक युद्ध दक्षिण एशिया के इतिहास का निर्णायक मोड़ था। उस समय पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में राजनीतिक अस्थिरता और मानवाधिकार संकट गहराया हुआ था।
भारतीय सेना के पूर्वी कमान के चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल जैकब ने ऐसी रणनीति तैयार की, जिसने युद्ध को लंबा खिंचने नहीं दिया।
13 दिनों में ऐतिहासिक जीत
भारतीय सेना ने तेज और समन्वित सैन्य अभियान चलाया।
ढाका को चारों ओर से घेरने की रणनीति बनाई गई।
मनोवैज्ञानिक दबाव और कूटनीतिक संतुलन का प्रभावी इस्तेमाल किया गया।
16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल ए.ए.के. नियाज़ी ने भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। लगभग 93,000 पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डाल दिए — यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा सैन्य आत्मसमर्पण माना जाता है।
बांग्लादेश का जन्म
इस जीत के साथ ही पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर एक नए राष्ट्र — बांग्लादेश — के रूप में दुनिया के नक्शे पर उभरा। भारत की इस रणनीतिक और सैन्य सफलता ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया।
पीएम मोदी का संदेश
कनेसेट में अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी का यह उल्लेख केवल इतिहास की चर्चा नहीं था, बल्कि यह भारत और इजरायल के गहरे संबंधों और साझा विरासत का प्रतीक भी था।
जनरल जैकब जैसे अधिकारियों का योगदान यह दर्शाता है कि भारतीय सशस्त्र बलों की रणनीतिक क्षमता और नेतृत्व ने कठिन परिस्थितियों में भी निर्णायक जीत हासिल की है।
1971 की जीत केवल एक सैन्य सफलता नहीं थी, बल्कि यह रणनीति, नेतृत्व और निर्णायक कार्रवाई का उदाहरण थी। लेफ्टिनेंट जनरल जैक फर्ज राफेल जैकब की योजना ने पाकिस्तान को 13 दिनों में आत्मसमर्पण करने पर मजबूर कर दिया और एक नए राष्ट्र — बांग्लादेश — का जन्म हुआ।
आज जब भारत आधुनिक रक्षा साझेदारियों और वैश्विक कूटनीति की बात करता है, तब 1971 की यह ऐतिहासिक जीत प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आती है।
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