मारपीट और सिर मुंडवाने का मामला
हरियाणा | 02 March 2026
सावधान नेशन न्यूज़
मोहिनी कुमारी
हरियाणा के करनाल शहर से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। मॉडल टाउन इलाके में एक दुकानदार ने 12 साल के मासूम बच्चे पर चोरी का आरोप लगाते हुए उसके साथ मारपीट की, उसका सिर मुंडवा दिया और कथित रूप से कई घंटों तक बाथरूम में बंद रखा। इस घटना से इलाके में रोष का माहौल है और परिजनों ने पुलिस से न्याय की गुहार लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
मॉडल टाउन क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने आरोप लगाया कि वह एक स्थानीय दुकान पर काम करती है। शनिवार को उसकी तबीयत खराब होने के कारण वह काम पर नहीं जा सकी। आरोप है कि इसी दौरान दुकानदार उसके 12 वर्षीय बेटे को काम करवाने के लिए अपने साथ ले गया।
महिला के मुताबिक, शाम को जब उसका बेटा घर लौटा तो वह डरा-सहमा हुआ था। उसके शरीर पर चोट के निशान थे और सिर के बाल पूरी तरह से मुंडे हुए थे। बच्चे ने बताया कि दुकानदार ने उस पर दुकान से सामान चोरी करने का आरोप लगाया और गुस्से में आकर उसके साथ मारपीट की। इतना ही नहीं, उसे कई घंटों तक बाथरूम में बंद रखा गया।
परिजनों का विरोध और पुलिस में शिकायत
घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में आक्रोश फैल गया। महिला ने पहले सेक्टर-13 पुलिस चौकी में शिकायत दी, लेकिन बताया गया कि मामला मॉडल टाउन चौकी के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बाद पीड़ित परिवार मॉडल टाउन चौकी पहुंचा।
हालांकि, मॉडल टाउन चौकी पुलिस इंचार्ज गीता ने कहा कि उनके पास अभी तक औपचारिक लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलते ही उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी और मामले की जांच शुरू की जाएगी।
दुकानदार की सफाई
आरोपों के बाद दुकानदार ने अपनी सफाई में कहा कि बच्चे ने उसकी दुकान से सामान चोरी किया था। उसने स्वीकार किया कि गुस्से में आकर उसने बच्चे के साथ मारपीट की, लेकिन यह भी कहा कि उससे गलती हो गई। हालांकि, किसी भी स्थिति में एक नाबालिग के साथ इस तरह का व्यवहार कानूनन और नैतिक रूप से गलत है।
कानून क्या कहता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला बाल उत्पीड़न और अवैध बंधक बनाने की श्रेणी में आ सकता है। नाबालिग के साथ शारीरिक हिंसा और अपमानजनक व्यवहार गंभीर अपराध है। पुलिस जांच के बाद संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जा सकता है।
समाज में बढ़ती चिंता
इस घटना ने बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 12 साल के बच्चे को कथित चोरी के शक में इस तरह सजा देना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि कानून को अपने हाथ में लेने जैसा भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि दुकानदार को संदेह था तो उसे पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी, न कि खुद सजा देने का प्रयास करना चाहिए था।
इलाके के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी घटना की निंदा की है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना समाज और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
आगे की कार्रवाई
पुलिस का कहना है कि शिकायत मिलने के बाद मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में है और चाहता है कि दोषी को सजा मिले ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बच्चों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोपरि है। किसी भी परिस्थिति में हिंसा समाधान नहीं हो सकती। समाज को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कानून का पालन दोनों सुनिश्चित हों।
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