सावधान नेशन न्यूज
तरुण कश्यप
मध्य पूर्व से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है, जहाँ ईरान और इजरायल के बीच जंग अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। आज संघर्ष का चौथा दिन है और ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स यानी IRGC ने एक ऐसा कदम उठाया है जिसने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।”
1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की तालाबंदी
ईरान ने आधिकारिक तौर पर सामरिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा कर दी है। IRGC के वरिष्ठ सलाहकार इब्राहिम जब्बारी ने चेतावनी दी है कि जो भी जहाज यहाँ से गुजरने की कोशिश करेगा, उसे ‘आग के हवाले’ (set ablaze) कर दिया जाएगा। दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिससे कच्चा तेल $200 प्रति बैरल तक पहुँचने की आशंका है।
2. सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों पर हमले
जंग की आग अब पड़ोसी देशों तक फैल चुकी है। ईरान समर्थित हमलों में सऊदी अरब के रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास को दो संदिग्ध ड्रोनों से निशाना बनाया गया। इसके अलावा, सऊदी की सबसे बड़ी रास तनुरा (Ras Tanura) तेल रिफाइनरी पर भी भीषण हमला हुआ है, जिससे वहां कामकाज ठप हो गया है।
3. USS अब्राहम लिंकन और अमेरिकी हताहत
ईरान के सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि उन्होंने खाड़ी में तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर 4 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि मिसाइलें युद्धपोत के करीब भी नहीं पहुँचीं। इस बीच, अमेरिका ने पुष्टि की है कि इस युद्ध की शुरुआत से अब तक उसके 6 सैनिक मारे गए हैं।
4. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और युद्ध का विस्तार
इज़राइल और अमेरिका के साझा हमलों (Operation Epic Fury) के जवाब में ईरान ने न केवल इजरायल के तेल अवीव और हाइफ़ा को निशाना बनाया है, बल्कि बहरीन, कुवैत और यूएई में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी मिसाइलें दागी हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यह सैन्य अभियान 4 से 5 सप्ताह तक खिंच सकता है।
तेल संकट के विकल्प और समाधान
पूरी तरह से होर्मुज जलडमरूमध्य का विकल्प ढूंढना चुनौतीपूर्ण है क्योंकि दुनिया का 20% तेल यहीं से गुजरता है। हालांकि, संकट से निपटने के लिए निम्नलिखित विकल्प अपनाए जा रहे हैं:
- वैकल्पिक पाइपलाइन मार्ग:
- सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन: यह प्रतिदिन 50 लाख बैरल कच्चा तेल लाल सागर के बंदरगाहों तक भेज सकती है, जिससे होर्मुज मार्ग की जरूरत नहीं पड़ती।
- यूएई की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन: यह प्रतिदिन 15 लाख बैरल तेल सीधे ओमान की खाड़ी तक पहुँचा सकती है।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR): भारत, अमेरिका और चीन जैसे देश अपने आपातकालीन तेल भंडार का उपयोग कर रहे हैं। भारत के पास विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में भूमिगत भंडार हैं जो लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकते हैं।
- आपूर्ति विविधीकरण: भारत रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से तेल आयात बढ़ाकर खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
- नवीकरणीय ऊर्जा: दीर्घकालिक समाधान के रूप में देश सौर और पवन ऊर्जा जैसे विकल्पों को तेजी से अपना रहे
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