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बिहार राज्यसभा चुनाव: 5वीं सीट के लिए NDA का ‘मास्टरप्लान’

पटना | बिहार

संवाददाता : कृष्णा बिहारी, पटना

बिहार में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो गया है। राज्य की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव में इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। खास तौर पर पांचवीं सीट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी जंग तेज हो गई है। इसी बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए ने इस सीट को जीतने के लिए खास रणनीति तैयार की है।

सूत्रों के अनुसार एनडीए ने अपने सभी विधायकों को सख्त निर्देश दिया है कि वे मतदान तक पटना से बाहर न जाएं। गठबंधन के नेताओं का मानना है कि अगर सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करते हैं तो पांचवीं सीट पर भी जीत हासिल की जा सकती है। इसी वजह से विधायकों को राजधानी पटना में ही रहने को कहा गया है ताकि किसी तरह की क्रॉस वोटिंग या राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावना को रोका जा सके।

दरअसल बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए एक उम्मीदवार को करीब 41 वोटों की जरूरत होती है। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से एनडीए के पास इतनी ताकत है कि वह चार सीटें आराम से जीत सकता है, लेकिन पांचवीं सीट के लिए उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। यही कारण है कि इस सीट को लेकर एनडीए ने खास रणनीति बनाई है और अपने विधायकों को पूरी तरह सतर्क रहने के लिए कहा है।

बताया जा रहा है कि चुनाव को लेकर एनडीए के प्रमुख नेताओं ने पटना में कई बैठकें भी की हैं। इन बैठकों में विधायकों को मतदान की प्रक्रिया और पार्टी की रणनीति के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही यह भी कहा गया कि सभी विधायक पार्टी लाइन के अनुसार ही वोट करें। किसी भी तरह की गलती या लापरवाही से चुनाव का समीकरण बदल सकता है।

दूसरी तरफ विपक्षी महागठबंधन भी इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रहा है। राष्ट्रीय जनता दल और उसके सहयोगी दल लगातार रणनीति बना रहे हैं और अन्य पार्टियों से समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष को उम्मीद है कि अगर सभी विपक्षी विधायक एकजुट होकर मतदान करते हैं तो एनडीए के लिए पांचवीं सीट जीतना आसान नहीं होगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राज्यसभा चुनाव का गणित काफी पेचीदा हो गया है। पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला और ज्यादा रोचक बन गया है। यही वजह है कि लगभग एक दशक बाद बिहार में राज्यसभा चुनाव के लिए वास्तविक मतदान की स्थिति बनी है।

इस चुनाव में छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका भी बेहद अहम मानी जा रही है। अगर इनका समर्थन किसी एक पक्ष को मिल जाता है तो चुनाव का परिणाम पूरी तरह बदल सकता है। इसलिए सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इन विधायकों से संपर्क बनाए हुए हैं।

एनडीए के नेताओं का कहना है कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और सभी विधायक पार्टी के फैसले के साथ खड़े हैं। नेताओं को उम्मीद है कि मतदान के दिन सभी विधायक पार्टी उम्मीदवार के पक्ष में वोट करेंगे और गठबंधन पांचवीं सीट पर भी जीत हासिल करेगा।

वहीं विपक्ष का दावा है कि चुनाव में अंतिम समय तक कई राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। विपक्षी दलों को उम्मीद है कि कुछ विधायकों का समर्थन उन्हें मिल सकता है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो सकता है।

कुल मिलाकर बिहार का यह राज्यसभा चुनाव अब सियासी प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। सभी की नजर अब मतदान के दिन पर टिकी हुई है, जब यह साफ हो जाएगा कि पांचवीं सीट आखिर किसके खाते में जाती है।

राजनीतिक हलकों में फिलहाल चर्चाओं का दौर जारी है और हर दल अपने स्तर पर रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। आने वाले दिनों में यह चुनाव बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ भी साबित हो सकता है।

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