पटना ! बिहार
तरुण कश्यप
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (30 मार्च 2026) को बिहार विधान परिषद (MLC) की अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को सौंपा। नीतीश कुमार के साथ-साथ बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
इस्तीफे का मुख्य कारण:
नीतीश कुमार हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति एक साथ संसद और राज्य विधायिका दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। नियमानुसार, राज्यसभा चुनाव जीतने के 14 दिनों के भीतर राज्य की सदस्यता से इस्तीफा देना आवश्यक होता है, जिसकी समय सीमा आज ही समाप्त हो रही थी।
मुख्यमंत्री पद पर क्या होगा असर?
- संवैधानिक प्रावधान: नियमों के मुताबिक, नीतीश कुमार सदन का सदस्य रहे बिना भी अगले 6 महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
- राजनीतिक कयास: हालाँकि वे तकनीकी रूप से पद पर रह सकते हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वह जल्द ही मुख्यमंत्री पद से भी इस्तीफा दे सकते हैं।
- नए सीएम की रेस: नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद बिहार में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएँ तेज हो गई हैं। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को इस पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है।
अगला कदम:
नीतीश कुमार और नितिन नवीन 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले सकते हैं। करीब दो दशकों तक बिहार की राजनीति के केंद्र में रहने के बाद, अब नीतीश कुमार केंद्र की राजनीति में एक नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं।
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर पाँच दशकों से अधिक का है, जिसकी शुरुआत 1970 के दशक के छात्र आंदोलनों से हुई थी। वह बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने रिकॉर्ड 10 बार शपथ ली है। हाल ही में, मार्च 2026 में उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर राज्यसभा जाने का निर्णय लिया है।
उनके राजनीतिक जीवन के मुख्य पड़ाव :
शुरुआती दौर और संघर्ष (1970 – 1985)
- छात्र राजनीति: नीतीश कुमार ने 1970 के दशक में जयप्रकाश नारायण (JP) के ‘संपूर्ण क्रांति’ आंदोलन से अपने सफर की शुरुआत की।
- आपातकाल (Emergency): 1974-77 के दौरान वह ‘मीसा’ (MISA) के तहत जेल भी गए।
- पहली चुनावी जीत: शुरुआती हार के बाद, वह 1985 में पहली बार नालंदा की हरनौत सीट से बिहार विधानसभा के सदस्य (MLA) चुने गए।
राष्ट्रीय राजनीति और केंद्र में भूमिका (1989 – 2004)
- लोकसभा सफर: वह पहली बार 1989 में नौवीं लोकसभा के सदस्य बने और कुल 6 बार सांसद रहे।
- केंद्रीय मंत्री: अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में उन्होंने रेल मंत्री, कृषि मंत्री और भूतल परिवहन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया।
- पार्टी गठन: 1994 में उन्होंने जॉर्ज फर्नांडीस के साथ मिलकर ‘समता पार्टी’ की नींव रखी, जो बाद में जनता दल (यूनाइटेड) बनी।
बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में सफर (2000 – 2026)
नीतीश कुमार ने कुल 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जो एक भारतीय रिकॉर्ड है:
- पहला कार्यकाल (2000): वह पहली बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन बहुमत की कमी के कारण केवल 7 दिन ही पद पर रहे।
- सुशासन का दौर (2005 – 2013): 2005 में बीजेपी (NDA) के साथ पूर्ण बहुमत पाकर सत्ता में आए और ‘सुशासन बाबू’ के रूप में पहचान बनाई।
- गठबंधन और बदलाव: 2013 में उन्होंने बीजेपी से नाता तोड़ा, फिर 2015 में आरजेडी (RJD) के साथ मिलकर ‘महागठबंधन’ सरकार बनाई। 2017 में वह फिर से पाला बदलकर एनडीए (NDA) में शामिल हो गए।
- हालिया कार्यकाल: 2022 में फिर से आरजेडी के साथ गए, लेकिन जनवरी 2024 में वापस बीजेपी (NDA) के साथ लौट आए और 2025 के चुनाव के बाद 20 नवंबर 2025 को 10वीं बार मुख्यमंत्री बने।
- राज्यसभा प्रस्थान: मार्च 2026 में नीतीश कुमार ने राज्य की सक्रिय राजनीति से हटने का फैसला किया और राज्यसभा सांसद के रूप में निर्वाचित होकर केंद्र की राजनीति का रुख किया है।
“बिहार की राजनीति के एक बड़े अध्याय का आज समापन हो गया है। जेपी आंदोलन से उपजा वो चेहरा, जिसने सुशासन के दम पर सत्ता के शिखर तक का सफर तय किया, अब दिल्ली की दहलीज पर अपनी नई पारी शुरू करने जा रहा है। मुख्यमंत्री के तौर पर 10 बार शपथ लेने का वो रिकॉर्ड अब इतिहास के पन्नों में दर्ज है। बिहार की सियासत में नीतीश कुमार की जगह कोई भर पाएगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा। सावधान नेशन न्यूज ।”