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बिहार में रेलवे फाटक का जाम होगा इतिहास! 22 जिलों में बनेंगे 141 नए ओवरब्रिज, रेल मंत्री को भेजा गया प्रस्ताव।

बिहार में यातायात और बुनियादी ढांचे के विकास को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। राज्य के 22 जिलों में रेल यात्रा और सड़क परिवहन की तस्वीर बदलने वाली है। बिहार सरकार ने राज्य में ट्रैफिक की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 141 नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के निर्माण का एक विशाल खाका तैयार किया है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर बिहार के पथ निर्माण विभाग ने पूरी तैयारी कर ली है और केंद्र सरकार से सहयोग के लिए रेल मंत्री को औपचारिक पत्र भी भेज दिया गया है। आइए इस पूरी योजना को विस्तार से समझते हैं:

बिहार में ट्रैफिक जाम: एक पुरानी समस्या का समाधान
बिहार के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में रेलवे क्रॉसिंग (रेलवे फाटक) ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा कारण रहे हैं। जब भी कोई ट्रेन गुजरती है, फाटक बंद होने के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इससे न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं (जैसे एम्बुलेंस) को भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। 141 नए ROB बनने से यह समस्या इतिहास बन जाएगी।

जिलों को मिलेगा सीधा लाभ
इस योजना को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि इसका प्रभाव पूरे बिहार पर पड़े। राज्य के 22 जिलों को इसके तहत चिन्हित किया गया है। इनमें प्रमुख रूप से पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, रोहतास, भोजपुर और सारण जैसे जिले शामिल हैं। इन जिलों में उन क्रॉसिंग्स को चुना गया है जहाँ ‘ट्रेन व्हीकल यूनिट’ (TVU) की संख्या अधिक है, यानी जहाँ से ट्रेनों और सड़क वाहनों का आवागमन बहुत ज्यादा होता है।

रेल मंत्री को पत्र और लागत का बंटवारा
बिहार सरकार के पथ निर्माण विभाग ने इस परियोजना की वित्तीय संरचना को लेकर रेल मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। आमतौर पर ROB के निर्माण में होने वाले खर्च को केंद्र (रेलवे) और राज्य सरकार आपस में बांटते हैं।
लागत साझाकरण: बिहार सरकार ने 50:50 के अनुपात में राशि खर्च करने का प्रस्ताव दिया है।
भूमि अधिग्रहण: जमीन अधिग्रहण की पूरी जिम्मेदारी और उसका खर्च राज्य सरकार वहन करने को तैयार है, ताकि काम में कोई देरी न हो।

गतीशक्ति मिशन और सात निश्चय-2 का संगम
यह परियोजना केंद्र सरकार के पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान और बिहार सरकार के सात निश्चय-2 सुलभ संपर्कता का एक बेहतरीन उदाहरण है।
कनेक्टिविटी: इन पुलों के बनने से राज्य के सुदूर इलाकों की कनेक्टिविटी जिला मुख्यालयों और राजधानी पटना से बेहतर हो जाएगी।
लॉजिस्टिक्स में सुधार: माल ढोने वाले ट्रकों को अब घंटों फाटक खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, जिससे व्यापारिक लागत में कमी आएगी।

तकनीकी और आधुनिक निर्माण
प्रस्तावित 141 ROB केवल साधारण पुल नहीं होंगे। इन्हें आधुनिक इंजीनियरिंग मानकों के अनुसार बनाया जाएगा:
डबल लेन और फोर लेन:जहां यातायात का दबाव अधिक है, वहां फोर लेन ROB बनाए जाएंगे।
फुटपाथ: पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए पुलों के किनारे फुटपाथ की व्यवस्था होगी।
लाइटिंग और सुरक्षा:रात के समय दुर्घटनाओं को रोकने के लिए हाई-मास्ट लाइट और आधुनिक साइनबोर्ड लगाए जाएंगे।

रेलवे के लिए भी फायदेमंद
यह परियोजना केवल सड़क यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है:-
ट्रेनों की रफ्तार:क्रॉसिंग खत्म होने से ट्रेनों को ‘कॉशन’ (धीमी गति) पर नहीं चलना पड़ेगा, जिससे ट्रेनों की समयबद्धता (Punctuality) में सुधार होगा।
दुर्घटनाओं में कमी: मानव रहित या व्यस्त फाटकों पर होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना शून्य हो जाएगी।
रखरखाव में आसानी: रेलवे को फाटकों पर तैनात कर्मचारियों (गेटमैन) और फाटकों के बार-बार होने वाले मेंटेनेंस से राहत मिलेगी।

रोजगार के नए अवसर
इतने बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य शुरू होने से राज्य में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। निर्माण सामग्री (सीमेंट, स्टील) की मांग बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर इंजीनियरिंग और मजदूरी के क्षेत्र में अवसर पैदा होंगे।

आगे की राह: कब शुरू होगा काम?
फिलहाल यह प्रस्ताव रेल मंत्रालय के पास विचारधीन है। जैसे ही केंद्र सरकार की ओर से हरी झंडी मिलती है, निम्नलिखित प्रक्रियाएं शुरू होंगी:
DPR तैयार करना: प्रत्येक ब्रिज के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Detailed Project Report) बनाई जाएगी।
जमीन का सर्वे: स्थल निरीक्षण कर जमीन का सीमांकन किया जाएगा।
टेंडर प्रक्रिया: निर्माण कंपनियों को काम सौंपने के लिए निविदाएं निकाली जाएंगी।

निष्कर्ष
141 नए ROB का यह प्रस्ताव बिहार के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यदि यह योजना समय पर धरातल पर उतरती है, तो बिहार के 22 जिलों के करोड़ों लोगों का सफर न केवल सुगम होगा, बल्कि राज्य की आर्थिक प्रगति की रफ्तार भी तेज होगी। यह खबर उन सभी लोगों के लिए राहत भरी है जो रोज़ाना रेलवे फाटकों पर अपना कीमती समय गँवाते हैं।

बिहार सरकार की यह सक्रियता दिखाती है कि अब ध्यान केवल सड़क बनाने पर नहीं, बल्कि ‘बाधारहित सड़क’ (Barrier-free roads) बनाने पर है।

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