मध्य अफ्रीका में इबोला वायरस के नए प्रकोप ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। यह संक्रमण मुख्य रूप से Democratic Republic of the Congo और पड़ोसी देश Uganda में फैल रहा है। इस बार वायरस का दुर्लभ “बुंडीबुग्यो स्ट्रेन” सामने आया है, जिसे पहले की तुलना में अधिक खतरनाक माना जा रहा है।
World Health Organization (WHO) ने स्थिति को “Public Health Emergency of International Concern” घोषित कर दिया है। WHO के अनुसार सैकड़ों संदिग्ध मामले और कई मौतें सामने आ चुकी हैं। अधिकारियों का कहना है कि वायरस कई हफ्तों तक चुपचाप फैलता रहा, जिससे इसे रोकना और कठिन हो गया।
दुनिया क्यों चिंतित है?
विशेषज्ञों के मुताबिक इबोला, COVID-19 की तरह तेजी से हवा में नहीं फैलता, लेकिन यह दुनिया के सबसे घातक वायरसों में से एक है। इसके मुख्य लक्षण हैं:-
तेज बुखार
अत्यधिक कमजोरी
उल्टी और दस्त
शरीर के अंदर और बाहर रक्तस्राव
कुछ प्रकोपों में इसकी मृत्यु दर 50% से भी अधिक रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों को डर है कि कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था, संघर्ष वाले क्षेत्र और देर से पहचान होने के कारण यह संक्रमण अन्य इलाकों तक फैल सकता है।
कई देशों ने बढ़ाई सतर्कता
संक्रमण के खतरे को देखते हुए कई देशों ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं:
एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग
यात्रा सलाह जारी
आइसोलेशन वार्ड की तैयारी
मेडिकल आपूर्ति का भंडारण
Saudi Arabia ने भी हज यात्रा के दौरान सुरक्षा बढ़ा दी है, क्योंकि लाखों अंतरराष्ट्रीय यात्री वहां पहुंचने वाले हैं।
वैक्सीन को लेकर बढ़ी चिंता
WHO अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा इबोला वैक्सीन इस नए Bundibugyo स्ट्रेन पर पूरी तरह असरदार नहीं हो सकती। दुनिया भर की रिसर्च लैब और दवा कंपनियां नई वैक्सीन विकसित करने में जुटी हैं, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार प्रभावी वैक्सीन आने में अभी 6 से 9 महीने लग सकते हैं।
WHO ने कांगो में खतरे का स्तर “बहुत उच्च” बताया है, हालांकि फिलहाल वैश्विक स्तर पर स्थिति नियंत्रण में मानी जा रही है।
राजनीतिक और आर्थिक असर
इस प्रकोप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी असर डालना शुरू कर दिया है:
कई देश सीमा नियंत्रण सख्त करने पर विचार कर रहे हैं
सहायता एजेंसियां आपातकालीन फंड की मांग कर रही हैं
सरकारों को डर है कि COVID-19 जैसी आर्थिक मंदी दोबारा न आ जाए
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अफवाहें और लोगों का अविश्वास स्थिति को और खराब कर सकता है। कुछ प्रभावित इलाकों में उपचार केंद्रों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।
वर्तमान स्थिति
फिलहाल स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि अभी वैश्विक महामारी जैसे संकेत नहीं हैं, लेकिन तेजी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है। संक्रमित लोगों की पहचान, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और क्वारंटीन सिस्टम को तेजी से बढ़ाया जा रहा है ताकि वायरस को समय रहते रोका जा सके।
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