Mount Everest पर 20 मई 2026 को इतिहास रच दिया गया। दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर एक ही दिन में रिकॉर्ड 274 पर्वतारोहियों ने सफलतापूर्वक पहुंचकर नया विश्व रिकॉर्ड बना दिया। यह अब तक का सबसे बड़ा एकदिवसीय समिट रिकॉर्ड माना जा रहा है। नेपाल की ओर से चढ़ाई करने वाले पर्वतारोहियों ने साफ मौसम का फायदा उठाया। विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल चीन की ओर से एवरेस्ट रूट बंद रहने के कारण अधिकतर टीमें नेपाल वाले रास्ते से चढ़ाई कर रही थीं। इसी वजह से एवरेस्ट पर भारी भीड़ देखने को मिली। इस रिकॉर्ड के साथ ही मशहूर शेरपा पर्वतारोही Kami Rita Sherpa ने भी अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 32वीं बार एवरेस्ट फतह किया। उन्हें दुनिया में सबसे ज्यादा बार एवरेस्ट पर चढ़ने वाला इंसान माना जाता है।
वहीं महिला पर्वतारोही Lhakpa Sherpa ने 11वीं बार एवरेस्ट पर पहुंचकर महिलाओं में सबसे ज्यादा समिट का रिकॉर्ड और मजबूत कर दिया।
रिकॉर्ड संख्या में पर्वतारोहियों के पहुंचने से एवरेस्ट के “डेथ ज़ोन” में लंबी कतारें भी देखने को मिलीं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जरूरत से ज्यादा भीड़ पर्वतारोहियों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन सकती है।
नेपाल सरकार ने 2026 सीजन के लिए करीब 494 क्लाइम्बिंग परमिट जारी किए थे, जिनकी कीमत लगभग 15 हजार डॉलर प्रति व्यक्ति थी। एवरेस्ट पर बढ़ती भीड़ और व्यवसायिकरण को लेकर अब फिर बहस शुरू हो गई है।
Mount Everest चढ़ने के लिए 2026 में नेपाल सरकार का एक क्लाइम्बिंग परमिट लगभग 15,000 अमेरिकी डॉलर (करीब ₹12.5–13 लाख भारतीय रुपये) है। यह फीस सिर्फ परमिट की होती है, पूरी यात्रा की नहीं।
इसके अलावा पर्वतारोहियों को कई अन्य खर्च भी करने पड़ते हैं:
शेरपा गाइड और सपोर्ट टीम
ऑक्सीजन सिलेंडर
क्लाइम्बिंग गियर
बेस कैंप सुविधा
इंश्योरेंस और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू
ट्रैवल और होटल खर्च
इन सभी को मिलाकर Mount Everest अभियान की कुल लागत आमतौर पर 45,000 डॉलर से 110,000 डॉलर (लगभग ₹38 लाख से ₹95 लाख+) तक पहुंच सकती है।
नेपाल सरकार ने 2025 के बाद फीस बढ़ाकर:
Spring season: $15,000
Autumn season: $7,500
Winter/Monsoon: $3,750
कर दी थी।
Mount Everest दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है, जिसकी ऊंचाई 8,849 मीटर मानी जाती है।
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