अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है। यह महीना लगभग हर तीन साल में एक बार आता है और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। वर्ष 2026 में अधिकमास के दौरान उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र — Vrindavan, Mathura और Barsana — में भक्ति, उत्सव और श्रद्धा का अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। इन दिनों यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।
ब्रज क्षेत्र में अधिकमास को भगवान श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष आराधना का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान और पूजा का फल कई गुना अधिक मिलता है। यही कारण है कि देश के अलग-अलग राज्यों से लोग ब्रज पहुंच रहे हैं। सुबह से ही मंदिरों में लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। सबसे अधिक भीड़ बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर, राधा रानी मंदिर और गोवर्धन परिक्रमा मार्ग पर देखी जा रही है।
इस बार अधिकमास की सबसे खास बात यह है कि ब्रज में कई त्योहारों की प्रतीकात्मक झलक एक साथ देखने को मिल रही है। कहीं होली जैसी फूलों की वर्षा हो रही है तो कहीं दीपों से मंदिर सजाए जा रहे हैं। कई मंदिरों में जन्माष्टमी और रासलीला की विशेष झांकियां भी तैयार की गई हैं। श्रद्धालु इसे “ब्रज का महाउत्सव” कह रहे हैं।वृंदावन के मंदिरों में इन दिनों सुबह-शाम विशेष भजन संध्या आयोजित की जा रही हैं। भक्त घंटों तक “राधे-राधे” और “श्याम नाम” का संकीर्तन कर रहे हैं। कई स्थानों पर भागवत कथा और सत्संग का आयोजन भी किया जा रहा है। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय दिखाई देता है। गोवर्धन परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। लोग नंगे पैर कई किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु दंडवत परिक्रमा भी कर रहे हैं, जिसे कठिन धार्मिक साधना माना जाता है। प्रशासन के अनुसार अधिकमास के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गोवर्धन पहुंच रहे हैं।
बरसाना और नंदगांव में भी विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। राधा रानी मंदिर में भजन, संकीर्तन और विशेष श्रृंगार दर्शन श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। बरसाना की गलियों में “राधे-राधे” की गूंज लगातार सुनाई दे रही है। कई श्रद्धालु यहां रुककर पूरा अधिकमास बिताने का निर्णय भी ले रहे हैं।
वृंदावन के मंदिरों में इन दिनों सुबह-शाम विशेष भजन संध्या आयोजित की जा रही हैं। भक्त घंटों तक “राधे-राधे” और “श्याम नाम” का संकीर्तन कर रहे हैं। कई स्थानों पर भागवत कथा और सत्संग का आयोजन भी किया जा रहा है। मंदिरों को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय दिखाई देता है। गोवर्धन परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। लोग नंगे पैर कई किलोमीटर की परिक्रमा कर अपनी श्रद्धा व्यक्त कर रहे हैं। कुछ श्रद्धालु दंडवत परिक्रमा भी कर रहे हैं, जिसे कठिन धार्मिक साधना माना जाता है। प्रशासन के अनुसार अधिकमास के दौरान प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु गोवर्धन पहुंच रहे हैं।
बरसाना और नंदगांव में भी विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। राधा रानी मंदिर में भजन, संकीर्तन और विशेष श्रृंगार दर्शन श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। बरसाना की गलियों में “राधे-राधे” की गूंज लगातार सुनाई दे रही है। कई श्रद्धालु यहां रुककर पूरा अधिकमास बिताने का निर्णय भी ले रहे हैं।
धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ स्थानीय व्यापार पर भी इसका बड़ा असर पड़ा है। होटल, धर्मशाला, ई-रिक्शा, फूल-माला और प्रसाद बेचने वाले दुकानदारों की आमदनी बढ़ गई है। बाजारों में रौनक दिखाई दे रही है। हालांकि भारी भीड़ के कारण ट्रैफिक और गर्मी से लोगों को कुछ परेशानियों का सामना भी करना पड़ रहा है।
प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। प्रमुख मंदिरों और परिक्रमा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। स्वास्थ्य शिविर और पानी की व्यवस्था भी की गई है ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो। कई स्वयंसेवी संस्थाएं भी लोगों को मुफ्त जल और भोजन उपलब्ध करा रही हैं।
धर्म विशेषज्ञों के अनुसार अधिकमास आत्मचिंतन, भक्ति और संयम का महीना माना जाता है। इस दौरान लोग साधारण जीवन अपनाने, दान करने और धार्मिक कार्यों में समय देने का प्रयास करते हैं। ब्रज में इसका प्रभाव सबसे अधिक दिखाई देता है क्योंकि यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। कुल मिलाकर, अधिकमास ने वृंदावन, मथुरा और बरसाना के वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया है। मंदिरों की घंटियां, भजन-कीर्तन, श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्सवों की झलक पूरे ब्रज को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर रही है। यही कारण है कि हर अधिकमास में लाखों लोग ब्रज आने की इच्छा रखते हैं और इसे जीवन का विशेष धार्मिक अनुभव मानते हैं।
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