सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 23 जून 2026
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने RTI (सूचना का अधिकार) से जुड़े नए नियमों को वापस लेने की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर महाराष्ट्र सरकार नए RTI नियमों को वापस नहीं लेती है तो वह 5 जुलाई 2026 से अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
RTI कानून साल 2005 में लागू हुआ था। इसका उद्देश्य आम नागरिकों को सरकार के कामकाज, फैसलों और सरकारी रिकॉर्ड की जानकारी पाने का अधिकार देना था। इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मजबूत हथियार माना गया। Right to Information Act, 2005 के जरिए कोई भी नागरिक सरकारी विभागों से जानकारी मांग सकता है।
हाल के बदलावों को लेकर RTI कार्यकर्ताओं और अन्ना हजारे ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि नए नियमों से आम लोगों के लिए जानकारी हासिल करना कठिन हो सकता है और पारदर्शिता कमजोर हो सकती है।
अन्ना हजारे को आपत्ति क्यों है?
अन्ना हजारे का कहना है कि RTI जनता की ताकत है। अगर इसके नियम कमजोर किए गए तो:
सरकारी कामकाज में पारदर्शिता कम होगी
भ्रष्टाचार उजागर करना मुश्किल होगा
आम नागरिकों की आवाज कमजोर हो सकती है
उन्होंने सरकार से अपील की है कि वह इन नियमों को वापस ले और RTI की मूल भावना को बचाए।
कौन से बदलावों पर विवाद है?
RTI से जुड़े बदलावों में खासकर निजी जानकारी (personal information) को लेकर नियमों पर बहस हुई है। आलोचकों का कहना है कि “व्यक्तिगत जानकारी” के नाम पर कई ऐसी सूचनाएं भी रोकी जा सकती हैं जो जनता के हित से जुड़ी हों।
सरकार की तरफ से तर्क दिया जाता है कि नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा जरूरी है। वहीं RTI समर्थकों का कहना है कि पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन जरूरी है।
अन्ना हजारे ने कब घोषणा की?
रिपोर्टों के अनुसार अन्ना हजारे ने 23 जून 2026 को यह चेतावनी दी कि अगर नियम वापस नहीं लिए गए तो वह 5 जुलाई से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा है।
क्या यह पहली बार है जब अन्ना RTI के मुद्दे पर बोले हैं?
नहीं। अन्ना हजारे पहले भी RTI को लेकर आवाज उठा चुके हैं। 2017 में भी उन्होंने RTI कानून में बदलावों का विरोध किया था और कहा था कि कानून को कमजोर करना जनता के अधिकार को कमजोर करना होगा।
2019 में भी RTI संशोधन को लेकर उन्होंने सरकार की आलोचना की थी और कहा था कि इससे सूचना आयोगों की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।
जनता और विशेषज्ञों की राय
इस मुद्दे पर राय अलग-अलग है।
कुछ लोगों का मानना है कि RTI में बदलाव जरूरी हैं ताकि निजी जानकारी की सुरक्षा हो सके।
वहीं RTI कार्यकर्ता मानते हैं कि अगर नियम बहुत सख्त हुए तो भ्रष्टाचार और सरकारी फैसलों की जांच मुश्किल हो जाएगी।
निष्कर्ष
अन्ना हजारे का यह कदम RTI की ताकत और सरकारी पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस शुरू कर सकता है। अभी यह देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर क्या फैसला लेती है और क्या आंदोलन की नौबत आती है।
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