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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कुनो चीता रिजर्व दौरा: क्यों खास रहा यह दौरा, कब गईं और क्या है इसका महत्व?

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नई दिल्ली, 23 जून 2026

भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित Kuno National Park (कुनो राष्ट्रीय उद्यान) का दौरा किया। यह दौरा भारत के बहुचर्चित प्रोजेक्ट चीता और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रपति का यह दौरा 22 जून 2026 को हुआ, जो उनके मध्य प्रदेश दौरे का हिस्सा था।

राष्ट्रपति मुर्मू कब पहुंचीं कुनो?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपने पांच दिवसीय दौरे के दौरान 21 जून की शाम कुनो क्षेत्र पहुंचीं और 22 जून की सुबह उन्होंने राष्ट्रीय उद्यान का भ्रमण किया। इससे पहले उन्होंने मध्य प्रदेश में योग दिवस कार्यक्रमों और अन्य कार्यक्रमों में हिस्सा लिया था।

कुनो पहुंचने के बाद राष्ट्रपति ने चीता संरक्षण से जुड़े अधिकारियों, वनकर्मियों और स्थानीय लोगों से बातचीत की। उन्होंने चीतों के व्यवहार, संरक्षण व्यवस्था और स्थानीय समुदाय की भूमिका के बारे में जानकारी ली।

क्यों खास है राष्ट्रपति का कुनो दौरा?
कुनो राष्ट्रीय उद्यान आज भारत के लिए सिर्फ एक जंगल नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक वन्यजीव पुनर्जीवन परियोजना का केंद्र है। भारत में चीते दशकों पहले विलुप्त हो गए थे। लंबे अंतराल के बाद उन्हें वापस लाने के लिए प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया।

इस दौरे का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि:


1. भारत में चीता वापसी की समीक्षा
भारत ने 2022 में नामीबिया से चीतों को लाकर कुनो में छोड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए। यह दुनिया की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण परियोजनाओं में से एक मानी गई।

राष्ट्रपति का दौरा इस बात का संकेत है कि देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद भी इस संरक्षण अभियान को महत्व दे रहा है।


2. चीतों की बढ़ती संख्या और प्रजनन सफलता
कुनो में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक यह रही कि भारत में चीतों ने बच्चे पैदा किए। इससे यह उम्मीद बढ़ी कि चीते भारतीय वातावरण में खुद को ढाल सकते हैं।

वन विभाग के अनुसार भारत में चीता संरक्षण की दिशा में जन्मे शावक इस परियोजना की सफलता का महत्वपूर्ण संकेत हैं।

3. चीता मित्रों से मुलाकात
राष्ट्रपति ने स्थानीय स्तर पर बनाए गए चीता मित्रों से भी बातचीत की। इसका उद्देश्य यह समझना था कि गांवों में रहने वाले लोगों और वन्यजीवों के बीच तालमेल कैसा है।

चीता परियोजना की सफलता केवल जंगल तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों का सहयोग भी जरूरी है।


कुनो में कितने चीते हैं?
कुनो में अफ्रीकी चीतों को बसाने की योजना के तहत नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बाद में बोत्सवाना से भी चीतों को लाने की प्रक्रिया हुई।

2025-26 तक कुनो में चीतों की संख्या में जन्म के कारण बढ़ोतरी देखी गई और यह परियोजना दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी।

प्रोजेक्ट चीता की कहानी
भारत में आखिरी जंगली चीते के खत्म होने के बाद लंबे समय तक देश में चीता नहीं था। सरकार ने वैज्ञानिक अध्ययन के बाद चीते वापस लाने की योजना बनाई।
सितंबर 2022 में नामीबिया से आए 8 चीतों को कुनो में छोड़ा गया। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीते लाए गए।

इस परियोजना का उद्देश्य सिर्फ संख्या बढ़ाना नहीं है, बल्कि भारत में एक ऐसा पारिस्थितिक तंत्र तैयार करना है जहां चीते प्राकृतिक रूप से रह सकें।


क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि परियोजना को सफलता मिली है, लेकिन चुनौतियां भी हैं।
चीतों के लिए बड़ा और सुरक्षित क्षेत्र जरूरी है।
मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकना जरूरी है।
सड़क, जंगल सीमा और अन्य खतरों से चीतों की सुरक्षा करनी होगी।

कुछ चीते कुनो से बाहर भी घूमते हुए पाए गए हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनके लिए बड़े क्षेत्र की जरूरत हो सकती है।

लोगों की राय क्या है?
वन्यजीव प्रेमियों का मानना है कि चीते की वापसी भारत के प्राकृतिक इतिहास के लिए बड़ी उपलब्धि है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक सफलता के लिए केवल चीते लाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका प्राकृतिक आवास, शिकार उपलब्धता और स्थानीय लोगों का सहयोग भी जरूरी है।
स्थानीय लोग भी इस परियोजना से पर्यटन और रोजगार की उम्मीद रखते हैं, लेकिन उन्हें वन्यजीवों के साथ सुरक्षित सह-अस्तित्व की व्यवस्था चाहिए।


निष्कर्ष
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का कुनो राष्ट्रीय उद्यान दौरा केवल एक औपचारिक यात्रा नहीं बल्कि भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर महत्व देने वाला कदम है। यह दौरा बताता है कि चीता संरक्षण अब भारत की पर्यावरण नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
कुनो आने वाले वर्षों में यह तय करेगा कि भारत में चीते फिर से अपनी पुरानी जगह बना पाएंगे या नहीं।

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