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सावधान नेशन न्यूज़

नागालैंड के बेटे होकाटो होटोजे सेमा बने दुनिया के नंबर-1 पैरा शॉटपुट खिलाड़ी, लैंडमाइन विस्फोट से लेकर विश्व शिखर तक का प्रेरणादायक सफर

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026

नागालैंड के होकाटो होटोजे सेमा ने रचा इतिहास
भारत के लिए वर्ष 2026 खेल जगत में कई बड़ी उपलब्धियों का गवाह बन रहा है। इन्हीं उपलब्धियों में एक नाम है Hokato Hotozhe Sema, जिन्होंने विश्व पैरा एथलेटिक्स की पुरुषों की शॉट पुट F57 श्रेणी में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि पूरे भारत और विशेष रूप से नागालैंड के लिए गर्व का क्षण है।
यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि होकाटो का जीवन कभी आसान नहीं रहा। भारतीय सेना में सेवा के दौरान हुए एक भीषण लैंडमाइन विस्फोट में उन्होंने अपना एक पैर खो दिया था। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के दम पर दुनिया के शीर्ष पैरा एथलीट बन गए।


कब और कैसे मिली यह उपलब्धि?
विश्व पैरा एथलेटिक्स द्वारा जारी नवीनतम रैंकिंग में होकाटो होटोजे सेमा को पुरुषों की शॉट पुट F57 श्रेणी में विश्व नंबर-1 स्थान प्राप्त हुआ। यह रैंकिंग उनके पिछले महीनों के शानदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छे परिणामों के आधार पर जारी की गई। इसी उपलब्धि के साथ वे इस श्रेणी में दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बन गए।
भारत के खेल प्रेमियों और नागालैंड के लोगों ने इस उपलब्धि का गर्मजोशी से स्वागत किया।


होकाटो सेमा कौन हैं?
होकाटो होटोजे सेमा नागालैंड के रहने वाले हैं। वे भारतीय सेना में सुबेदार के पद पर कार्यरत हैं। बचपन से ही वे अनुशासित और मेहनती स्वभाव के थे। सेना में भर्ती होकर उन्होंने देश सेवा का सपना पूरा किया।
लेकिन किस्मत ने उनके सामने ऐसी चुनौती रखी जिसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी।


जब एक हादसे ने बदल दी जिंदगी
वर्ष 2002 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान गश्त करते समय एक लैंडमाइन विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में होकाटो गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका बायाँ पैर घुटने के नीचे से काटना पड़ा।
किसी सैनिक के लिए यह केवल शारीरिक चोट नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी बेहद कठिन समय होता है। लंबे इलाज और पुनर्वास के दौरान उन्होंने कई चुनौतियों का सामना किया।
लेकिन उन्होंने खुद को टूटने नहीं दिया।


हार नहीं मानी, खेल को बनाया नई पहचान
इलाज के बाद उन्होंने पैरा खेलों की ओर कदम बढ़ाया। शुरुआत आसान नहीं थी। उन्हें कृत्रिम पैर के साथ जीवन जीना सीखना पड़ा और फिर नए सिरे से खेल प्रशिक्षण शुरू करना पड़ा।
उन्होंने शॉट पुट को अपना खेल चुना।
भारतीय सेना और प्रशिक्षकों ने उनका पूरा सहयोग किया। नियमित अभ्यास, फिटनेस और तकनीक पर लगातार काम करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनानी शुरू कर दी।


पेरिस पैरालंपिक में ऐतिहासिक कांस्य पदक
साल 2024 के 2024 Summer Paralympics में होकाटो ने पुरुषों की शॉट पुट F57 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
वे नागालैंड के पहले पैरालंपिक पदक विजेता बने।
उनके इस पदक ने पूरे पूर्वोत्तर भारत के खिलाड़ियों को नई प्रेरणा दी कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद विश्व स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है।


विश्व नंबर-1 बनने तक का सफर
पैरालंपिक पदक के बाद उन्होंने अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया।
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नियमित भागीदारी।
तकनीकी सुधार और फिटनेस पर विशेष ध्यान।
लगातार अंक अर्जित कर विश्व रैंकिंग में ऊपर पहुँचना।
इन्हीं उपलब्धियों के आधार पर वे विश्व नंबर-1 बने।


Ati Vishisht Seva Medal से सम्मानित
होकाटो सेमा को उनकी सैन्य सेवा और खेल उपलब्धियों के लिए Ati Vishisht Seva Medal (AVSM) से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाले पहले भारतीय पैरालंपियन माने जाते हैं। यह सम्मान उनकी दोहरी पहचान—एक सैनिक और एक विश्वस्तरीय खिलाड़ी—को दर्शाता है।


परिवार की प्रतिक्रिया
होकाटो के परिवार ने उनकी सफलता को वर्षों के संघर्ष का परिणाम बताया। परिवार के सदस्यों ने कई अवसरों पर कहा कि हादसे के बाद का समय बहुत कठिन था, लेकिन होकाटो ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी।
परिवार का कहना है कि आज उनकी सफलता केवल उनके परिवार की नहीं बल्कि पूरे नागालैंड की सफलता है।


नागालैंड में खुशी की लहर
विश्व नंबर-1 बनने की खबर आते ही नागालैंड में खुशी का माहौल बन गया।
राज्य सरकार, खेल संगठनों और आम लोगों ने उन्हें बधाई दी। सोशल मीडिया पर हजारों लोगों ने उनकी उपलब्धि को भारत के लिए गौरव का क्षण बताया।
कई युवाओं ने लिखा कि होकाटो की कहानी उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।


भारतीय सेना की प्रतिक्रिया
भारतीय सेना ने भी होकाटो की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया। सेना ने कहा कि वे साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के प्रतीक हैं। उनका जीवन यह दिखाता है कि एक सैनिक कठिन से कठिन परिस्थिति में भी देश का नाम रोशन कर सकता है।
लोगों की प्रतिक्रिया


देशभर से लोगों ने उन्हें बधाई दी।
कई खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने कहा कि होकाटो की सफलता केवल एक पदक या रैंकिंग नहीं, बल्कि उन लाखों दिव्यांग लोगों के लिए उम्मीद की किरण है जो जीवन में किसी कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों ने उन्हें “Real Hero“, “Iron Man of India” और “Pride of Nagaland” जैसे शब्दों से सम्मानित किया।


F57 श्रेणी क्या होती है?
F57 पैरा एथलेटिक्स की फील्ड स्पर्धाओं की एक श्रेणी है, जिसमें ऐसे खिलाड़ी भाग लेते हैं जिनके निचले अंगों में शारीरिक अक्षमता होती है। इस वर्गीकरण का उद्देश्य समान कार्यात्मक क्षमता वाले खिलाड़ियों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।


युवाओं के लिए प्रेरणा
होकाटो सेमा की कहानी बताती है कि सफलता केवल शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर मेहनत पर भी निर्भर करती है।
उन्होंने साबित किया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो तो कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती।


निष्कर्ष
होकाटो होटोजे सेमा का जीवन संघर्ष, साहस और सफलता की मिसाल है। एक सैनिक से विश्वस्तरीय पैरा एथलीट बनने तक का उनका सफर असाधारण है। लैंडमाइन विस्फोट में पैर गंवाने के बाद अधिकांश लोग निराश हो सकते थे, लेकिन उन्होंने उसी कठिनाई को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया।


आज विश्व नंबर-1 बनकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे तो वह दुनिया की सबसे ऊँची मंजिल भी हासिल कर सकता है। उनकी उपलब्धि नागालैंड, भारतीय सेना और पूरे देश के लिए गर्व का विषय है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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