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सावधान नेशन न्यूज़

मेलबर्न में मोदी का कमाल: ऑस्ट्रेलिया भारत को देगा यूरेनियम का खजाना

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तरुण कश्यप

मेलबर्न/नई दिल्ली:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इंडोनेशिया दौरे के बाद ऑस्ट्रेलिया आगमन पर भारत को एक बड़ी रणनीतिक और कूटनीतिक कामयाबी मिली है। मेलबर्न में आयोजित तीसरे ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेतृत्व शिखर सम्मेलन’ के दौरान दोनों देशों ने प्रशासनिक व्यवस्था (Administrative Arrangement) पर हस्ताक्षर कर ऑस्ट्रेलिया से भारत को लंबे समय तक यूरेनियम निर्यात करने का रास्ता पूरी तरह साफ कर दिया है।

2014 की नींव पर लगी आखिरी मुहर

भारत और ऑस्ट्रेलिया ने साल 2014 में नागरिक परमाणु सहयोग समझौता (Civil Nuclear Cooperation Agreement) किया था। हालांकि, कई कानूनी अड़चनों, सुरक्षा चिंताओं और तकनीकी प्रक्रियाओं के कारण व्यावसायिक स्तर पर इसकी बड़े पैमाने पर आपूर्ति रुकी हुई थी। अब, इस नए प्रशासनिक समझौते के बाद सभी बाधाएं दूर हो गई हैं और दोनों देशों के बीच यूरेनियम व्यापार का मैकेनिज्म पूरी तरह एक्टिव हो गया है।

  सिर्फ “शांतिपूर्ण उद्देश्यों” के लिए होगा इस्तेमाल

दोनों देशों द्वारा जारी संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया है कि इस यूरेनियम का निर्यात विशेष रूप से शांतिपूर्ण उद्देश्यों (Civilian/Peaceful Purposes) यानी परमाणु बिजलीघरों में ईंधन के रूप में किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों के तहत की जाएगी।

भारत के लिए क्यों जरूरी है यह डील?

  • 2047 का महालक्ष्य: भारत ने साल 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को मौजूदा ~8 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारी मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाले यूरेनियम की आवश्यकता है।
  • ऊर्जा सुरक्षा और क्लीन एनर्जी: डिजिटल इंडिया, उद्योगों और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के विस्तार के कारण देश में बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है। कोयले पर निर्भरता कम करने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में यह यूरेनियम भारत के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।
  • ऑस्ट्रेलिया का समृद्ध भंडार: ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का लगभग 28% से 32% यूरेनियम भंडार है। दिलचस्प बात यह है कि ऑस्ट्रेलिया खुद परमाणु बिजली का उपयोग नहीं करता, वह केवल इसका निर्यात करता है।

चीन और पाकिस्तान को झटका, भारत बनेगा ‘ग्लोबल फैक्टरी’

जानकारों के मुताबिक, इस डील का बड़ा रणनीतिक महत्व भी है। चीन कई महत्वपूर्ण खनिजों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स के मामले में दुनिया को ब्लैकमेल करता रहा है। ऑस्ट्रेलिया से मिलने वाली ऊर्जा सुरक्षा के दम पर भारत अपनी इंडस्ट्रियल ग्रोथ को तेज कर सकेगा। इसके साथ ही, भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा सहयोग (Defence Partnership) और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी मजबूत होने से पड़ोसियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

यूरेनियम के अलावा और क्या हुआ?

पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बनीज के बीच रक्षा, साइबर तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सप्लाई चेन को लेकर कुल 18 महत्वपूर्ण नतीजों पर सहमति बनी है। इसमें भारत के अंतरिक्ष प्रोजेक्ट्स को सपोर्ट करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के कोकोस कीलिंग द्वीप पर एक अस्थायी स्पेस ट्रैकिंग टर्मिनल बनाने का फैसला भी शामिल है।

इस डील से भारत को होने वाले फायदों की पूरी डिटेल नीचे दी गई है:

1. 100 गीगावाट (GW) न्यूक्लियर मिशन को मिलेगी रफ्तार

  • 10 गुना से ज्यादा क्षमता विस्तार: भारत की मौजूदा परमाणु ऊर्जा क्षमता केवल ~8 गीगावाट (GW) है, जिसे साल 2047 तक बढ़ाकर 100 गीगावाट करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बड़े लक्ष्य को पूरा करने के लिए असीमित और बिना रुकावट ईंधन की जरूरत थी, जो अब ऑस्ट्रेलिया पूरी करेगा।
  • $300 बिलियन का मार्केट: इस डील के बाद भारत में करीब 300 अरब डॉलर (लगभग ₹25 लाख करोड़) का विशाल न्यूक्लियर एनर्जी मार्केट खड़ा होगा, जिससे घरेलू इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों को भारी काम मिलेगा।

2. दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडार तक सीधी पहुंच

  • 28% वैश्विक खजाने पर हक: ऑस्ट्रेलिया के पास दुनिया का लगभग 28% से 32% ज्ञात यूरेनियम भंडार है। इस समझौते के बाद भारत को एक ऐसा भरोसेमंद साझेदार मिल गया है जिसके पास ईंधन की कभी कमी नहीं होगी।
  • परमाणु रिएक्टरों के लिए ईंधन: भारत वर्तमान में 24 परमाणु रिएक्टर संचालित कर रहा है और 18 नए रिएक्टरों के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है। इन सभी नए और पुराने सिविलियन रिएक्टरों को अब पूरी क्षमता के साथ चलाया जा सकेगा।

3. ‘क्लीन एनर्जी’ और प्रदूषण से मुक्ति

  • 6 करोड़ घरों को मिलेगी ग्रीन बिजली: 100 गीगावाट न्यूक्लियर क्षमता से भारत के लगभग 6 करोड़ घरों को चौबीसों घंटे बिना प्रदूषण वाली बिजली (Clean Electricity) दी जा सकेगी।
  • कोयले पर निर्भरता होगी कम: भारत अपनी बिजली का एक बड़ा हिस्सा कोयला जलाकर बनाता है, जिससे भारी कार्बन उत्सर्जन होता है। यूरेनियम मिलने से भारत अपने वैश्विक जलवायु लक्ष्यों (Net Zero Emission) को समय से पहले हासिल कर सकेगा।

4. चीन पर निर्भरता खत्म और ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा

  • क्रिटिकल मिनरल्स का कॉरिडोर: ऑस्ट्रेलिया केवल यूरेनियम ही नहीं, बल्कि लिथियम और कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स (Critical Minerals) का भी बड़ा स्रोत है। इस डील के साथ दोनों देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स कॉरिडोर और साइबर टेक्नोलॉजी पर भी साझेदारी की है।
  • EV और इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति: लिथियम और रेयर अर्थ एलिमेंट्स मिलने से भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी, मोबाइल, लैपटॉप और सेमीकंडक्टर का निर्माण तेज होगा, जिससे चीन की मोनोपॉली (दादागिरी) खत्म होगी।

5. रणनीतिक और रक्षा सहयोग में बढ़त (Geopolitical Edge)

  • हिंद-प्रशांत में दादागिरी पर लगाम: भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ‘क्वाड’ (Quad) गठबंधन के सदस्य हैं। यूरेनियम डील के साथ ही दोनों देशों ने एक नया डिफेंस डिक्लेरेशन (Joint Declaration on Defence) और समुद्री सुरक्षा रोडमैप भी जारी किया है।
  • सैन्य इंटरऑपरेबिलिटी: अब दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों और हवाई पट्टियों का इस्तेमाल कर सकेंगी, जिससे हिंद महासागर में चीन की नौसैनिक गतिविधियों को मजबूती से काउंटर किया जा सकेगा।

“इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते से जुड़ी हर बारीक अपडेट, ग्राउंड रिपोर्ट और एक्सपर्ट एनालिसिस सबसे पहले पढ़ने के लिए ‘सावधान नेशन न्यूज़’ के डिजिटल पोर्टल को फॉलो करें और इस महत्वपूर्ण जानकारी को अपने दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें।”

5 thoughts on “मेलबर्न में मोदी का कमाल: ऑस्ट्रेलिया भारत को देगा यूरेनियम का खजाना”

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