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सावधान नेशन न्यूज़

“रेसिंग कारों में भी इस्तेमाल होता है एथेनॉल?” हरदीप सिंह पुरी के बयान की पूरी सच्चाई, क्या आम लोगों की चिंताएं वाजिब

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 4 जुलाई 2026

हाल के दिनों में पेट्रोल में 20% एथेनॉल (E20) मिलाने को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri ने कहा कि “रेसिंग कारों में भी एथेनॉल का इस्तेमाल होता है। इससे एक्सेलेरेशन बढ़ता है और नॉकिंग कम होती है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि माइलेज में थोड़ी कमी आ सकती है।

क्या मंत्री का बयान पूरी तरह सही है?
हाँ, लेकिन इसका पूरा संदर्भ समझना जरूरी है।
दुनिया की कई मोटरस्पोर्ट प्रतियोगिताओं में एथेनॉल या एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग किया जाता है। इसकी वजह यह है कि एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर अधिक होता है, जिससे हाई-परफॉर्मेंस इंजन में नॉकिंग कम होती है और बेहतर एक्सेलेरेशन मिल सकता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर सामान्य कार में वही प्रभाव मिलेगा।
रेसिंग कारों के इंजन विशेष रूप से रेसिंग ईंधन के लिए डिज़ाइन किए जाते हैं। उनकी ट्यूनिंग, कंप्रेशन रेशियो, फ्यूल मैपिंग और रखरखाव सामान्य कारों से बिल्कुल अलग होता है। इसलिए रेसिंग कारों की तुलना सीधे रोजमर्रा की कारों से करना तकनीकी रूप से उचित नहीं माना जाता।


क्या E20 से माइलेज घटता है?
इस प्रश्न पर स्वयं मंत्री ने कहा कि माइलेज थोड़ा कम हो सकता है, हालांकि उनके अनुसार इसके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और ARAI के पहले के आकलनों के अनुसार E20 पर कई वाहनों में लगभग 1% से 6% तक माइलेज में कमी देखी जा सकती है, क्योंकि एथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम होती है।

क्या लोगों की शिकायतें झूठी हैं?
नहीं
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों में सैकड़ों वाहन मालिकों ने शिकायतें साझा की हैं। इनमें मुख्य रूप से ये बातें सामने आई हैं—
माइलेज कम होना।
इंजन की परफॉर्मेंस में बदलाव महसूस होना।
पुराने वाहनों में कुछ पार्ट्स के जल्दी घिसने की आशंका।
सभी पेट्रोल पंपों पर E20 मिलने से विकल्प खत्म होना।

हालांकि सोशल मीडिया पर आई हर शिकायत को वैज्ञानिक रूप से सत्यापित नहीं किया गया है। इसलिए केवल वायरल पोस्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि हर वाहन में यही समस्या होगी।


सरकार का क्या कहना है?
सरकार का कहना है कि—
E20 लागू करने से पहले SIAM और ARAI सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श किया गया।
बीमा कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि केवल E20 ईंधन इस्तेमाल करने से बीमा अमान्य नहीं होगा।
यदि भविष्य में E20 से अधिक मिश्रण (जैसे E25) लागू किया जाएगा तो उससे पहले आवश्यक परीक्षण किए जाएंगे।

सरकार एथेनॉल को क्यों बढ़ावा दे रही है?
सरकार के अनुसार इसके कई उद्देश्य हैं—
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना।
विदेशी मुद्रा की बचत।
किसानों की आय बढ़ाना।
कार्बन उत्सर्जन कम करना।

जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया मिश्रित है।
एक वर्ग सरकार के ऊर्जा सुरक्षा और किसानों को लाभ देने वाले तर्क का समर्थन कर रहा है।
दूसरा वर्ग कह रहा है कि यदि माइलेज कम होता है या पुराने वाहनों पर असर पड़ता है तो उपभोक्ताओं को विकल्प मिलना चाहिए। कई लोगों ने E20 नीति की समीक्षा और अधिक परीक्षण की मांग भी उठाई है। हाल के दिनों में इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन की भी तैयारी की खबरें सामने आई हैं।

निष्कर्ष
तथ्यों के आधार पर कहा जा सकता है कि:
✔️ रेसिंग कारों में एथेनॉल का उपयोग होता है — यह दावा सही है।
✔️ E20 से एक्सेलेरेशन और एंटी-नॉक गुणों में कुछ तकनीकी लाभ हो सकते हैं।
✔️ माइलेज में हल्की कमी की संभावना स्वयं सरकार ने स्वीकार की है।
✔️ सोशल मीडिया पर लोगों की शिकायतें वास्तविक हैं, लेकिन सभी मामलों को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं माना जा सकता।
✔️ सरकार E20 को सुरक्षित और ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण बता रही है, जबकि कई उपभोक्ता इसके व्यावहारिक प्रभावों पर अधिक पारदर्शिता और विकल्प की मांग कर रहे हैं।

सावधान नेशन न्यूज़…

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