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सावधान नेशन न्यूज़

लद्दाख में पर्यावरण की सुरक्षा के लिए 100 पूर्व सैनिकों की तैनाती: आखिर क्यों उठाना पड़ा यह बड़ा कदम, क्या हैं नए नियम और पर्यटकों को किन बातों का रखना होगा ध्यान?

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नई दिल्ली, 5 जुलाई 2026

लद्दाख अपनी प्राकृतिक सुंदरता, बर्फ से ढके पहाड़ों, नीली झीलों और दुर्लभ वन्यजीवों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां घूमने आते हैं। लेकिन बढ़ती पर्यटन गतिविधियों के साथ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं। इन्हीं घटनाओं को रोकने के लिए लद्दाख प्रशासन ने पहली बार 100 पूर्व सैनिकों को Environment Protection Force (EPF) में शामिल किया है। इन पूर्व सैनिकों को पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई और चालान करने का अधिकार दिया गया है। यह निर्णय हाल ही में पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में अवैध ऑफ-रोडिंग और वन्यजीवों को परेशान करने की घटनाओं के बाद लिया गया।

आखिर क्या है पूरा मामला?
कुछ दिन पहले चार पर्यटकों पर पैंगोंग झील और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में अवैध ऑफ-रोडिंग करने तथा एक दुर्लभ तिब्बती गज़ेल का पीछा करने का आरोप लगा। प्रशासन ने चारों पर कुल 2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। यह लद्दाख में इस तरह की पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई थी। इस घटना ने प्रशासन को सख्त कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

क्यों जरूरी था यह कदम?
लद्दाख का अधिकांश भाग हाई-एल्टीट्यूड कोल्ड डेजर्ट (उच्च हिमालयी ठंडा रेगिस्तान) है। यहां की वनस्पति बहुत धीमी गति से बढ़ती है। यदि कोई वाहन निर्धारित सड़क छोड़कर रेतीले या घास वाले क्षेत्रों में चलता है तो उसके निशान वर्षों तक बने रह सकते हैं। यही कारण है कि वैज्ञानिक और पर्यावरण विशेषज्ञ लंबे समय से अवैध ऑफ-रोडिंग को बड़ा खतरा मानते रहे हैं।

इसके अलावा लद्दाख में कई दुर्लभ जीव पाए जाते हैं, जिनमें स्नो लेपर्ड, तिब्बती गज़ेल, ब्लैक-नेक्ड क्रेन और कियांग जैसे वन्यजीव शामिल हैं। तेज गति से वाहन चलाना, उनके पास जाकर फोटो लेना या उनका पीछा करना उनके प्राकृतिक व्यवहार और प्रजनन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

Environment Protection Force (EPF) क्या है?
EPF लद्दाख प्रशासन द्वारा गठित एक विशेष पर्यावरण सुरक्षा बल है। इसमें भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और लद्दाख स्काउट्स के 100 सेवानिवृत्त जवान शामिल किए गए हैं। इन्हें पर्यावरणीय कानूनों के पालन की निगरानी के लिए संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है।

पूर्व सैनिकों को ही क्यों चुना गया?
इसके पीछे कई कारण हैं।
इन्हें कठिन पर्वतीय क्षेत्रों में काम करने का अनुभव है।
ये स्थानीय भूगोल और मौसम को अच्छी तरह समझते हैं।
अनुशासन और कानून लागू कराने का अनुभव रखते हैं।
स्थानीय लोगों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सकते हैं।
सेवानिवृत्ति के बाद रोजगार का अवसर भी मिलेगा।
प्रशासन के अनुसार प्रत्येक सदस्य को लगभग 25,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा।

EPF को क्या अधिकार दिए गए हैं?
इन पूर्व सैनिकों को केवल निगरानी के लिए नहीं बल्कि कार्रवाई के लिए भी अधिकृत किया गया है।
इनके अधिकारों में शामिल हैं—
अवैध ऑफ-रोडिंग रोकना।
मौके पर चालान जारी करना।
वन्यजीवों को परेशान करने वालों के खिलाफ कार्रवाई।
प्रतिबंधित क्षेत्रों में अवैध कैंपिंग रोकना।
प्लास्टिक कचरा फैलाने वालों पर कार्रवाई।
सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के उपयोग पर निगरानी।
पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन करने वालों की रिपोर्ट तैयार करना।

कौन-कौन सी गतिविधियां अब सख्ती से रोकी जाएंगी?
सड़क छोड़कर खुले मैदानों में वाहन चलाना।
झीलों के किनारे वाहन ले जाना।
वन्यजीवों का पीछा करना।
संरक्षित क्षेत्रों में बिना अनुमति कैंप लगाना।
खुले में प्लास्टिक और कचरा फेंकना।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियां।

क्या आम पर्यटकों को डरने की जरूरत है?
नहीं। यदि पर्यटक निर्धारित सड़क पर यात्रा करते हैं, स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हैं, कचरा नहीं फैलाते और वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हैं, तो उन्हें किसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। प्रशासन का उद्देश्य पर्यटन रोकना नहीं बल्कि जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) को बढ़ावा देना है।

प्रशासन ने क्या कहा?
लद्दाख के उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने कहा कि लद्दाख दुनिया के सबसे संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिक क्षेत्रों में से एक है। यहां बढ़ते पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। EPF पर्यावरण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

लोगों की प्रतिक्रिया
पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के लिए वीडियो और फोटो बनाने की होड़ में कई पर्यटक नियमों की अनदेखी कर रहे थे। वहीं कुछ लोगों का कहना है कि प्रशासन को पर्यटकों को जागरूक करने पर भी उतना ही ध्यान देना चाहिए जितना दंडात्मक कार्रवाई पर। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में लोगों ने सख्त कार्रवाई का समर्थन किया और कहा कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ करने वालों पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है।

क्या यह केवल लद्दाख तक सीमित रहेगा?
फिलहाल यह पहल केवल लद्दाख में शुरू की गई है। हालांकि यदि इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है तो भविष्य में हिमालय के अन्य संवेदनशील पर्यटन क्षेत्रों में भी इसी तरह की व्यवस्था अपनाई जा सकती है। इस बारे में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

निष्कर्ष
लद्दाख प्रशासन द्वारा 100 पूर्व सैनिकों को Environment Protection Force में शामिल करना केवल कानून लागू करने का कदम नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हिमालय की प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखने का प्रयास है। बढ़ते पर्यटन से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिलता है, लेकिन यदि पर्यावरण को नुकसान पहुंचे तो यह लाभ लंबे समय तक टिक नहीं सकता। इसलिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि लद्दाख में पर्यटन का स्वागत है, लेकिन प्रकृति से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण, जिम्मेदार पर्यटन और पूर्व सैनिकों के पुनर्वास—तीनों उद्देश्यों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास है।

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