सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 23 सितंबर 2026
देश की राजनीति में मंगलवार को दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आए। एक तरफ भारत निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इन सीटों पर मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को की जाएगी। दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरद सत्र 21 सितंबर को हंगामे के साथ शुरू हुआ, जहां भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ कई मुद्दों को लेकर विरोध किया, जबकि सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग उठाई।
चार राज्यों की 28 MLC सीटों पर चुनाव
भारत निर्वाचन आयोग ने 22 सितंबर को उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की विधान परिषद की कुल 28 सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव का कार्यक्रम जारी किया। ये चुनाव मुख्य रूप से स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए हैं। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर और दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाला है, इसलिए नए सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई है।
चारों राज्यों में सीटों का बंटवारा इस प्रकार है:
राज्य
कुल सीटें
सीटों का स्वरूप
उत्तर प्रदेश
11
5 स्नातक, 6 शिक्षक
बिहार
8
4 स्नातक, 4 शिक्षक
महाराष्ट्र
5
3 स्नातक, 2 शिक्षक
कर्नाटक
4
2 स्नातक, 2 शिक्षक
कुल
28
14 स्नातक, 14 शिक्षक
उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 11 सीटों पर चुनाव होगा। बिहार में 8, महाराष्ट्र में 5 और कर्नाटक में 4 सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा।
किस राज्य में कब खत्म हो रहा है मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल?
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, बिहार की आठ सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 16 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। कर्नाटक की चार सीटों के सदस्यों का कार्यकाल 11 नवंबर 2026 को खत्म होगा।
वहीं महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की संबंधित सीटों के मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त होना है। इसी वजह से चुनाव आयोग ने समय रहते चुनाव प्रक्रिया शुरू की है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को मतगणना
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक MLC चुनाव के लिए 29 सितंबर 2026 को औपचारिक अधिसूचना जारी होगी।
इसके बाद उम्मीदवारों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर होगी। नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को की जाएगी, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक नाम वापस ले सकेंगे।
इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदान होगा। मतदान का समय सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक निर्धारित किया गया है। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी और चुनाव से जुड़ी पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है।
यह आम विधानसभा चुनाव से अलग क्यों है?
इन चुनावों को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों का मतदाता वर्ग सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां संबंधित निर्वाचन क्षेत्र के लिए निर्धारित पात्र स्नातक मतदाता और शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं।
इसलिए इन 28 सीटों का चुनाव पूरे राज्य की जनता द्वारा सीधे विधानसभा चुनाव की तरह नहीं किया जाता। चुनाव का दायरा संबंधित स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित रहता है।
इन सीटों पर राजनीतिक दलों के साथ-साथ स्थानीय स्तर के उम्मीदवारों और विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि चुनाव के नतीजों का विधान परिषद की राजनीतिक संरचना पर असर पड़ेगा, लेकिन केवल इन 28 सीटों के आधार पर किसी राज्य की पूरी राजनीतिक तस्वीर का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा का शरद सत्र हंगामे के साथ शुरू
दूसरी बड़ी राजनीतिक खबर जम्मू-कश्मीर से आई है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा का 10 दिवसीय शरद सत्र 21 सितंबर 2026 को शुरू हुआ, लेकिन पहले ही दिन सदन में जोरदार हंगामा देखने को मिला।
भाजपा विधायकों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध किया और सदन के वेल तक पहुंचकर नारेबाजी की। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही समय से पहले स्थगित करनी पड़ी।
भाजपा विधायकों ने जिन मुद्दों को उठाया, उनमें बिजली की बढ़ी हुई दरें, नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे और दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण की मांग प्रमुख रही। भाजपा ने सरकार पर विभिन्न जनसमस्याओं और चुनावी वादों को लेकर सवाल भी उठाए।
रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा विधायक प्रश्नकाल के दौरान विरोध करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदस्यों से प्रश्नकाल को सुचारु रूप से चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा। आखिरकार सदन की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
NC और कांग्रेस ने उठाया राज्य का दर्जा बहाल करने का मुद्दा
भाजपा के विरोध के बीच सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस के सदस्यों ने जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
यह मुद्दा जम्मू-कश्मीर की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद इसे केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद विधानसभा चुनाव हुए और अब निर्वाचित सरकार तथा राजनीतिक दलों की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग लगातार उठती रही है।
शरद सत्र के पहले दिन भी NC और कांग्रेस के सदस्यों ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर नारे लगाए। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
विधानसभा में केवल राज्य के दर्जे का मुद्दा ही नहीं, बल्कि आरक्षण व्यवस्था, रोजगार, आउटसोर्सिंग, दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण और बिजली दरों जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की संभावना है। विभिन्न विपक्षी दलों ने सत्र के दौरान सरकार से इन विषयों पर जवाब मांगने की तैयारी की थी।
हंगामे के पीछे अलग-अलग राजनीतिक मुद्दे
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले दिन का घटनाक्रम यह दिखाता है कि अलग-अलग राजनीतिक दलों की प्राथमिकताएं अलग हैं। भाजपा ने मुख्य रूप से बिजली दरों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा, जबकि NC और कांग्रेस ने राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे को सामने रखा।
इसलिए विधानसभा में हुआ हंगामा किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं था। कई अलग-अलग मांगें और राजनीतिक मतभेद एक साथ सदन में सामने आए। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, पीडीपी और अन्य सदस्यों की ओर से भी आरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाने की तैयारी थी।
एक तरफ MLC चुनाव, दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक टकराव
22 सितंबर 2026 का दिन भारतीय राजनीति के लिहाज से इसलिए महत्वपूर्ण रहा क्योंकि एक ही दिन चार राज्यों में 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा हुई और जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरद सत्र में राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आए।
MLC चुनाव में उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक की 28 स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की सीटों पर मुकाबला होगा। 23 अक्टूबर को मतदान और 27 अक्टूबर को मतगणना के बाद इन सीटों पर तस्वीर साफ होगी। चुनाव आयोग ने पूरी प्रक्रिया 31 अक्टूबर तक समाप्त करने का कार्यक्रम तय किया है।
वहीं जम्मू-कश्मीर में शरद सत्र अभी जारी है। पहले दिन के हंगामे के बाद आने वाले दिनों में राज्य का दर्जा, बिजली की दरें, रोजगार, NHM कर्मचारियों, दिहाड़ी मजदूरों और आरक्षण जैसे मुद्दे विधानसभा में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। हालांकि आगे की कार्यवाही में कौन-से मुद्दे किस रूप में उठते हैं और उन पर क्या निर्णय होता है, यह सदन की आगामी बैठकों पर निर्भर करेगा।
इस तरह 23 अक्टूबर का MLC चुनाव कार्यक्रम और जम्मू-कश्मीर विधानसभा का मौजूदा सत्र—दोनों ही आने वाले दिनों में देश की राजनीतिक खबरों में महत्वपूर्ण घटनाक्रम बने रहेंगे।
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