सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026
राज्यसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली बड़ी घोषणा कर दी है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने उत्तराखंड से दिनेश आर्य और पश्चिम बंगाल से रुक्मिणी मल्लिक उर्फ कोयल मल्लिक को राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया है। दोनों नामों की घोषणा 4 अक्टूबर को की गई। उत्तराखंड में दिनेश आर्य को राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के लिए मैदान में उतारा गया है, जबकि पश्चिम बंगाल में रुक्मिणी मल्लिक उसी सीट के लिए उपचुनाव लड़ेंगी, जिस पर उन्होंने कुछ महीने पहले ही राज्यसभा सदस्य के रूप में इस्तीफा दिया था।
इस घोषणा के साथ ही उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। दोनों राज्यों में एक-एक सीट पर चुनाव होना है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार मतदान 16 अक्टूबर 2026 को होगा और मतदान के बाद उसी दिन मतगणना भी की जाएगी। उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के साथ उत्तराखंड की एक नियमित राज्यसभा सीट और पश्चिम बंगाल की एक खाली हुई सीट पर उपचुनाव इसी दिन कराया जाएगा।
उत्तराखंड से दिनेश आर्य पर भाजपा ने जताया भरोसा
भाजपा ने उत्तराखंड की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय रहे दिनेश आर्य के नाम पर मुहर लगाई है। आर्य का राजनीतिक आधार नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र में रहा है। वह भाजपा के संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं और नैनीताल भाजपा के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं।
दिनेश आर्य वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले नैनीताल विधानसभा सीट से भाजपा टिकट के प्रमुख दावेदारों में शामिल थे। टिकट नहीं मिलने के बावजूद उन्होंने पार्टी संगठन में सक्रियता बनाए रखी। भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में भी उन्हें जिम्मेदारी मिली। दिसंबर 2023 में उन्हें उत्तराखंड सरकार में राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया। इस पद के साथ उन्हें दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री का दायित्व भी मिला।
उनका नाम सामने आने से पहले भाजपा में उम्मीदवार चयन को लेकर काफी मंथन हुआ था। रिपोर्टों के अनुसार प्रदेश स्तर पर लगभग दो दर्जन नामों पर चर्चा हुई और केंद्रीय नेतृत्व को संभावित उम्मीदवारों का पैनल भेजा गया। इसके बाद भाजपा केंद्रीय चुनाव समिति ने दिनेश आर्य के नाम को अंतिम रूप दिया।
किस सीट पर हो रहा है चुनाव?
उत्तराखंड की जिस राज्यसभा सीट के लिए दिनेश आर्य को उम्मीदवार बनाया गया है, वह वर्तमान में भाजपा सांसद नरेश बंसल के पास है। उनका कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसी कारण इस सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव कराया जा रहा है। चुनाव आयोग ने मतदान के लिए 16 अक्टूबर की तारीख तय की है।
उत्तराखंड विधानसभा में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को काफी मजबूत माना जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य विधानसभा में भाजपा के पास 47 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 19 और अन्य दलों/निर्दलीयों के पास शेष विधायक हैं। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं।
यानी उत्तराखंड में भाजपा ने केवल उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है, बल्कि पार्टी ने अपने संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेता को संसद के उच्च सदन तक पहुंचाने की रणनीति भी सामने रखी है।
पश्चिम बंगाल में रुक्मिणी मल्लिक की उम्मीदवारी क्यों खास?
भाजपा की दूसरी घोषणा पश्चिम बंगाल से जुड़ी है और यही इस चुनाव का सबसे ज्यादा चर्चा वाला पहलू है।
भाजपा ने पश्चिम बंगाल की खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए रुक्मिणी मल्लिक, जिन्हें फिल्म जगत में कोयल मल्लिक के नाम से जाना जाता है, को अपना उम्मीदवार बनाया है। वह बंगाली फिल्म उद्योग का जाना-पहचाना चेहरा हैं और इससे पहले तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से राज्यसभा पहुंची थीं।
कोयल मल्लिक को 2026 में तृणमूल कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। उन्होंने अप्रैल 2026 में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। लेकिन उनका संसदीय कार्यकाल बहुत छोटा रहा। 16 जुलाई 2026 को उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हुई और अब इसी सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि जिस सीट पर वह पहले TMC की ओर से राज्यसभा सदस्य बनी थीं, अब उसी सीट के उपचुनाव में भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाया है। इस कारण उनकी उम्मीदवारी ने बंगाल की राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया है।
कोयल मल्लिक का राजनीतिक सफर रहा बेहद छोटा
रुक्मिणी मल्लिक यानी कोयल मल्लिक मूल रूप से बंगाली सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। वह लंबे समय से बंगाली फिल्म उद्योग में सक्रिय रही हैं और कई फिल्मों में काम कर चुकी हैं। उनके पिता भी बंगाली सिनेमा के चर्चित अभिनेता रहे हैं।
राजनीति में उनका प्रवेश अचानक चर्चा में आया, जब तृणमूल कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया। लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने राज्यसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में उनके अगले कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई थीं।
अब भाजपा ने उन्हें अपना उम्मीदवार बनाकर इन चर्चाओं को एक स्पष्ट राजनीतिक दिशा दे दी है। वह पश्चिम बंगाल में भाजपा के टिकट पर राज्यसभा उपचुनाव लड़ेंगी।
बंगाल की सीट पर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
यहां यह समझना जरूरी है कि पश्चिम बंगाल की सीट पर होने वाला चुनाव उत्तराखंड की तरह नियमित द्विवार्षिक चुनाव नहीं है।
पश्चिम बंगाल की राज्यसभा सीट रुक्मिणी मल्लिक के इस्तीफे के बाद खाली हुई। इसी वजह से निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम जारी किया। चुनाव 16 अक्टूबर को होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि उम्मीदवार 9 अक्टूबर तक अपना नाम वापस ले सकते हैं।
इसलिए 16 अक्टूबर को होने वाले राज्यसभा चुनाव में कुल मिलाकर दो अलग तरह की प्रक्रिया दिखाई देगी—उत्तराखंड में नियमित द्विवार्षिक चुनाव और पश्चिम बंगाल में खाली हुई सीट के लिए उपचुनाव।
भाजपा की रणनीति में क्या संकेत मिलते हैं?
भाजपा की दोनों घोषणाओं को एक साथ देखें तो पार्टी की रणनीति के अलग-अलग पहलू दिखाई देते हैं।
उत्तराखंड में पार्टी ने संगठन से लंबे समय से जुड़े स्थानीय नेता दिनेश आर्य को चुना है। इससे पार्टी संगठन में सक्रिय नेताओं को संसद तक पहुंचाने का संदेश जाता है। आर्य पहले प्रदेश संगठन और सरकार से जुड़े दायित्वों में सक्रिय रहे हैं।
दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में भाजपा ने एक लोकप्रिय फिल्म अभिनेत्री और पूर्व TMC राज्यसभा सदस्य को अपना उम्मीदवार बनाया है। कोयल मल्लिक की लोकप्रियता और बंगाली समाज में उनकी पहचान को देखते हुए उनकी उम्मीदवारी का राजनीतिक महत्व अलग है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि कोयल मल्लिक कुछ समय पहले तक TMC के जरिए राज्यसभा पहुंची थीं और अब भाजपा की उम्मीदवार हैं। इसलिए उनकी राजनीतिक यात्रा बंगाल में दल-बदल और बदलते राजनीतिक समीकरणों की चर्चा के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गई है।
16 अक्टूबर को क्या होगा?
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 16 अक्टूबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। इसी दिन मतगणना भी होगी। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों, उत्तराखंड की एक सीट और पश्चिम बंगाल की एक खाली सीट के लिए चुनाव प्रक्रिया निर्धारित है।
नामांकन की प्रक्रिया 6 अक्टूबर तक चलेगी। इसके बाद 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। इसके बाद मैदान में बचे उम्मीदवारों की तस्वीर स्पष्ट हो जाएगी।
राज्यसभा चुनाव प्रत्यक्ष रूप से जनता द्वारा नहीं कराया जाता। इसमें संबंधित राज्यों के निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं। इसलिए विधानसभा में दलों का संख्याबल उम्मीदवारों की जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उत्तराखंड में भाजपा की स्थिति मजबूत
उत्तराखंड की बात करें तो यहां भाजपा की विधानसभा में मजबूत स्थिति है। यही कारण है कि दिनेश आर्य की उम्मीदवारी को लेकर पार्टी के भीतर उत्साह है। भाजपा ने लंबे संगठनात्मक अनुभव वाले नेता पर भरोसा किया है।
उनकी उम्मीदवारी का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि वह नैनीताल क्षेत्र से आते हैं और लंबे समय से राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। भाजपा के लिए यह संगठन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व दोनों को साधने वाली पसंद के रूप में देखी जा सकती है।
बंगाल में मुकाबला क्यों महत्वपूर्ण?
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा उपचुनाव सिर्फ एक सीट भर का चुनाव नहीं है। इसके साथ प्रदेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियां भी जुड़ी हुई हैं।
कोयल मल्लिक पहले TMC के टिकट पर राज्यसभा पहुंची थीं और अब भाजपा उम्मीदवार हैं। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना राजनीतिक रूप से प्रतीकात्मक भी है। भाजपा को उम्मीद होगी कि उनकी लोकप्रियता और सार्वजनिक पहचान पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है।
वहीं यह चुनाव TMC के लिए भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि जिस सीट से उसका प्रतिनिधित्व रहा था, अब उसी सीट पर उसके पूर्व सांसद भाजपा के टिकट पर चुनाव मैदान में हैं।
निष्कर्ष: दो नाम, दो अलग राजनीतिक संदेश
भाजपा द्वारा दिनेश आर्य और रुक्मिणी मल्लिक को राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से 16 अक्टूबर का चुनाव और अधिक दिलचस्प हो गया है।
उत्तराखंड में दिनेश आर्य संगठनात्मक राजनीति और लंबे समय से भाजपा से जुड़े स्थानीय नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं पश्चिम बंगाल में रुक्मिणी मल्लिक उर्फ कोयल मल्लिक की उम्मीदवारी इसलिए खास है क्योंकि वह पहले TMC की राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं और अब भाजपा के टिकट पर उसी खाली हुई सीट से उपचुनाव लड़ेंगी।
अब सबकी नजर 6 अक्टूबर की नामांकन प्रक्रिया, 9 अक्टूबर की नाम वापसी की अंतिम तारीख और फिर 16 अक्टूबर के मतदान व मतगणना पर होगी। उत्तराखंड में जहां विधानसभा के आंकड़े भाजपा के पक्ष में मजबूत दिखाई देते हैं, वहीं पश्चिम बंगाल में कोयल मल्लिक की राजनीतिक यात्रा इस चुनाव को खास तौर पर चर्चा में रखेगी।
कुल मिलाकर, भाजपा की यह पहली सूची सिर्फ दो उम्मीदवारों की घोषणा नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में संगठनात्मक नेतृत्व और पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विस्तार—दोनों मोर्चों पर पार्टी की रणनीति का संकेत देती है।
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