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सावधान नेशन न्यूज़

एशियन गेम्स 2026 में भारत का शानदार अभियान, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा देश

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नई दिल्ली, 5 अक्टूबर 2026

जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन गेम्स में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 85 पदक अपने नाम किए। भारतीय दल ने प्रतियोगिता में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के लिए यह एशियन गेम्स के इतिहास में दूसरा सबसे बड़ा पदक अभियान रहा।
एशियन गेम्स का समापन 4 अक्टूबर को हुआ। भारत ने प्रतियोगिता के अंतिम चरण में जोरदार वापसी करते हुए कई अहम मुकाबलों में पदक हासिल किए। इस अभियान की खास बात यह रही कि भारतीय खिलाड़ियों ने केवल पारंपरिक मजबूत खेलों में ही नहीं, बल्कि कई अन्य स्पर्धाओं में भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।


85 पदकों में 21 स्वर्ण
भारत के खाते में कुल 21 स्वर्ण पदक आए। इसके अलावा खिलाड़ियों ने 27 रजत और 37 कांस्य पदक जीते। इस तरह भारत की कुल पदक संख्या 85 रही।
पदक तालिका में चीन शीर्ष पर रहा, जबकि जापान दूसरे और दक्षिण कोरिया तीसरे स्थान पर रहा। भारत चौथे स्थान पर रहा और उसने उज्बेकिस्तान समेत कई मजबूत खेल राष्ट्रों को पीछे छोड़ा।
हालांकि भारत का प्रदर्शन 2022 हांगझोउ एशियन गेम्स की तुलना में पदकों की संख्या के लिहाज से कम रहा। पिछले संस्करण में भारत ने रिकॉर्ड 100 से अधिक पदक जीते थे। इसके बावजूद आइची-नागोया में 85 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल करना भारतीय खेलों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।


एथलेटिक्स ने दिया सबसे बड़ा योगदान
भारत की कुल पदक संख्या में एथलेटिक्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा। भारतीय एथलीटों ने इस खेल में 24 पदक हासिल किए। शूटिंग ने भी भारत के पदक अभियान को मजबूती दी और भारत को इस खेल में 15 पदक मिले। तीरंदाजी में भारत ने 9 पदक हासिल किए, जबकि मुक्केबाजी और कुश्ती में 6-6 पदक आए।
इन खेलों के अलावा हॉकी, क्रिकेट, कबड्डी, गोल्फ और कई अन्य स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया।


कई खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
आइची-नागोया एशियन गेम्स भारतीय खिलाड़ियों की कई ऐतिहासिक उपलब्धियों के लिए भी याद किए जाएंगे।
तीरंदाजी में कुमकुम अनिल मोहोड ने व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। वह इस स्पर्धा में व्यक्तिगत स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। भारतीय महिला रिकर्व टीम ने भी दक्षिण कोरिया के लंबे समय से चले आ रहे दबदबे को खत्म करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया।
शूटिंग में नीरू ढांडा का प्रदर्शन भी बेहद खास रहा। उन्होंने ट्रैप स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर भारत के लिए इस स्पर्धा में लंबे इंतजार को समाप्त किया। नीरू ढांडा और काइनान चेनाई की मिश्रित ट्रैप जोड़ी ने एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया।
गोल्फ में प्रणवी उर्स ने भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर इस खेल में नया अध्याय जोड़ा।


हॉकी और क्रिकेट में भी भारत का दबदबा
टीम स्पर्धाओं में भी भारत ने अपना प्रभाव कायम रखा। क्रिकेट में भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक हासिल कर अपना दबदबा बरकरार रखा।
हॉकी में भारतीय पुरुष टीम ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। इस जीत के साथ भारत ने न केवल एशियाई स्तर पर अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी, बल्कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की की।
कबड्डी में भी भारत ने स्वर्ण पदक हासिल कर इस खेल में अपनी बादशाहत कायम रखी। क्रिकेट, हॉकी और कबड्डी में मिले स्वर्ण पदकों ने भारत के कुल 21 स्वर्ण पदकों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।


महिलाओं ने भी दिखाया दम
इस बार भारतीय महिला खिलाड़ियों का प्रदर्शन विशेष रूप से चर्चा में रहा। एथलेटिक्स, तीरंदाजी, शूटिंग, बॉक्सिंग, गोल्फ और अन्य खेलों में भारतीय महिलाओं ने शानदार प्रदर्शन किया।
आंकड़ों के अनुसार भारतीय पुरुषों और महिलाओं ने कुल पदकों में लगभग समान योगदान दिया, लेकिन महिलाओं ने अधिक स्वर्ण पदक हासिल किए। यह भारतीय महिला खिलाड़ियों की बढ़ती ताकत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी निरंतर सफलता को दर्शाता है।


85 पदक, लेकिन आगे के लिए कई सबक
भारत के लिए 85 पदकों का अभियान निश्चित रूप से गर्व का विषय है, लेकिन इस प्रदर्शन ने कुछ क्षेत्रों में सुधार की जरूरत भी सामने रखी है।
हांगझोउ में रिकॉर्ड पदक संख्या हासिल करने के बाद इस बार भारत के कुल पदकों में कमी आई। खासतौर पर कुछ ऐसे खेल रहे जहां भारत पदक की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। दूसरी ओर, कई खिलाड़ियों ने दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए उम्मीदें भी जगाईं।
27 रजत पदक यह भी बताते हैं कि कई मुकाबलों में भारतीय खिलाड़ी स्वर्ण पदक के बेहद करीब पहुंचे। ऐसे प्रदर्शन को अगले बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में स्वर्ण पदक में बदलना भारतीय खेल व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी।


भारत के खेल भविष्य के लिए बढ़ी उम्मीदें
आइची-नागोया एशियन गेम्स का सफर भारत के लिए उपलब्धियों, ऐतिहासिक जीत और कुछ कमियों का मिश्रण रहा। 85 पदकों के साथ चौथा स्थान भारत को एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों में बनाए रखता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई नए खिलाड़ियों ने बड़े मंच पर अपनी पहचान बनाई है। तीरंदाजी, शूटिंग, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग, हॉकी, क्रिकेट और अन्य खेलों में मिली सफलताएं आने वाले वर्षों में भारत के लिए उम्मीद बढ़ाती हैं।


एशियन गेम्स का यह अभियान अब समाप्त हो चुका है, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों की नजरें आने वाली बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर होंगी। आइची-नागोया में मिली सफलताओं और कमियों से सीख लेकर अगर भारत अपनी तैयारी को और मजबूत करता है, तो आने वाले वर्षों में पदकों की संख्या और स्वर्ण पदकों में और बड़ी छलांग देखने को मिल सकती है।


निष्कर्ष:
21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य—कुल 85 पदक। आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारत ने चौथा स्थान हासिल कर एक बार फिर साबित किया कि भारतीय खेल लगातार नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। अब चुनौती इस प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए भविष्य की वैश्विक प्रतियोगिताओं में अधिक से अधिक पदक जीतने की होगी।

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