सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 17 अक्टूबर 2026
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने सात प्रमुख शोध केंद्रों का चयन किया है। इन केंद्रों को नई मेडिकल तकनीक, आधुनिक जांच उपकरण और चिकित्सा संबंधी उत्पाद विकसित करने की जिम्मेदारी दी गई है। इस पहल का उद्देश्य ऐसी तकनीक तैयार करना है, जिनका इस्तेमाल अस्पतालों के साथ-साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी किया जा सके।
16 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत प्रत्येक चयनित केंद्र को पांच वर्षों में अधिकतम 15 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। हालांकि, यह राशि अधिकतम सीमा है; इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी केंद्रों को पूरी राशि मिलना तय है।
किन सात संस्थानों का हुआ चयन?
इस पहल के लिए चुने गए संस्थानों में पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु और अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर शामिल हैं।
IIT खड़गपुर
IIT दिल्ली
IIT बॉम्बे
IIT कानपुर
IIT मद्रास
भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु
अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर
किस तरह की तकनीक पर होगा काम?
इस योजना के तहत अलग-अलग संस्थान स्वास्थ्य क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार शोध और उत्पाद विकास करेंगे।
सस्ती जांच तकनीक: ऐसी जांच प्रणालियां विकसित करने पर जोर होगा, जिनसे बीमारियों की पहचान कम लागत में की जा सके।
पोर्टेबल मेडिकल उपकरण: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सीमित संसाधनों वाले इलाकों में इस्तेमाल किए जा सकने वाले जांच एवं निगरानी उपकरण तैयार किए जाएंगे।
आंखों की बीमारियां: आंखों से जुड़ी समस्याओं के लिए नई चिकित्सा तकनीकों के विकास पर काम होगा।
रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां: इन बीमारियों की पहचान और उपचार में मदद करने वाली तकनीकों पर शोध किया जाएगा।
नई चिकित्सा सामग्री और उपकरण: बायोमटेरियल, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और जरूरत के मुताबिक इलाज से जुड़ी तकनीकों को विकसित करने का प्रयास होगा।
किस संस्थान को कौन-सी जिम्मेदारी मिली?
IIT बॉम्बे का केंद्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पोर्टेबल जांच, मरीजों की निगरानी और मौके पर जांच करने वाली तकनीकों पर काम करेगा। अमृता विश्व विद्यापीठम का केंद्र आंखों और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियों के लिए तकनीक विकसित करने तथा उसकी उपयोगिता जांचने पर ध्यान देगा।
IISc बेंगलुरु में बायोमटेरियल और चिकित्सा उपकरणों के विकास पर काम किया जाएगा। IIT खड़गपुर का केंद्र कम लागत वाली जांच, पुनर्योजी चिकित्सा, व्यक्तिगत उपचार और डिजिटल स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देगा। वहीं, IIT दिल्ली, IIT कानपुर और IIT मद्रास के केंद्र भी स्वास्थ्य क्षेत्र की प्राथमिक जरूरतों के अनुरूप तकनीक और चिकित्सा उत्पाद विकसित करेंगे।
मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?
यदि इन शोध परियोजनाओं से उपयोगी और सुरक्षित तकनीक विकसित होकर अस्पतालों तक पहुंचती है, तो भविष्य में जांच की लागत कम करने, शुरुआती स्तर पर बीमारियों की पहचान करने और दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य भारत में ही चिकित्सा उपकरणों और जांच तकनीकों का विकास करना भी है, ताकि देश में स्वदेशी चिकित्सा तकनीक को बढ़ावा मिले और आयात पर निर्भरता घटाने की दिशा में प्रगति हो।
क्या इन तकनीकों का इस्तेमाल तुरंत शुरू हो जाएगा?
नहीं। किसी तकनीक को विकसित करने के बाद उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा, प्रभावशीलता और नियामकीय आवश्यकताओं की जांच जरूरी होती है। इसके बाद ही संबंधित उत्पाद को निर्धारित नियमों के अनुसार इस्तेमाल या बाजार में उपलब्ध कराने का रास्ता खुलता है। इसलिए इस योजना से मरीजों को तत्काल लाभ मिलने का दावा करना सही नहीं होगा। इसका वास्तविक असर विकसित होने वाली तकनीकों और उनके सफल परीक्षण एवं उपयोग पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष: ICMR की यह पहल भारत में सस्ती, स्वदेशी और उपयोगी चिकित्सा तकनीक विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले वर्षों में इन शोध केंद्रों का काम यह तय करेगा कि नई तकनीकें आम मरीजों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाती हैं।
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