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सावधान नेशन न्यूज़

दिल्ली-NCR में प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता, AQI 377 तक पहुंचा; CAQM ने पंजाब के 12 जिलों पर कसा शिकंजा, बठिंडा पहुंची विशेष टीम

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नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026

दिल्ली-NCR में प्रदूषण का स्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। बुधवार को दिल्ली की हवा की गुणवत्ता बेहद खराब हो गई और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार शाम 4 बजे दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 377 दर्ज किया गया। यह इस साल 20 जनवरी के बाद दिल्ली की सबसे खराब वायु गुणवत्ता बताई गई है।
हालात को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर सख्ती बढ़ा दी है। आयोग ने बठिंडा में अपनी विशेष टीम भेजकर जमीनी हालात का जायजा लेने का फैसला किया है। इसके साथ ही पंजाब के 12 जिलों में निगरानी और कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।


पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में अचानक बढ़ोतरी
CAQM की समीक्षा में पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी सामने आई है। सोमवार और मंगलवार के बीच एक दिन में 584 नई घटनाएं दर्ज होने की जानकारी दी गई।
3 नवंबर तक पंजाब में पराली जलाने की कुल घटनाएं 2,196 बताई गई थीं। वहीं, 4 नवंबर तक की अवधि के लिए इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में यह संख्या 2,347 बताई गई है।
जिलों की बात करें तो तरनतारन में सबसे अधिक घटनाएं दर्ज की गईं। इसके अलावा फिरोजपुर, बठिंडा, अमृतसर और संगरूर जैसे जिले भी निगरानी के दायरे में हैं।


इन 12 जिलों पर CAQM की विशेष नजर
आयोग ने पंजाब के जिन 12 जिलों में निगरानी और कार्रवाई बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, उनमें शामिल हैं:
फिरोजपुर
संगरूर
बठिंडा
पटियाला
बरनाला
फरीदकोट
जालंधर
फाजिल्का
लुधियाना
मलेरकोटला
मोगा
मानसा
CAQM ने इन जिलों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने को कहा है।


अधिकारियों को नोटिस, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी
पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में नाकामी को लेकर CAQM ने पंजाब के पांच जिलों जालंधर, फरीदकोट, बठिंडा, बरनाला और फाजिल्का के उपायुक्तों (DC) तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
इससे पहले अमृतसर, तरनतारन, गुरदासपुर और कपूरथला के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की गई थी। इस तरह पिछले चार दिनों में कुल नौ जिलों के अधिकारियों पर सीधे तौर पर नियामकीय कार्रवाई की गई है।


थर्मल पावर प्लांट को भी दिए गए निर्देश
CAQM ने पराली के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर दिया है। आयोग ने थर्मल पावर प्लांटों को कम से कम 5 प्रतिशत बायोमास पेलेट्स कोयले के साथ इस्तेमाल करने के लक्ष्य का पालन करने का निर्देश दिया है।
इसका उद्देश्य पराली को खेतों में जलाने के बजाय बिजली उत्पादन और अन्य औद्योगिक कामों में इस्तेमाल करना है। निर्देशों का पालन नहीं करने वाले प्लांटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।


दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति कितनी गंभीर है?
CPCB के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को दिल्ली का औसत AQI 377 रहा, जो बहुत खराब श्रेणी में आता है। हालांकि, दिल्ली के कई इलाकों में स्थिति इससे भी गंभीर रही।
IIT दिल्ली में AQI 455, जहांगीरपुरी में 449 और पंजाबी बाग में 446 तक पहुंच गया। वहीं, नोएडा के सेक्टर-62 में AQI 425 दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के आकलन के अनुसार, बुधवार को दिल्ली के PM2.5 प्रदूषण में क्षेत्रीय पराली जलाने की हिस्सेदारी लगभग 16.28 प्रतिशत थी, जबकि स्थानीय परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी लगभग 18.17 प्रतिशत आंकी गई।
इससे स्पष्ट है कि दिल्ली के प्रदूषण के पीछे पराली के साथ-साथ वाहनों से निकलने वाला धुआं भी एक बड़ा कारण है।


आगे कैसा रहेगा मौसम और प्रदूषण?
IITM के पूर्वानुमान के अनुसार, 5 नवंबर को भी दिल्ली की हवा बहुत खराब श्रेणी में रहने की आशंका जताई गई थी। शुक्रवार और शनिवार को प्रदूषण के गंभीर श्रेणी तक पहुंचने की संभावना भी बताई गई।
कम हवा की गति और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा रह सकते हैं।


आखिर आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर?
बढ़ते प्रदूषण के कारण बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी समस्याओं से परेशान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। आंखों में जलन, गले में परेशानी, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
फिलहाल दिल्ली-NCR में प्रदूषण से राहत के लिए केवल पराली जलाने पर रोक लगाना पर्याप्त नहीं होगा। वाहनों के धुएं, निर्माण स्थलों की धूल, औद्योगिक प्रदूषण और कचरा जलाने पर भी प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।


निष्कर्ष: दिल्ली की बिगड़ती हवा ने एक बार फिर प्रदूषण नियंत्रण की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। CAQM की बठिंडा में भेजी गई टीम और पंजाब के 12 जिलों में बढ़ाई गई निगरानी से पराली जलाने की घटनाओं पर कितना नियंत्रण होता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा।

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