सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 5 नवंबर 2026
देश के राज्यों के पुराने टैक्स अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया है कि GST लागू होने से पहले के कर व्यवस्था में राज्य सरकारों को बिक्री कर (Sales Tax) के ऊपर अतिरिक्त टैक्स या सरचार्ज लगाने का अधिकार था।
यह मामला करीब 27 साल से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। अदालत ने कहा कि बिक्री कर के आधार पर तय किया गया अतिरिक्त टैक्स भी बिक्री कर की दर में बढ़ोतरी माना जाएगा। इसलिए इसे राज्यों के पुराने संवैधानिक अधिकारों के दायरे में रखा गया था।
आखिर क्या था पूरा मामला?
यह विवाद ओडिशा के एक पुराने कानून से जुड़ा था। मामला Arjun Flour Mills बनाम State of Odisha से संबंधित था। इसमें ओडिशा के बिक्री कर कानून के तहत कुछ कारोबारियों पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का प्रावधान चुनौती दिया गया था।
इस प्रावधान के अनुसार, जिन कारोबारियों का सालाना कारोबार 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच था, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स और 1 करोड़ रुपये से अधिक कारोबार करने वालों पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाया जाता था।
विवाद यह था कि क्या राज्य सरकार को पहले से लागू बिक्री कर के आधार पर अतिरिक्त टैक्स लगाने का अधिकार है या यह अधिकार केंद्र सरकार के कराधिकारों में हस्तक्षेप करता है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय संविधान पीठ ने 4 नवंबर 2026 को इस मामले पर फैसला सुनाया।
अदालत ने 1974 के S. Kodar बनाम State of Kerala फैसले को सही माना और स्पष्ट किया कि बिक्री कर के आधार पर लगाया गया अतिरिक्त टैक्स या सरचार्ज बिक्री कर की दर में बढ़ोतरी के समान है।
इसलिए GST लागू होने से पहले के संवैधानिक प्रावधानों के तहत ऐसे कर लगाने का अधिकार राज्यों के पास था।
GST लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका सीधा संबंध GST लागू होने से पहले की कर व्यवस्था से है।
साल 2017 में GST लागू होने के बाद देश में पुराने बिक्री कर कानूनों और उनसे जुड़े संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव हुआ। इसी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब इस पुराने विवाद का भविष्य में बहुत कम व्यावहारिक महत्व रह गया है।
अदालत ने करीब 27 साल पुराने इस कानूनी संदर्भ को अकादमिक और निष्प्रभावी मानते हुए निपटा दिया।
इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि राज्य सरकारें अपनी मर्जी से GST के ऊपर कोई भी नया टैक्स या सरचार्ज लगा सकती हैं। मौजूदा GST व्यवस्था में टैक्स लगाने के अधिकार संविधान और GST कानूनों के अनुसार ही तय होते हैं।
किन लोगों और मामलों पर पड़ेगा असर?
इस फैसले का असर मुख्य रूप से उन पुराने कर विवादों पर पड़ सकता है, जिनमें GST लागू होने से पहले अतिरिक्त बिक्री कर, सरचार्ज या सेस लगाने को चुनौती दी गई थी।
हालांकि, हर पुराने टैक्स की वसूली अपने आप वैध नहीं हो जाएगी। संबंधित मामलों में टैक्स की गणना, छूट, समय-सीमा और अन्य कानूनी सवालों पर अलग से फैसला होना बाकी हो सकता है।
निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत की पुरानी कर व्यवस्था और राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अदालत ने 1974 के अपने पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि GST से पहले बिक्री कर पर आधारित अतिरिक्त टैक्स लगाना राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता था।
लेकिन GST लागू होने के बाद इस फैसले को नए टैक्स लगाने की खुली छूट समझना गलत होगा।
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