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महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती 2026: ‘वेदों की ओर लौटो’ का नारा देने वाले महान सुधारक को देश कर रहा नमन

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तरुण कश्यप

आज पूरा भारतवर्ष आर्य समाज के संस्थापक और आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक महर्षि दयानंद सरस्वती जी की जयंती मना रहा है। 12 फरवरी 1824 को गुजरात के टंकारा में जन्मे स्वामी जी ने अंधविश्वास, छुआछूत और कुरीतियों के विरुद्ध शंखनाद किया था। आज उनकी जयंती पर देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित तमाम दिग्गज नेता उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

मुख्य समाचार

  • सामाजिक पुनर्जागरण के पुरोधा: महर्षि दयानंद ने 1875 में ‘आर्य समाज’ की स्थापना की थी, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज को वेदों के ज्ञान से जोड़ना और पाखंडवाद को समाप्त करना था। उन्होंने समाज में फैली मूर्तिपूजा, बाल विवाह और सती प्रथा जैसी कुप्रथाओं का कड़ा विरोध किया।
  • स्वराज का पहला आह्वान: आपको जानकर गर्व होगा कि स्वामी दयानंद ही वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने 1876 में “स्वराज” (भारत भारतीयों के लिए) का नारा दिया था, जिसे बाद में लोकमान्य तिलक ने आगे बढ़ाया।
  • शिक्षा और महिला अधिकार: उन्होंने महिला शिक्षा और विधवा विवाह पर जोर दिया। उनके विचारों से प्रेरित होकर आज देशभर में डीएवी (DAV) स्कूलों की एक विशाल श्रृंखला शिक्षा का प्रसार कर रही है।
  • सत्यार्थ प्रकाश का योगदान: उनकी अमर कृति ‘सत्यार्थ प्रकाश’ आज भी सत्य के मार्ग पर चलने वालों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करती है।

आयोजन और श्रद्धांजलि:
आज के दिन देशभर में आर्य समाज की इकाइयों द्वारा यज्ञ, हवन और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि स्वामी जी के विचार आज भी एक समतामूलक समाज के निर्माण के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें एक प्रेरणापुंज बताया जो भारत की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने का साहस देते हैं

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