सावधान नेशन न्यूज़
नई दिल्ली, 1 जून 2026
वरिष्ठ टीवी पत्रकार Anjana Om Kashyap के एक बयान ने देशभर में बहस छेड़ दी है। हाल ही में एक टीवी बहस के दौरान उन्होंने कुछ ऑनलाइन शिक्षकों और यूट्यूब पर पढ़ाने वाले शिक्षकों को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे बड़ी संख्या में छात्रों और शिक्षकों ने अपमानजनक बताया। उनके द्वारा इस्तेमाल किए गए “दो कौड़ी” जैसे शब्दों को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं।
विवाद तब शुरू हुआ जब एक लाइव डिबेट के दौरान अंजना ओम कश्यप ने कहा कि कई यूट्यूब शिक्षक केवल लोकप्रियता और कमाई के लिए पढ़ाने का दावा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग छात्रों को भ्रमित करते हैं और शिक्षा के नाम पर अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश करते हैं। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद देश के कई प्रसिद्ध ऑनलाइन शिक्षकों ने इस टिप्पणी का विरोध किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले शिक्षकों का कहना है कि लाखों छात्र आज डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सस्ती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनका तर्क है कि कुछ लोगों की गलतियों के आधार पर पूरे ऑनलाइन शिक्षण समुदाय को “दो कौड़ी का” कहना उचित नहीं है।
प्रसिद्ध शिक्षक Khan Sir ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि ऑनलाइन शिक्षकों को अयोग्य बताया जा रहा है तो यह उन लाखों छात्रों के संघर्ष और मेहनत का भी अपमान है जिन्होंने इन्हीं शिक्षकों की मदद से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएँ पास की हैं। इसी तरह कई अन्य शिक्षकों ने भी वीडियो संदेश जारी कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
छात्रों के बीच भी इस बयान को लेकर काफी नाराज़गी देखी जा रही है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हजारों छात्रों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यूट्यूब और ऑनलाइन शिक्षकों ने उनकी पढ़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई छात्रों ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान जब स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान बंद थे, तब ऑनलाइन शिक्षकों ने ही पढ़ाई का सिलसिला जारी रखा था। ऐसे में पूरे समुदाय को अपमानजनक शब्दों से संबोधित करना उन्हें स्वीकार्य नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारंपरिक मीडिया और डिजिटल शिक्षा जगत के बीच बढ़ती दूरी को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन शिक्षा ने भारत में तेजी से विस्तार किया है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों छात्र कम लागत में गुणवत्तापूर्ण सामग्री प्राप्त कर पा रहे हैं। यही कारण है कि ऑनलाइन शिक्षकों को लेकर छात्रों में एक विशेष भरोसा विकसित हुआ है।
हालाँकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि डिजिटल शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही पर चर्चा होनी चाहिए। कई बार कुछ संस्थानों और शिक्षकों पर भ्रामक दावे करने के आरोप भी लगे हैं। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यदि समस्या कुछ लोगों तक सीमित है तो पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा करना उचित नहीं माना जा सकता।
फिलहाल इस विवाद पर अंजना ओम कश्यप की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण या माफी सामने नहीं आई है। दूसरी ओर सोशल मीडिया पर बहस लगातार जारी है और छात्र तथा शिक्षक अपनी प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। यह मामला अब केवल एक टीवी बहस का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा, मीडिया और समाज में शिक्षकों की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।