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सावधान नेशन न्यूज़

दिल्ली में 3.93 करोड़ की साइबर ठगी, सात गिरफ्तार; 149 बार खाते से निकाले गए पैसे

सावधान नेशन न्यूज़

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026

दिल्ली में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक कारोबारी के बैंक खाते से बिना उसकी जानकारी और अनुमति के करीब 3 करोड़ 93 लाख 59 हजार रुपये निकाल लिए गए। हैरानी की बात यह है कि ठगों ने एक या दो बार नहीं, बल्कि कुल 149 बार बैंक खाते से लेनदेन किया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में पता चला है कि ठगी की रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों, नकद निकासी और हवाला के रास्ते का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं, रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने की बात भी सामने आई है।

आखिर पूरा मामला क्या है?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, शिकायतकर्ता का नाम प्रिंस बंसल है और उनकी उम्र 28 वर्ष बताई गई है। वह एनबीएफसी और लोन से जुड़े लेनदेन का काम करते हैं। उनका ICICI बैंक में खाता है।
बताया गया है कि 5 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 11 बजे उनके बैंक खाते से अचानक लगातार लेनदेन होने लगे। कारोबारी की जानकारी और अनुमति के बिना 149 ट्रांजैक्शन किए गए। इन लेनदेन के जरिए खाते से कुल 3,93,59,000 रुपये निकाल लिए गए।
जब कारोबारी को इस बात का पता चला तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट ने मामले की जांच शुरू की।

ठगी का पैसा कहां और कैसे पहुंचाया गया?
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी करने वालों ने पैसे को सीधे एक खाते से दूसरे खाते में भेजकर नहीं छोड़ा। पुलिस के मुताबिक, उन्होंने रकम को कई अलग-अलग बैंक खातों के जरिए आगे पहुंचाया।
इस तरह के खातों को म्यूल बैंक अकाउंट (Mule Bank Account) कहा जाता है। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका इस्तेमाल अपराध से हासिल पैसे को इधर-उधर भेजने और उसकी असली पहचान छिपाने के लिए किया जाता है।
इसमें आमतौर पर तीन तरह की भूमिकाएं हो सकती हैं:
कुछ लोग अपने बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरे लोगों को करने देते हैं।
कुछ लोग इन खातों में आए पैसे निकालकर दूसरे लोगों तक पहुंचाते हैं।
कुछ लोग पैसों को दूसरे खातों या माध्यमों से आगे भेजने का काम करते हैं।
पुलिस का आरोप है कि इस मामले में भी आरोपियों ने इसी तरह का तरीका अपनाया। ठगी की रकम को कई खातों में भेजा गया और कुछ रकम नकद निकालकर नेटवर्क के दूसरे लोगों तक पहुंचाई गई।

हवाला और USDT का क्या कनेक्शन सामने आया?
पुलिस की जांच में राजस्थान के फलोदी निवासी ब्रिजलाल का नाम सामने आया। पुलिस के मुताबिक, उसका संबंध एक विदेशी मनी एक्सचेंज ऐप ‘U Home’ और हवाला नेटवर्क से होने का संदेह है।
आरोप है कि बैंक खातों से रकम निकालने के बाद नकदी को हवाला के माध्यम से आगे पहुंचाया गया और उससे USDT खरीदा गया।

USDT क्या है?
USDT एक तरह की क्रिप्टोकरेंसी है, जिसकी कीमत अमेरिकी डॉलर के बराबर रखने की कोशिश की जाती है। इसका इस्तेमाल डिजिटल माध्यम से रकम भेजने और प्राप्त करने में होता है।
हालांकि, USDT अपने आप में गैरकानूनी नहीं है। लेकिन अगर इसका इस्तेमाल ठगी से मिले पैसे को छिपाने या अवैध तरीके से भेजने में किया जाता है तो यह जांच का विषय बन जाता है।
पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क के विदेशी संपर्कों और हवाला के जरिए पैसों के लेनदेन की जांच अभी जारी है। इसलिए इन सभी आरोपों को जांच में सामने आए दावों के रूप में ही देखना चाहिए।

सात आरोपियों की गिरफ्तारी, क्या-क्या बरामद हुआ?
दिल्ली पुलिस ने राजस्थान के बीकानेर, जोधपुर, फलोदी और आसपास के इलाकों में करीब सात दिनों तक जांच और कार्रवाई की। इसके बाद सात लोगों को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों में ब्रिजलाल, पीयूष तलानिया, विपिन चंवरिया, सुनील, विक्रम, राकेश बहादु और हेमंत सिंह शामिल हैं।
जांच में सामने आया कि कुछ आरोपियों ने बैंक खाते उपलब्ध कराने और कुछ ने उन खातों से रकम निकालकर आगे पहुंचाने में कथित भूमिका निभाई।
पुलिस ने आरोपियों के पास से ये सामान बरामद किया है:
45 चेकबुक
25 बैंक पासबुक
45 एटीएम कार्ड
13 मोबाइल फोन
पुलिस इन दस्तावेजों और मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका इस्तेमाल किन-किन बैंक खातों और दूसरे साइबर अपराधों में हुआ है।

क्या पूरा पैसा वापस मिल गया?
नहीं। अभी तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, ठगी की पूरी रकम वापस मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से करीब 1.78 करोड़ रुपये पर होल्ड या लियन लगाया गया है। इसका मतलब है कि इस रकम को फिलहाल रोकने की कार्रवाई की गई है, ताकि उसे आगे निकाला या इस्तेमाल न किया जा सके।
ध्यान देने वाली बात है कि पैसा होल्ड होना और पीड़ित को पैसा वापस मिलना दो अलग-अलग बातें हैं। रकम की वास्तविक वापसी बैंकिंग प्रक्रिया और आगे की जांच पर निर्भर करेगी।

साइबर ठग इस तरह लोगों को कैसे फंसाते हैं?
इस घटना से एक बार फिर पता चलता है कि साइबर अपराधी केवल आम लोगों को ही नहीं, बल्कि कारोबारियों और बड़े बैंक बैलेंस वाले लोगों को भी निशाना बना सकते हैं।
साइबर ठगी के कुछ आम तरीके इस प्रकार हैं:

  1. फर्जी बैंक अधिकारी बनकर फोन करना
    ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर फोन करते हैं। वे कहते हैं कि आपका बैंक खाता बंद होने वाला है या KYC अपडेट नहीं है। इसके बाद OTP, PIN या बैंक की जानकारी मांगते हैं।
  2. फर्जी लिंक भेजना
    मोबाइल पर SMS या WhatsApp के जरिए लिंक भेजा जाता है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करके अपनी बैंकिंग जानकारी भरता है, उसकी जानकारी ठगों तक पहुंच सकती है।
  3. नौकरी और लोन के नाम पर ठगी
    कुछ ठग अच्छी नौकरी, कम ब्याज पर लोन या तुरंत पैसे दिलाने का लालच देते हैं। इसके बदले रजिस्ट्रेशन फीस या दूसरी रकम मांगते हैं।
  4. स्क्रीन शेयरिंग ऐप के जरिए ठगी
    कुछ अपराधी लोगों को AnyDesk या दूसरे रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। ऐसे ऐप के जरिए अगर किसी अनजान व्यक्ति को फोन का एक्सेस दे दिया जाए तो वह मोबाइल पर मौजूद जानकारी देख सकता है और कुछ परिस्थितियों में डिवाइस को नियंत्रित भी कर सकता है।
  5. बैंक खाता किराये पर लेने का लालच
    कुछ लोग दूसरों को कमीशन देने का लालच देकर उनका बैंक खाता, ATM कार्ड या पासबुक ले लेते हैं। बाद में ऐसे खातों का इस्तेमाल ठगी के पैसे को आगे भेजने में किया जा सकता है।
    इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता इस्तेमाल करने देना बहुत जोखिम भरा है।

आम लोग साइबर ठगी से कैसे बचें? 10 जरूरी सावधानियां
आज के समय में मोबाइल और इंटरनेट से बैंकिंग करना आसान हो गया है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही से बड़ी रकम का नुकसान हो सकता है।
OTP किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP मांगने का हकदार नहीं है।
UPI PIN गोपनीय रखें: पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN डालने की जरूरत नहीं होती।
अनजान लिंक न खोलें: WhatsApp, SMS या ईमेल पर आए संदिग्ध लिंक से दूर रहें।
फर्जी ऐप डाउनलोड न करें: केवल आधिकारिक Play Store से ऐप डाउनलोड करें।
स्क्रीन शेयरिंग से बचें: अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल का रिमोट एक्सेस न दें।
बैंक खाते की जानकारी साझा न करें: ATM कार्ड, CVV, पासवर्ड और इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
खाता किराये पर न दें: कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता किसी दूसरे को इस्तेमाल न करने दें।
बैंक अलर्ट चालू रखें: SMS और ईमेल अलर्ट से खाते में होने वाले लेनदेन की जानकारी मिलती रहेगी।
नियमित रूप से बैंक स्टेटमेंट देखें: किसी भी अनजान लेनदेन को नजरअंदाज न करें।

बैंक के आधिकारिक नंबर से ही संपर्क करें: Google पर मिले अनजान नंबरों पर भरोसा न करें।
भारतीय रिजर्व बैंक भी लोगों को चेतावनी देता है कि अपना बैंक खाता दूसरों के पैसों के लेनदेन के लिए इस्तेमाल न होने दें। ऐसा करने पर कानूनी परेशानी हो सकती है।

अगर आपके खाते से पैसे निकल जाएं तो तुरंत क्या करें?
1930 – राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन
1930
साइबर ठगी होने पर तुरंत इस नंबर पर कॉल करें। जितनी जल्दी शिकायत करेंगे, पैसे को रोकने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है।
ये कदम भी उठाएं:
अपने बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर फोन करके खाता या संबंधित कार्ड/UPI को सुरक्षित करवाएं।
बैंक में अनधिकृत लेनदेन की शिकायत दर्ज कराएं।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल⁠ पर शिकायत दर्ज करें।
बैंक ट्रांजैक्शन ID, SMS, स्क्रीनशॉट और अन्य सबूत सुरक्षित रखें।

इस घटना से क्या सीख मिलती है?
दिल्ली का यह मामला केवल एक कारोबारी के साथ हुई ठगी नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए चेतावनी है जो अपने बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन को लेकर लापरवाही बरतते हैं।
इस घटना में कथित ठगों ने कई बैंक खातों, नकद लेनदेन और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसे को छिपाने की कोशिश की। इससे यह भी समझ आता है कि साइबर अपराध का नेटवर्क कितना बड़ा और जटिल हो सकता है।
पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन मामले की जांच अभी जारी है। यह पता लगाना बाकी है कि कारोबारी के बैंक खाते तक आरोपियों की पहुंच कैसे बनी और इस पूरे नेटवर्क में दूसरे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
सबसे जरूरी बात: बैंक खाते में बड़ी रकम हो या छोटी, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी हर खाताधारक की है। किसी अनजान व्यक्ति पर भरोसा करके अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करना भारी पड़ सकता है।

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