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हिंदू नववर्ष 2026: आज से शुरू हुआ विक्रम संवत 2083, 

न्यू दिल्ली
तरुण कश्यप

आज यानी 19 मार्च 2026, गुरुवार से हिंदू नववर्ष ‘विक्रम संवत 2083’ का उल्लास के साथ आगाज हो गया है। चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होने वाले इस नव संवत्सर को देश के विभिन्न हिस्सों में गुड़ी पड़वा, उगादि और चैत्र नवरात्रि के रूप में बड़े धूमधाम से मनाया जा रहा है।

इस साल की सबसे बड़ी विशेषता: 13 महीनों का होगा साल
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, विक्रम संवत 2083 सामान्य वर्षों से अलग है क्योंकि इस बार साल में 12 नहीं बल्कि 13 महीने होंगे। खगोलीय कारणों से इस वर्ष ज्येष्ठ मास का अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) जुड़ रहा है, जो 17 मई से 15 जून 2026 तक रहेगा। धार्मिक दृष्टि से अधिकमास को दान-पुण्य और आध्यात्मिक प्रगति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

आज के विशेष संयोग और मुहूर्त:

  • प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 19 मार्च सुबह 6:52 बजे से。
  • चैत्र नवरात्रि की शुरुआत: आज से ही मां दुर्गा की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि भी शुरू हो गया है。
  • कलश स्थापना (घटस्थापना) मुहूर्त: सुबह 6:52 से 7:53 बजे के बीच का समय कलश स्थापना के लिए सबसे उत्तम बताया गया है。

कैसा रहेगा नया संवत्सर?
ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, इस संवत्सर का नाम ‘रौद्र’ है। इस वर्ष के राजा बृहस्पति (गुरु) और मंत्री मंगल होंगे। राजा गुरु होने के कारण समाज में धार्मिक कार्यों में वृद्धि, अच्छी वर्षा और कृषि क्षेत्र में समृद्धि के योग बन रहे हैं। वहीं मंत्री मंगल होने से कुछ क्षेत्रों में महंगाई और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है。

देशभर में विविध रंग:
आज के दिन को महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत (कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना) में उगादि और उत्तर भारत में नव संवत्सर व चैत्र नवरात्रि के रूप में मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी।

हिन्दू नव वर्ष (नव संवत्सर) मनाने के पीछे सनातन धर्म में कई गहरी धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक मान्यताएं हैं। यहाँ मुख्य कारण दिए गए हैं:

1. सृष्टि की रचना का दिन (The Day of Creation)

ब्रह्म पुराण के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (आज के दिन) को ही ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी। इसीलिए इसे ‘सृष्टि का जन्मदिन’ माना जाता है। इसी दिन से सतयुग की शुरुआत भी मानी जाती है। [1, 2]

2. सम्राट विक्रमादित्य की विजय

ऐतिहासिक दृष्टि से, इसी दिन महाराजा विक्रमादित्य ने शकों (विदेशी आक्रमणकारियों) को पराजित कर भारत से बाहर खदेड़ा था। इस विजय की स्मृति में उन्होंने ‘विक्रम संवत’ की शुरुआत की, जो आज भी हिन्दू कैलेंडर का आधार है। [3, 4]

3. भगवान राम का राज्याभिषेक

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, लंका विजय के बाद जब भगवान श्री राम अयोध्या लौटे, तो चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन ही उनका राज्याभिषेक हुआ था। यह दिन बुराई पर अच्छाई और धर्म की जीत का प्रतीक है। [5, 6]

4. मां दुर्गा की उपासना (चैत्र नवरात्रि)

इसी दिन से चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है। माना जाता है कि इसी दिन से शक्ति की उपासना शुरू कर प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। [7]

5. प्राकृतिक और वैज्ञानिक कारण

  • ऋतु परिवर्तन: इस समय वसंत ऋतु का आगमन होता है। पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फसलें पकने लगती हैं। प्रकृति खुद को ‘रिसेट’ करती है। [8]
  • खगोलीय आधार: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य मेष राशि में प्रवेश की तैयारी करता है और दिन-रात लगभग बराबर होने लगते हैं, जो एक नए चक्र की शुरुआत है। [9]

6. अन्य महत्वपूर्ण घटनाएं

  • मत्स्य अवतार: भगवान विष्णु ने हयग्रीव का वध करने और वेदों की रक्षा के लिए इसी दिन ‘मत्स्य अवतार’ लिया था। [10]
  • सिख गुरु अंगद देव का जन्म: इसी पावन तिथि को सिखों के दूसरे गुरु, गुरु अंगद देव जी का प्रकाश उत्सव भी मनाया जाता है।

सृष्टि के आरंभ का यह पर्व आपके जीवन में नई ऊर्जा और सुख-समृद्धि लेकर आए। संकल्प लें कि इस नए साल में हम अपनी विरासत को और मजबूत बनाएंगे। फिलहाल इस बुलेटिन में इतना ही, देश-दुनिया की तमाम अपडेट्स के लिए सब्सक्राइब करें हमारा डिजिटल प्लेटफॉर्म। सावधान नेशन न्यूज

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