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दुनिया का बदला मिजाज: कहीं प्रचंड गर्मी, कहीं भारी बारिश, मौसम ने बढ़ाई वैश्विक चिंता

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नई दिल्ली, 10 जून 2026

दुनिया भर में मौसम इस समय तेजी से बदल रहा है। एक ओर एशिया और यूरोप के कई हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं, वहीं दूसरी ओर दक्षिण एशिया, मध्य अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित हो रही एल नीनो (El Niño) स्थिति आने वाले महीनों में मौसम को और अधिक चरम बना सकती है।

भारत में मानसून की दस्तक
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और पूर्वोत्तर राज्यों के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई है। पश्चिमी तट और पूर्वोत्तर भारत में अगले कुछ दिनों तक भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। वहीं दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आंधी-तूफान और धूलभरी हवाएं चल सकती हैं।

हालांकि देश के कुछ हिस्सों में गर्मी अभी भी लोगों को परेशान कर रही है। उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। भारतीय मौसम विभाग ने जून महीने में उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब और गुजरात समेत कई राज्यों में सामान्य से अधिक हीटवेव दिनों की संभावना जताई है।

यूरोप में रिकॉर्ड गर्मी
यूरोप इस समय असामान्य गर्मी का सामना कर रहा है। स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और ब्रिटेन में तापमान सामान्य से काफी ऊपर दर्ज किया गया है। कई स्थानों पर महसूस किया जाने वाला तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार मई 2026 विश्व स्तर पर दूसरा सबसे गर्म मई महीना रहा, जिसने जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

यूरोप के कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनी हुई है, जबकि तुर्किये और बुल्गारिया जैसे देशों में अचानक आई भारी बारिश और बाढ़ ने नुकसान पहुंचाया है।

अमेरिका में गर्मी और तूफानों का मिश्रण
संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी हिस्सों, विशेषकर टेक्सास और खाड़ी तटीय क्षेत्रों में गर्म और उमस भरा मौसम बना हुआ है। वहीं मध्य-पश्चिमी राज्यों में तेज आंधी, ओलावृष्टि और कुछ इलाकों में बवंडर (टॉर्नेडो) का खतरा बना हुआ है। मौसम विशेषज्ञों ने बड़े ओलों और 75 मील प्रति घंटे तक की तेज हवाओं की चेतावनी दी है।

मध्य अमेरिका में उष्णकटिबंधीय तूफानों का खतरा
मेक्सिको और मध्य अमेरिका के कई देश इस समय उष्णकटिबंधीय प्रणालियों से प्रभावित हैं। ट्रॉपिकल स्टॉर्म क्रिस्टिना और ट्रॉपिकल डिप्रेशन बोरिस के कारण निकारागुआ, अल सल्वाडोर, होंडुरास, ग्वाटेमाला और कोस्टा रिका में भारी बारिश हो रही है। कुछ क्षेत्रों में अचानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है।

अफ्रीका और एशिया के अन्य हिस्से
अफ्रीका के कई क्षेत्रों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग है। पश्चिमी और पूर्वी अफ्रीका के कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति बनी हुई है, जबकि अन्य क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियां देखी जा रही हैं। इसी प्रकार मध्य एशिया और यमन के कुछ हिस्सों में भी मौसम असंतुलित बना हुआ है।

एल नीनो बढ़ा सकता है चुनौतियां
विश्व मौसम संगठन (WMO) के अनुसार जून से अगस्त 2026 के बीच एल नीनो बनने की संभावना लगभग 80 प्रतिशत है और इसके वर्ष के अंत तक बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। एल नीनो के प्रभाव से कई देशों में तापमान बढ़ सकता है, कुछ क्षेत्रों में सूखा पड़ सकता है जबकि अन्य जगहों पर अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

निष्कर्ष
10 जून 2026 को दुनिया का मौसम कई चरम स्थितियों का मिश्रण दिखाई दे रहा है। भारत में मानसून राहत लेकर आ रहा है, यूरोप और अमेरिका के कई हिस्से गर्मी से जूझ रहे हैं, जबकि मध्य अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताहों में एल नीनो के प्रभाव से मौसम और अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है, इसलिए लोगों को स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान देना चाहिए।

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