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सावधान नेशन न्यूज़

🇮🇳 UNSC में स्थायी सीट के लिए भारत को 4 यूरोपीय देशों का समर्थन, क्या अब खुलेगा रास्ता? जानिए पूरी सच्चाई

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नई दिल्ली, 22 सितंबर 2026

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी को एक और महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन मिला है। यूरोप के चार देशों—हंगरी, पोलैंड, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य (Czechia)—ने भारत को सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनाए जाने की मांग का समर्थन किया है। यह समर्थन 21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई पहली V4+India विदेश मंत्रियों की बैठक में सामने आया।

लेकिन यहां एक बात बिल्कुल साफ समझना जरूरी है—चार देशों का समर्थन भारत के लिए कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इससे भारत को अभी UNSC की स्थायी सीट नहीं मिल गई है और न ही सीट मिलने की कोई तारीख तय हुई है। UNSC में बदलाव के लिए आगे बहुत लंबी और जटिल अंतरराष्ट्रीय प्रक्रिया से गुजरना होगा।

कौन-कौन से चार यूरोपीय देश भारत के साथ आए?
भारत को ताजा समर्थन Visegrád Group यानी V4 के चार देशों से मिला है:
पोलैंड
हंगरी
स्लोवाकिया
चेक गणराज्य
इन चारों देशों ने सामूहिक रूप से भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने बैठक के बाद कहा कि V4 देशों की सहमति है कि ग्लोबल साउथ के एक प्रमुख देश और हिंद-प्रशांत की उभरती शक्ति के रूप में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी स्थान मिलना चाहिए।

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और V4 देशों के विदेश मंत्रियों की यह पहली उच्चस्तरीय V4+India बैठक थी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे एक “नया ऐतिहासिक अवसर” बताया।

🌎 क्या सिर्फ इन चार देशों ने ही भारत का समर्थन किया है?
नहीं। भारत की स्थायी सदस्यता की मांग को लंबे समय से कई देशों का समर्थन मिलता रहा है।
विशेष रूप से फ्रांस और रूस ने भारत की स्थायी सदस्यता का स्पष्ट समर्थन दोहराया है। फ्रांस ने हालिया भारत-फ्रांस संयुक्त बयान में भारत की स्थायी UNSC सदस्यता के लिए अपने “दृढ़ समर्थन” को दोहराया।

रूस ने भी 2025 के भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के संयुक्त बयान में भारत की सुधारित और विस्तारित UNSC में स्थायी सदस्यता के लिए अपने लगातार समर्थन को दोहराया था।

इसके अलावा भारत G4 समूह का हिस्सा है। G4 में:
भारत
जापान
जर्मनी
ब्राजील
शामिल हैं। ये देश UNSC में सुधार और एक-दूसरे की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करते हैं।

ब्रिटेन ने भी आधिकारिक रूप से भारत की स्थायी सीट का समर्थन किया है। ब्रिटेन की संसद में 2024 में दिए गए सरकारी उत्तर में कहा गया था कि UK लंबे समय से UNSC में भारत की स्थायी सीट का समर्थन करता है।

अमेरिका का रुख भी भारत की स्थायी सदस्यता के समर्थन में रहा है, जबकि चीन की स्थिति अलग और अधिक जटिल है। भारत के विदेश मंत्रालय की एक आधिकारिक नीति-सामग्री में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और रूस समेत कई देशों के समर्थन का उल्लेख किया गया है।

हाल ही में 12 सितंबर 2026 के BRICS न्यू दिल्ली घोषणा-पत्र में भी चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में ब्राजील और भारत की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं के समर्थन को दोहराया।

🇮🇳 भारत को स्थायी सीट की जरूरत क्यों महसूस होती है?
UNSC की मौजूदा व्यवस्था 1945 में बनी दुनिया के शक्ति-संतुलन को काफी हद तक दर्शाती है। आज संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या और वैश्विक आर्थिक-सामरिक परिस्थितियां काफी बदल चुकी हैं।
वर्तमान UNSC में कुल 15 सदस्य हैं। इनमें पांच स्थायी सदस्य हैं:
अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन।
इन पांचों के पास वीटो पावर है। बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं और दो साल के लिए चुने जाते हैं।

भारत का तर्क है कि आज की वैश्विक व्यवस्था में एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका की बेहतर और स्थायी भागीदारी जरूरी है।
भारत खुद UNSC का आठ बार निर्वाचित अस्थायी सदस्य रह चुका है—सबसे हाल में 2021-22 में।

नई दिल्ली का मानना है कि भारत की आबादी, अर्थव्यवस्था, वैश्विक कूटनीतिक भूमिका, संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में योगदान और ग्लोबल साउथ के साथ जुड़ाव को देखते हुए उसे UNSC के स्थायी ढांचे में जगह मिलनी चाहिए।


लेकिन असली अड़चन कहां है?
यहीं इस पूरी खबर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किसी देश को सिर्फ दूसरे देशों के समर्थन से UNSC का स्थायी सदस्य नहीं बनाया जा सकता।
UNSC की स्थायी सदस्यता में बदलाव के लिए संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में संशोधन की जरूरत होगी। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के Article 108 के अनुसार चार्टर संशोधन के लिए महासभा में दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन और फिर दो-तिहाई सदस्य देशों द्वारा अनुमोदन आवश्यक है। इसमें सभी मौजूदा स्थायी सदस्यों की पुष्टि भी जरूरी है।

यानी भारत के रास्ते में केवल यह सवाल नहीं है कि कितने देश भारत का समर्थन करते हैं। असली सवाल यह भी है कि UNSC के विस्तार के मॉडल पर व्यापक सहमति कैसे बनेगी और मौजूदा P5 देश उस बदलाव को स्वीकार करेंगे या नहीं।


🇨🇳 चीन की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में चीन भी शामिल है। चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता का समर्थन किया है, लेकिन भारत को स्थायी सदस्य बनाने के सवाल पर उसने फ्रांस या रूस जैसी स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं दिखाई है।
इसलिए भारत की दावेदारी के लिए चीन का रुख आने वाले समय में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कारक बना रहेगा।


इसके साथ ही एक और बड़ा प्रश्न है—अगर नए स्थायी सदस्य बनाए जाते हैं, तो क्या उन्हें भी वीटो अधिकार मिलेगा?
भारत लंबे समय से UNSC में स्थायी सदस्यता की ऐसी व्यवस्था की मांग करता रहा है जिसमें नए और पुराने स्थायी सदस्यों के बीच असमानता न हो। लेकिन वीटो का सवाल UNSC सुधार की सबसे कठिन बहसों में से एक है।


♂️ क्या 4 देशों का समर्थन भारत के लिए नए सफर की शुरुआत है?
कूटनीतिक दृष्टि से इसे एक और सकारात्मक कदम कहा जा सकता है, लेकिन इसे स्थायी सीट मिलने की शुरुआत या गारंटी कहना अभी जल्दबाजी होगी।
V4 देशों का समर्थन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल एक देश का समर्थन नहीं बल्कि चार यूरोपीय देशों का सामूहिक समर्थन है।
इसके अलावा भारत और V4 देशों ने केवल UNSC पर बात नहीं की। दोनों पक्षों ने रक्षा, तकनीक, इनोवेशन, रिसर्च, शिक्षा, स्पेस, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा की। विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक और एक वार्षिक बिजनेस फोरम बनाने पर भी सहमति बनी।

इससे भारत के यूरोपीय देशों के साथ व्यापक रणनीतिक संबंधों को भी एक नया संस्थागत मंच मिल सकता है।


❓तो क्या भारत को अब भी मायूसी का सामना करना पड़ेगा?
इसका सीधा जवाब है—अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा।
भारत के समर्थन में कई महत्वपूर्ण देश और समूह हैं, और 2026 में V4 का सामूहिक समर्थन उस सूची में एक और महत्वपूर्ण जोड़ है। लेकिन दूसरी तरफ, UNSC सुधार पर अभी तक ऐसा अंतिम अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं हुआ है जिसके तहत भारत को स्थायी सीट मिलना तय हो गया हो।


इसलिए वर्तमान स्थिति को सबसे सही तरीके से ऐसे समझा जा सकता है:
समर्थन बढ़ रहा है, लेकिन फैसला अभी दूर है।
भारत को आगे तीन मोर्चों पर लगातार कूटनीतिक प्रयास करने होंगे—
पहला, अधिक से अधिक देशों को अपने पक्ष में लाना।
दूसरा, UNSC के विस्तार के मॉडल पर व्यापक सहमति बनाने में भूमिका निभाना।
तीसरा, मौजूदा पांच स्थायी सदस्यों सहित सभी प्रमुख पक्षों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना।


निष्कर्ष: चार देशों का समर्थन बड़ी खबर, लेकिन मंजिल अभी बाकी
21 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में हुई पहली V4+India बैठक से पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत की स्थायी UNSC सदस्यता की दावेदारी के समर्थन को सामने रखा। यह भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक समर्थन है।

भारत के पास पहले से फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अन्य देशों का समर्थन है तथा G4 जैसे मंच उसके प्रयासों को आगे बढ़ाते हैं। लेकिन UNSC की स्थायी सदस्यता अभी हासिल नहीं हुई है।
सबसे बड़ी चुनौती संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के व्यापक सुधार पर सहमति बनाना और चार्टर संशोधन की कठिन प्रक्रिया पूरी करना है। Article 108 के कारण मौजूदा P5 देशों की भूमिका निर्णायक बनी रहेगी।

इसलिए आज की तारीख में सबसे तथ्यात्मक तस्वीर यही है—भारत की दावेदारी को अंतरराष्ट्रीय समर्थन का दायरा बढ़ रहा है, लेकिन स्थायी सीट की मंजिल तक पहुंचने के लिए लंबी कूटनीतिक प्रक्रिया अभी बाकी है।
**यह समर्थन भारत के लिए एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है—मंजिल नहीं।**

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